पेट की चर्बी को चक्‍की चलनासन की मदद से करें कम, मंडुकासन से दूर होगी गैस की समस्या | health – News in Hindi

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योगाभ्यास (Yoga) करते वक्त लय, गति और संतुलन का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है. इसके अलावा अपनी क्षमता का भी जरूर ध्यान रखें. हर अभ्यास अपनी क्षमता अनुसार ही करें. किसी भी योग को करने के लिए अपने शरीर पर जबरन फोर्स न डालें. अपने शरीर को स्वस्थ (Healthy) रखने के लिए खुद से संकल्प लेना जरूरी है. खुद से संकल्प लें कि अपने स्वास्थ्य के लिए आप रोज एक घंटे योग को जरूर देंगे. खासकर वर्क फ्रॉम होम कर रहे लोगों को न सिर्फ पीठ, कमर और गर्दन में दर्द महसूस होता है बल्कि उनके पेट की चर्बी भी घंटों बैठकर काम करने के कारण बढ़ने लगती है. ऐसे में आपको कुछ खास योगासनों को करने की जरूरत है.

मलासन
मल निकालते वक्त हम जिस अवस्था में बैठते हैं उसे मलासन कहते हैं. बैठने की यह स्थति पेट और पीठ के लिए बहुत ही लाभदायक रहती है.

कैसे करें मलासनदोनों घुटनों को मोड़ते हुए मल त्याग करने वाली अवस्था में बैठ जाएं. फिर दाएं हाथ की कांख को दाएं और बाएं हाथ की कांख को बाएं घुटने पर टिकाते हुए दोनों हाथ को मिला दें (नमस्कार मुद्रा). उक्त स्थिति में कुछ देर तक रहने के बाद सामान्य स्थिति में आ जाएं.

मलासन के फायदे
मलासन से घुटनों, जोड़ों, पीठ और पेट का तनाव खत्म होता है और इनका दर्द कम होता है. इससे कब्ज और गैस की समस्या से भी मुक्ति मिलती है.

चक्‍की चलनासन
इस आसन की उत्‍पत्ति पुराने जमाने में हाथ से चलाई जाने वाली चक्‍की से हुई है. इसलिए इसका नाम भी चक्‍की चलनासन है यानी यह आसन उस तरह किया जाता है, जिस तरह हाथ से आटा पीसने वाली चक्‍की चलाई जाती है. इसलिए इसे करना न मुश्किल है और न ही ज्‍यादा टैक्‍नीकल.

चक्‍की चलनासन कैसे करें
चक्‍की चलनासन करना बेहद आसान है. इसके लिए आप फर्श पर दरी या मैट बिछाकर बैठ जाएं.
बैठने के बाद अपने दोनों पैरों को बिल्‍कुल सामने की ओर फैला लें. हालांकि चक्‍की बैठकर चलाई जाती थी पर इसमें आपको पैरों के बल नहीं बल्कि कूल्‍हों को जमीन पर टिका कर आराम से बैठना है.
बैठने के बाद दोनों हाथों को जोड़कर पैरों के पास तक यानी अपने सामने लाएं. दोनों हाथों को जोड़े हुए ही इसे क्‍लॉक वाइज घुमाना शुरू करें, जिस तरह चक्‍की चलाई जाती है. इसी तरह एंटी क्‍लॉक वाइज घुमाएं. शुरुआत में आप इसे 10 मिनट कर सकते हैं.

चक्‍की चलनासन के फायदे
इस आसन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे बैली फैट घटाने में मदद मिलती है. लटके हुए पेट को वापस शेप में लाने के लिए यह आसन बहुत फायदेमंद है. चक्‍की चलनासन करने से लोअर एब्‍डोमन और पेल्विक एरिया का भी एक्सरसाइज होता है. इससे कमर को लचीला बनाने में भी मदद मिलती है.

मंडुकासन
मंडूक का अर्थ है मेंढक अर्थात इस आसन को करते वक्त मेंढक के आकार जैसी स्थिति प्रतीत होती इसीलिए इसे मंडूकासन कहते हैं.

