I reserve my right to seek a review and will pay fine, says Prashant Bhushan – सम्मानपूर्वक चुकाऊंगा जुर्माना, अगर SC का कोई और भी फैसला होता तो मैं जरूर मानता : प्रशांत भूषण

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नई दिल्ली:

Prashant Bhushan Contempt Case : अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद वकील-कार्यकर्ता प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) ने प्रेस कांफ्रेंस की. प्रशांत भूषण ने कहा, ”मैंने पहले ही बोला था जो भी सुप्रीम कोर्ट मेरे खिलाफ फैसला देगा मैं खुशी-खुशी मान लूंगा. मैं सम्मानपूर्वक जुर्माना चुकाऊंगा. सुप्रीम कोर्ट के द्वारा लगाए गए जुर्माने की रिव्यू पिटिशन फाइल करने का मुझे अधिकार है. जो मेरा राइट है, मेरा करूंगा. और अगर कोई और भी फैसला होता तो मैं जरूर मानता. सुप्रीम कोर्ट के लिए 37 साल से मेरी रिस्पेक्ट हमेशा रही है.मेरी ट्वीट कोई सुप्रीम कोर्ट या न्यायपालिका को चोट पहुंचाने के लिए किया गया था. ये मुद्दा मेरे या सुप्रीम कोर्ट और किसी जज के खिलाफ नहीं था.”

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प्रशांत भूषण ने कहा, ”हर भारतीय मजबूत न्यायपालिका चाहता है, न्यायपालिका कमजोर हो तो देश और लोकतंत्र कमजोर होता है. मैं देश की जनता का धन्यवाद करना चाहता हूं कि जिन्होंने मेरे समर्थन में अभियान चलाया. जिन लोगों ने मुझे समर्थन दिया, मैं उनका शुक्रिया अदा करता हूं.”

अवमानना मामले में फैसले के बाद प्रशांत भूषण का ट्वीट – ‘मेरे वकील ने दिया 1 रुपए का योगदान’

गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने कोर्ट की अवमानना मामले (Contempt Case) पर फैसला सुनाते हुए उन पर एक रुपये का जुर्माना लगाया. फैसले के अनुसार 15 सितंबर तक जुर्माना नहीं दिए जाने की स्थिति में 3 महीने की जेल हो सकती है और तीन साल के लिए उन्हें वकालत से निलंबित भी किया जा सकता है.

बता दें कि 63 वर्षीय प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) ने यह कहते हुए पीछे हटने या माफी मांगने से इनकार कर दिया कि यह उनकी अंतरात्मा और न्यायालय की अवमानना होगी. उनके वकील ने तर्क दिया है कि अदालत को प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) की अत्यधिक आलोचना झेलनी चाहिए क्योंकि अदालत के कंधे इस बोझ को उठाने के लिए काफी हैं.

अवमानना केस : SC ने प्रशांत भूषण पर लगाया एक रुपये का जुर्माना, न देने पर तीन महीने की जेल

बताते चलें कि 25 अगस्त को जस्टिस अरुण मिश्रा, बीआर गवई और कृष्ण मुरारी ने प्रशांत माफी मांगने से इनकार करने के बाद उनकी सजा पर आदेश सुरक्षित रख लिया था. अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने भी सजा के खिलाफ तर्क दिया है. यह देखते हुए कि न्यायाधीश “स्वयं की रक्षा करने या समझाने के लिए प्रेस के पास नहीं जा सकते हैं,” अदालत ने प्रशांत भूषण के की प्रतिष्ठा का हवाला देते हुए कहा, “अगर इनकी जगह कोई और होता, तो इसे नजरअंदाज करना आसान होता.”

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