PM Modi के मन की बात सुनकर बनारस के 4500 कारीगरों के मन में जगी यह नई उम्‍मीद | varanasi – News in Hindi

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वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम में बनारसी लकड़ी के खिलौनो का जिक्र करते हुए भविष्य में इसकी संभावनाओं पर चर्चा की है. पीएम मोदी ने ये बात तब की, जब चाइनीज खिलौने का आयात बंद है. ऐसे में, पीएम की बातों को लेकर बनारसी खिलौनों के व्यापारी और कारीगर क्या सोचते हैं, कितनी ऊर्जा मिली और क्या चुनौतियां है, इस रिपोर्ट के जरिए हम आपको बताने की कोशिश करते हैं.

दरअसल, साड़ी और पान के साथ बनारस अपनी काष्ठ कला के लिए भी पूरी दुनिया में विख्यात है. कोरोना काल में संकट के जो बादल घिरे, वो पीएम मोदी की मन की बात सुनकर छंटने लगे हैं. चाइना से टक्कर लेते बनारसी खिलौने के कारीगरों को अब दो तरफा उम्मीद जगी है. पहली ये कि चाइना से आयात बंद होने से बड़ा बाजार अब इन खिलौनो के लिए खुला है, तो दूसरा पीएम ने इसको बढ़ावा देने की इच्छा जताई है.

पीएम के प्रयास से बदला लड़की कारीगरों के जीवन
खुद लड़की के खिलौने के लिए नेशनल अवार्ड से सम्मानित कारीगर रामेश्वर सिंह बताते हैं कि साठ साल से किसी ने हमारे हुनर पर ध्यान नहीं दिया.  पीएम मोदी के प्रयास से पहले हमें जीआई टैग मिला और अब विश्व में अपनी पहचान मिली है. इसलिए वो पीएम मोदी को गुरुजी कहते हैं. फिलहाल कोरोना काल में आर्थिक संकट आया, लेकिन आपदा में अवसर खोजते हुए अब चाइना के बायकॉट से बाजार भी बढ़ा है.जीआई टैग मिलने के बाद 40 फीसदी बढ़ा कारोबार

रामेश्वर सिंह मानते हैं कि अभी कुछ जरूरतें हैं, अगर ये पूरी हो जाएं तो तो व्यापार और रफ्तार पकड़ेगा. मौजूदा वक्त में इंटीरियर डेकोरेशन में बनारस के इन खिलौनों को खूब पसंद किया जा रहा है. एक आंकड़े के मुताबिक, पीएम मोदी के प्रयास के बाद जीआई (जियोग्राफिकल इंडीकेशन) टैग मिलने के बाद बनारस का लकड़ी कारोबार करीब 40 प्रतिशत बढ़ा है. एक अनुमान के मुताबिक, यहां करीब दो से ढाई हजार कारीगर जंगली लकड़ी ‘कोरैया’ को अपने हुनर से तराश कर कई प्रकार के खिलौने तैयार करते हैं.

कश्‍मीरीगंज में लकड़ी के खिलौनों का है बड़ा काम
कारीगर गौतम और नंदू कहते हैं कि अभी कोरोना काल में परेशान जरूर हैं, लेकिन उनका मानना है कि पीएम मोदी जो कहते हैं, वो करते हैं. जीआई विशेषज्ञ डा रजनीकांत बताते हैं कि वाराणसी के कश्मीरीगंज, खोजवां इलाके में बड़े स्तर पर लकड़ी के खिलौने बनाए जाते हैं. बनारस का कश्मीरीगंज इलाका लकड़ी के खिलौने बनाने का प्रमुख केंद्र माना जाता है. समय समय पर पीएम मोदी ब्रांड बनारस को प्रोत्साहित करते आए हैं.

योगी यादगार के तौर पर देते हैं बनारस के खिलौने

कुंभ मेले और प्रवासी भारतीय सम्मेलन में यहां के खिलौने को यादगार के तौर में लोगों तक पहुंचाने की पहल यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने की थी. युवा व्यापारी राजकुमार सिंह बताते हैं कि इन दिनों लकड़ी के खिलौने की काफी मांग बढ़ रही है, लेकिन आपूर्ति पूरी तरह से नहीं हो पा रही है. इसके पीछे कई वजह है. कारीगरों की कमी, स्किल्ड न होना, लकड़ी की कमी और बिजली चालित मशीन के लिए कोई सब्सिडी न होना.

बाजार से खत्‍म हो रहे हैं लकड़ी के खिलौने के नए कारीगर
पहले इन खिलौनों को चीन से चुनौती मिल रही थी, लेकिन अब जबकि चाइना बायकॉट चल रहा है तो इनकी उम्मीद बड़ी है. सबसे बड़ी दिक्कत है कि अब नए कारीगर न ही आ रहे हैं और न ही पुराने कारीगर अपने बच्चों को इस हुनर से जोड़ रहे हैं. ये एक बड़ी चिंता का विषय है, जिस पर सरकार को सोचना पड़ेगा. फिलहाल बनारसी लकड़ी के खिलौने में स्किल्ड अपडेट की जरूरत है. जीआइ के कारण जहां एक ओर विश्व में पहचान मिली है तो दूसरी ओर क्वालिटी को कायम रखने की चुनौती बन गई है. बनारसी खिलौने के चटक रंग को यूरोप व अमेरिका में कम पसंद किया जाता है। कुछ नए प्रयोग के साथ उस कारोबार को ऊपर उठाने की कोशिश चल रही है.



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