कैसे करें मंडुकासन
सर्वप्रथम दंडासन में बैठते हुए वज्रासन में बैठ जाएं फिर दोनों हाथों की मुठ्ठी बंद कर लें. मुठ्ठी बंद करते समय अंगूठे को उंगलियों से अंदर दबाइए. फिर दोनों मुठ्ठियों को नाभि के दोनों ओर लगाकर श्वास बाहर निकालते हुए सामने झुकते हुए ठोड़ी को भूमि पर टिका दें. थोड़ी देर इसी स्थिति में रहने के बाद वापस वज्रासन में आ जाएं.

मंडुकासन के फायदे
पेट के लिए अत्यंत ही लाभयादयक इस आसन से अग्नयाशय सक्रिय होता है जिसके कारण डायबिटीज के रोगियों को इससे लाभ मिलता है. यह आसन उदर और हृदय के लिए भी अत्यंत लाभदायक माना गया है. यह आसन पेट के रोग जैसे कब्ज, गैस, अफारा, भूख न लगना, अपच, भोजन का पाचन ठीक न होना, विकारों को दूर करता है. इस आसन से आमाशय, छोटी आंत, बड़ी आंत, पित्तकोष, पेन्क्रियाज, मलाशय, लिवर, प्रजनन अंगों और किडनी जैसे सभी अंगों पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है.

त्रिकोणासन
त्रिकोणासन के अभ्यास में शरीर के कई अंग शामिल होते हैं जिससे उन्हें अच्छे से स्ट्रेच किया जा सकता है. हिप्स, कमर, बाजू, कंधे, हैम्स्ट्रिंग, काव्स, पैर और फोरआर्म्स की मसल्स इस आसन के अभ्यास के दौरान काम करती हैं. यह योग मुद्रा आपके बॉडी पोस्चर को बेहतर करने में मदद करता है. यह आसन मांसपेशियों को फैलाने और नियमित शारीरिक फंक्शन में सुधार करने के लिए जाना जाता है.

त्रिकोणासन के फायदे
-पैरों, घुटनों, एड़ी यानी एंकल्स, बाजुओं और सीने को मजबूत करने में मदद करता है.
-इस आसन की मदद से कूल्हों, हैमस्ट्रिंग, काव्स, कंधों, सीने और रीढ़ को स्ट्रेच करता है और इन्हें खोलता है.
-मानसिक और शारीरिक संतुलन को बढ़ाता है.
-पाचन में सुधार करने में मदद करता है.
-चिंता, तनाव, पीठ दर्द को कम करता है.
-अगर इसका अभ्यास सही तरीके से किया जाए तो यह कंधों के अलाइनमेंट को सही रखता है और इन्हें बेहतर शेप में लाने में मदद करता है.
-नियमित रूप से त्रिकोणासन का अभ्यास गर्दन के दर्द से आराम दिलाने में मदद कर सकता है.

पश्चिमोत्तानासन
पश्चिमोत्तानासन योग का नाम दो शब्दों के मेल से बना है- पश्चिम और उत्तान. पश्चिम यानी पश्चिम दिशा या शरीर का पिछला हिस्सा और उत्तान मतलब खिंचा हुआ. रीढ़ की हड्डी के दर्द से निजात पाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को पश्चिमोत्तानासन योग करना चाहिए. इस आसन का अभ्यास करते समय शरीर के पिछले हिस्से यानी रीढ़ की हड्डी में खिंचाव उत्पन्न होता है, इस कारण इस आसन को पश्चिमोत्तानासन कहा जाता है. इस आसन को करने से शरीर का पूरा हिस्सा खिंच जाता है और यह शरीर के लिए बहुत लाभदायक होता है. जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या होती है, उनके लिए पश्चिमोत्तानासन रामबाण की तरह काम करता है और इस रोग के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है. इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से ग्रसित लोगों के लिए भी यह आसन बहुत फायदेमंद माना जाता है.

पश्चिमोत्तानासन के फायदे
तनाव दूर करने में फायदेमंद
पेट की चर्बी दूर करने में मददगार
हड्डियों को लचीला बनाने में कारगर
बेहतर पाचन के लिए फायदेमंद
अनिद्रा की समस्या को दूर करता है

उष्ट्रासन
उष्ट्रासन में शरीर ऊंट की आकृति बनाता है. जैसे ऊंट रेगिस्तान के मुश्किल हालातों में भी आसानी से रह सकता है, अगर इस आसन का अभ्यास नियमित तौर पर किया जाए तो ये शरीर से हर शारीरिक और मानसिक परेशानी को दूर करके स्वस्थ जीवन देने में मदद करता है.

