आलस्य के साथ एनर्जी की हो रही है कमी? हो सकते हैं कफ दोष का शिकार | health – News in Hindi

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अगर खूब थकान, सुस्ती, आलस्य महसूस हो रहा हो, सुबह उठने में दिक्कत हो, एनर्जी कम लग रही हो तो हो सकता है कि व्यक्ति कफ दोष के असंतुलन का सामना कर रहा है. कफ दोष आयुर्वेद के तीन दोषों में से एक है. आयुर्वेद तीन दोषों के सिद्धांतों पर काम करता है जो कि कफ दोष, पित्त दोष और वात दोष है. शरीर में विभिन्न कार्यों को करने के लिए ये ऊर्जा जिम्मेदार होती है. पित्त दोष में अग्नि मुख्य रूप से हावी होती है, वात दोष में हवा और आकाश व कफ दोष में पृथ्वी और जल मुख्य रूप से हावी होने वाले तत्व हैं. कफ दोष शरीर के विभिन्न अंगों तक जल पहुंचाने का काम करता है. यह शरीर के विकास को नियंत्रित करने के लिए जरूरी होता है.

इन कारणों से होता है कफ दोष में असंतुलन

myUpchar से जुड़े डॉ. लक्ष्मीदत्ता शुक्ला का कहना है कि फैटी और चिकना खाद्य पदार्थ खाने, बहुत ज्यादा सोने, ठंड के मौसम में अधिक रहने, दिन के दौरान सोने, शारीरिक रूप से कम सक्रिय रहने और पसीना आने जैसे कारक शरीर में कफ के स्तर के असंतुलन की वजह बनते हैं. myUpchar से जुड़े एम्स के डॉ. नबी वली का कहना है कि कुछ खाद्य पदार्थ कफ पैदा करने में मदद करते हैं. दूध और दूध से बने उत्पाद जैसे दही, पनीर, मक्खन इसमें शामिल हैं.ये शारीरिक और मनोवैज्ञानिक बदलाव दिखते हैं

कफ दोष केवल शरीर की संरचना, रोग प्रतिरोधक क्षमता, शरीर में तरल पदार्थों का स्तर बनाए रखना ही नहीं बल्कि धैर्य, क्षमा, प्रेम, ईमानदारी जैसी भावनाएं इसके कारण होती हैं. तभी तो कफ दोष में असंतुलन आने पर व्यवहार में भी परिवर्तन होने लगता है जैसे सुस्ती, थकान, ज्यादा भावनात्मक होना, उदासी, सुबह उठने में परेशानी, जिद्दी होना आदि. वहीं असंतुलन से कई शारीरिक लक्षण दिखने लगते हैं. इसमें बलगम बनना, पाचन खराब होना, मुंह में नमकीन का स्‍वाद, पीली त्वचा, शीतलता, खुजली, बार-बार पेशाब, धमनियों में फैट जमना, जीभ पर सफेद परत जमना, वजन बढ़ना, बैचेनी बढ़ना, अस्‍थमा, गले की खराश, खांसी और डायबिटीज जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं. वहीं इस दोष में गिरावट आने पर श्वसन मार्ग में सूखापन और पेट में जलन हो सकती है.  कफ दोष से पीड़ित लोग बहुत जल्दी उम्मीद खो देते हैं और डिप्रेशन में चले जाते हैं.

ऐसे संतुलित करें कफ दोष का असंतुलन

  • जल्दी सोएं, जल्दी जागें
  • नियमित शारीरिक गतिविधि, व्यायाम जैसे टहलना, साइकिल चलाना
  • आत्मनिरीक्षण गतिविधियों में शामिल होना जैसे ध्यान, लेखन आदि
  • खुद को गर्म और सूखा रखना
  • गर्म तिल के तेल के साथ नियमित रूप से मालिश
  • रोजाना कुछ देर धूप में टहलना, ताजी हवा में व्यायाम करना
  • त्रिफला, व्‍याघ्रयादि, कंचनार गुग्‍गुल, लवंगादि वटी, निशामलकी, अमृत जैसी जड़ी बूटियां एवं आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन
  • योग की मदद लें। सूर्य नमस्‍कार, अर्ध चंद्रासन, वीरभद्रासन, त्रिकोणासन, वृक्षासन, धनुरासन, शीरासन, पूर्वोत्तानासन और शवासन करें
  • तीखे, कड़वे, सूखे और गर्म खाद्य पदार्थ कफ को संतुलित करते हैं
  • लाल मिर्च, काली मिर्च, अदरक, दालचीनी और जीरे का सेवन करें.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, आयुर्वेद के तीन दोष वात पित्त और कफ क्या हैं? पढ़ें.न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.



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