कोरोना संक्रमण में कमी नहीं लेकिन खत्म हो रहा डर, जानें क्या है इसके पीछे का मनोविज्ञान | health – News in Hindi

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कोरोना रोज नए रिकॉर्ड बना रहा है, फिर भी सड़क पर पहले से ज्यादा लोग नजर आ रहे हैं.

तमाम कोशिशों के बाद भी कोरोना (Corona) महामारी थमने का नाम नहीं ले रही है. लोगों के सामने दोतरफा चुनौती है. पहली खुद को इससे बचाना है और दूसरा लॉकडाउन (Lockdown) से मुकाबला करते हुए कामकाज चलाना है.




  • Last Updated:
    August 31, 2020, 12:57 PM IST

केंद्र सरकार ने अनलॉक 4.0 (Unlock-4) की गाईडलाइन जारी करते हुए जान भी जहान भी फॉर्मूले पर फोकस किया है और लोगों के आम जनजीवन को सामान्य बनाने के लिए कई जगह रियायतें दी हैं और कई चीजों को खोल दिया है. लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी कोरोना (Corona) महामारी थमने का नाम नहीं ले रही है. लोगों के सामने दोतरफा चुनौती है. पहली खुद को इससे बचाना है और दूसरा लॉकडाउन (Lockdown) से मुकाबला करते हुए कामकाज चलाना है. इस बीच, गौर किया जा रहा है कि लोगों में कोरोना संक्रमण को लेकर पहले जितना डर था, अब उतना डर नहीं है यानी पहले लोग डर के कारण घरों से बाहर नहीं निकल रहे थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है. अधिकांश लोगों ने मान लिया है कि उन्हें कोरोना वायरस के साथ जीना सीखना होगा. यही कारण है कि लोग पूरी सावधानी बरतते हुए नौकरी या कामकाज पर जा रहे हैं. इस सब के पीछे मनोविज्ञान है.

पिछले दिनों हुए अध्ययनों में भारतीयों की यह राय सामने आ चुकी है कि उन्हें कोरोना से नहीं, बल्कि आर्थिक बदहाली से ज्यादा डर लगता है. यही कारण है कि कोरोना रोज नए रिकॉर्ड बना रहा है, फिर भी सड़क पर पहले से ज्यादा लोग नजर आ रहे हैं. फोर्टिस हेल्थ केयर में मेंटल हेल्थ एंड बिहेवरियल साइंसेस के डायरेक्टर डॉ. समीर पारिख के अनुसार, ‘आर्थिक स्थिति अच्छे जीवन का आधार है और कई लोगों को लॉकडउन में सब कुछ बंद होने के कारण कठिन स्थितियों का सामना करना पड़ा है. लेकिन विपरीत हालात में परिजनों का आपसी सपोर्ट सबसे अहम् है. जो लोग कोविड19 के बदली जिंदगी के असर के बीच अगर डिप्रेशन में हैं, तो उन्हें ऐसे सपोर्ट सिस्टम की सबसे ज्यादा जरूरत है.’

डॉ. समीर पारिख आगे कहते हैं, आर्थिक स्थिति पर मार पड़ने से इन्सान सबसे ज्यादा टूट रहा है. उसने जब लोन लिया था, तब सोचा नहीं था कि कभी ईएमआई के पैसे भी नहीं होंगे. ऐसे लोगों को मदद की जरूरत है. आर्थिक मदद भले ही न की जाए, लेकिन भावनात्मक सपोर्ट जरूर करें. परिवार और दोस्त इसमें सबसे अहम भूमिका निभा सकते हैं. यदि ऐसे हालात का असर दिमाग पर पड़ रहा है तो डॉक्टर की मदद ले सकते हैं. मरीज को यह बताएं कि डॉक्टरों के पास उनकी इस मनोदशा का इलाज है. इसलिए मजबूती से आगे बढ़ें. कोरोना महामारी महज वक्त की बात है. कुछ समय बाद सब कुछ सामान्य हो जाएगा.लॉकडाउन ने दिमाग पर डाला बुरा असर

लॉकडाउन के कारण कामकाज तो ठप्प हुए ही, लोगों को 2-3 महीने तक घरों में कैद रहना बहुत मुश्किल भरा रहा. इसका मनोवैज्ञानिक कारण कई लोगों पर पड़ा. खासतौर पर युवाओं पर. आज भी कई युवा ऐसे हैं, जो लॉकडाउन के कारण अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं. कई लोग इतना संवेदनशील हो गए हैं कि सेनेटाइजर का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने लगे हैं.

myUpchar से जुड़े एम्स के डॉ. अजय मोहन के अनुसार, जब तक इलाज नहीं मिल जाता, तब तक सावधानी ही कोरोना का इलाज है. इसलिए घर से बाहर निकल रहे हैं, ऑफिस जा रहे हैं तो सभी जरूरी बातों का ध्यान रखें. अपने हाथों को समय-समय पर सेनेटाइज करें. फिजिकल डिस्टेंसिंग यानी शारीरिक दूरी का पालन करें. कोरोना या इस जैसी बीमारियों से दूर रहना है तो स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं. पौष्टिक चीजें खाएं. योग और प्राणायाम को जीवन का हिस्सा बनाएं. सर्दी-जुकाम, बुखार जैसी आम बीमारियों के लिए घरेलू उपायों का इस्तेमाल करें. अस्पताल जाने से बचें, क्योंकि कोरोना का सबसे ज्यादा खतरा वहां है. घर में सकारात्मकता बनाए रखें. अच्छी किताबें पढ़ें, अच्छा संगीत सुनें. इस बातों का ध्यान रखेंगे तो कोरोना काल में भी सामान्य जीवन जी सकेंगे.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल,  क्रोनिक डिप्रेशन की वजह से आत्महत्या जैसा कदम उठाते हैं लोग पढ़ें.न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.

अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए ना तो myUpchar और ना ही News18 जिम्मेदार होगा।



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