उष्ट्रासन के फायदे
पाचन सुधारने में मदद करता है
सीने और पेट के निचले हिस्से से अतिरिक्त चर्बी कम होती है
कमर और कंधों को मजबूत बनाता है
कमर के निचले हिस्से में दर्द कम करने में मदद करता है
इस आसन के अभ्यास से रीढ़ की हड्डी में लचीलापन बढ़ता है.
शरीर का पोश्चर सुधारने में भी ये आसन मदद करता है.

दंडासन
दंडासन एक संस्कृत का शब्द है जो दो शब्दों से मिलकर बना है, जिसमें पहला शब्द डंडा का अर्थ छड़ी या स्टिक है और दूसरा शब्द आसन का अर्थ पोज या मुद्रा है. इसे अंग्रेजी में स्टाफ पोज (Staff Pose) के नाम से भी जाना जाता है. दंडासन एक ऐसा अभ्यास है जो शरीर को उन्नत आसन करने के लिए तैयार करता है. यह शरीर को पूरी तरह से संरेखित करने के लिए क्षमता को भी बढ़ाता है. दंडासन, योग मुद्रा का एक सरल आसन है. यह आत्म-जागृति की ऊर्जा के लिए मार्ग बनाता है. इसलिए दंडासन को शक्ति और अच्छे रूप को बढ़ावा देने के लिए आदर्श आसन माना जाता है, जो किसी की आध्यात्मिक यात्रा का समर्थन करता है.

दंडासन करने के फायदे
कंधों में खिंचाव के लिए लाभदायक
रीढ़ की हड्डी को लचीला और मजबूत बनाने के लिए
मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए
सायटिका दर्द में लाभकारी
मस्तिष्क को शांत करता है
पाचन शक्ति को बढ़ाता है

वज्रासन
बहुत हेवी डाइट के बाद तुरंत सोने या बैठकर टीवी देखने से डाइजेशन संबंधी समस्याएं हो जाती हैं. ऐसे में अगर आप रोज खाने के बाद टीवी देखने या तुरंत सोने के बजाय वज्रासन को अपने रूटीन में शामिल करेंगे तो यकीनन आप डाइजेशन से संबंधित समस्याओं से दूर रहेंगे. वज्रासन को आप दिन में कभी भी कर सकते हैं लेकिन यह अकेला ऐसा आसन है जो खाने के तुरंत बाद बहुत अधिक प्रभावी होता है. यह न सिर्फ पाचन की प्रक्रिया ठीक रखता है बल्कि लोअर बैकपेन से भी आराम दिलाता है.

वज्रासन करने का तरीका
इस आसन को करने के लिए घुटनों को मोड़कर पंजों के बल सीधा बैठें. दोनों पैरों के अंगूठे आपस में मिलने चाहिए और एड़ियों में थोड़ी दूरी होनी चाहिए. शरीर का सारा भार पैरों पर रखें और दोनों हाथों को जांघों पर रखें. आपकी कमर से ऊपर का हिस्सा बिल्कुल सीधा होना चाहिए. थोड़ी देर इस अवस्था में बैठकर लंबी सांस लें. जिन लोगों को जोड़ों में दर्द हो या गठिया की दिक्कत हो वे इस आसन को न करें

वज्रासन के फायदे
वज्रासन के दौरान शरीर के मध्य भाग पर सबसे अधिक दबाव पड़ता है. इस दौरान पेट और आंतों पर हल्का दबाव पड़ता है जिससे कांस्टिपेशन की दिक्कत दूर होती है और पाचन ठीक रहता है. वज्रासन की मुद्रा में कमर और पैरों की मांसपेशियों का तनाव दूर होता है और ज्वाइंट्स खुलते हैं. अधिक चलने या देर तक खड़े होने के बाद इस आसन की मदद से आराम महसूस होगा.



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