Q1 GDP : Chief Economic Adviser K Subramanian says- this trend is along expected – मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा – GDP में पहली तिमाही की गिरावट उम्मीद के अनुरूप

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केंद्र ने 20 अप्रैल से धीरे-धीरे आर्थिक गतिविधियों को मंजूरी देनी शुरू की. ज्यादातर रेटिंग एजेंसियों और विशेषज्ञों ने देश के जीडीपी में 2020-21 में गिरावट का अनुमान जताया है. इस बीच, चीन की अर्थव्यवस्था में अप्रैल-जून तिमाही में 3.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि जनवरी-मार्च, 2020 तिमाही में 6.8 प्रतिशत की गिरावट आयी थी.

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जीडीपी के जारी किए गए आंकड़ों पर मुख्य आर्थिक सलाहकार के. सुब्रमण्यम (Chief Economic Adviser K Subramanian) ने कहा कि जीडीपी में पहली तिमाही की गिरावट उम्मीद के अनुरूप है. उन्होंने कहा, ‘अप्रैल से जून वाली तिमाही में पूरा देश लॉकडाउन में रहा था, और उस दौरान अधिकतर बड़ी आर्थिक गतिविधियां प्रतिबंधित रहीं… इसलिए, GDP में गिरावट का यह रुझान उम्मीदों के अनुरूप ही है.’

वहीं, एक अन्य खबर के मुताबिक केन्द्र सरकार का राजकोषीय घाटा लॉकडाउन के कारण कमजोर राजस्व संग्रह के चलते वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों (अप्रैल- जुलाई) में ही पूरे साल के बजट अनुमान को पार कर गया है. महालेखा नियंत्रक (सीजीए) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से जुलाई के दौरान राजकोषीय घाटा इसके वार्षिक अनुमान की तुलना में 103.1 प्रतिशत यानी 8,21,349 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. एक साल पहले इन्हीं चार माह की अवधि में यह वार्षिक बजट अनुमान का 77.8 प्रतिशत रहा था. सरकार का राजकोषीय घाटा उसके कुल खर्च और राजस्व के बीच का अंतर होता है. पिछले साल अक्ट्रबर में यह वार्षिक लक्ष्य से ऊपर निकल गया था.

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश वित्त वर्ष 2020- 21 के बजट में राजकोषीय घाटे के 7.96 लाख करोड़ रुपये यानी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है. कोरोना वायरस महामारी के फैलने से उत्पन्न स्थिति को देखते हुये इन आंकड़ों को संशोधित करना पड़ा. कोराना वायरस की वजह से लागू किये गये लॉकडाउन के कारण आर्थिक गतिविधियों में काफी व्यवधान खड़ा हुआ. केन्द्र सरकार ने 25 मार्च 2020 से पूरे देश में लॉकडाउन लागू किया था ताकि कोविड- 19 के प्रसार पर अंकुश लगाया जा सके. इसके बाद मई से धीरे धीरे लॉकडाउन में ढील दी जान लगी.

पिछले वित्त वर्ष 2019- 20 में राजकोषीय घाटा देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के मुकाबले सात साल के उच्चस्तर 4.6 प्रतिशत पर पहुंच गया. वर्ष के दौरान राजस्व प्राप्ति कमजोर रही जो कि मार्च आते आते और कमजोर पड़ गई. महा लेखा नियंत्रक के आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष के शुरुआती चार माह के दौरान सरकार की राजस्व प्राप्ति 2,27,402 करोड़ रुपये रही. यह राशि वर्ष के बजट के वार्षिक लक्ष्य का 11.3 प्रतिशत है. पिछले साल इसी अवधि में कुल राजस्व प्राप्ति बजट अनुमान का 19.5 प्रतिशत रही थी.

अप्रैल से जुलाई के दौरान कर राजस्व 2,02,788 करोड़ रुपये यानी बजट अनुमान का 12.4 प्रतिशत रहा जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह बजट अनुमान का 20.5 प्रतिशत रहा था. आलोच्य अवधि में सरकार की कुल प्राप्ति 2,32,860 करोड़ रुपये रही जो कि बजट अनुमान का 10.4 प्रतिशत रही. सरकार ने बजट में वित्त वर्ष 2020- 21 के दौरान कुल 22.45 लाख करोड़ रुपये की प्राप्ति का अनुमान लगाया है. वहीं जुलाई अत तक सरकार का कुल व्यय 10,54,209 करोड़ रुपये यानी बजट में पूरे वित्त वर्ष के दौरान होने वाले खर्च का 34.7 प्रतिशत तक पहुंच गया. हालांकि इससे पिछले वर्ष इसी अवश्धि में कुल व्यय पूरे साल के बजट अनुमान का 34 प्रतिशत था.

(इनपुट – भाषा से भी)

 

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