Onam: This festival will be special worship today, know auspicious time | ओणम: इस पर्व की आज होगी खास पूजा आज, जानें शुभ मुहूर्त

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दक्षिण भारत का प्रमुख त्यौहार ओणम इस वर्ष सोमवार, 22 अगस्त से 2 सितंबर तक मनाया जा रहा है। वहीं इसकी खास पूजा आज सोमवार 31 अगस्त को की जा रही है। हालांकि इस बार कोरोना संक्रमण के चलते इस पर्व को सावधानी और सभी नियमों का पालन करते हुए मनाया जा रहा है। जिसके चलते हर वर्ष की तरह धूम देखने को नहीं मिल सकेगी। बता दें कि इस पर्व को केरल में बड़े ही धूम धाम के साथ मनाया जाता है। कृषि की अच्छी पैदावार के लिए इस पर्व को मनाया जाता है। वहीं स्थानीय लोग पूरे 13 दिनों तक ओणम का जश्न मनाते हैं और लोग घरों में दीपक जलाकर पूजा अर्चना करते हैं।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, केरल में महाबली नाम का एक असुर राजा था। उसके आदर सत्कार में ही ओणम त्योहार मनाया जाता है। उनके राज्य में प्रजा बहुत सुखी व संपन्न थी। इसी दौरान भगवान विष्णु वामन अवतार लेकर आए और तीन पग में उनका पूरा राज्य लेकर उनका उद्धार कर दिया। माना जाता है कि वे साल में एक बार अपनी प्रजा को देखने के लिए आते हैं। तब से केरल में हर साल राजा बलि के स्वागत में ओणम का पर्व मनाया जाता है।

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चार महत्वपूर्ण दिन
इस उत्सव में चार दिन सबसे अहम होते हैं। पहला सबसे महत्वपूर्ण दिन ‘उत्तरादम’। इसके बाद दूसरा महत्वपूर्ण दिन होता है ‘थिरु ओणम या थिरुवोनम’। इसके बाद उत्सव का तीसरा सबसे अहम दिन ‘अवितम’ है जिसके तहत राजा बलि की विदाई की तैयारियां की जाती हैं। इसके बाद उत्सव का आखिरी दिन ‘चत्तयम’ होता है।

ओणम उत्सव आरंभ 21 अगस्त 2020
ओणम महोत्सव की अंतिम तिथि: 2 सितंबर 2020
ओणम मुख्य पर्व थिरुवोणम नक्षत्र आरंभ तिथि और समय: 30 अगस्त 2020 दोपहर 01:52
थिरुवोणम नक्षत्र समाप्त: 31 अगस्त 2020 दोपहर 03:04 बजे

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खेती के साथ पर्व का संबंध
इस पर्व का खेती और किसानों से भी गहरा संबंध है। किसान अपनी फसलों की सुरक्षा और अच्छी उपज के लिए इन दिनों श्रावण देवता और पुष्पदेवी की आराधना करते हैं। 13 दिनों तक चलने वाले इस त्यौहार में लोग अपने पूरे घर को फूलों से सजाते हैं। घरों को फूलों से सजाने का कार्यक्रम पूरे 10 दिनों तक चलता है। लोग अपने दरवाजों पर फूलों से रंगोली भी बनाते हैं। ओणम पर्व के दौरान नाव रेस, नृत्य, संगीत, महाभोज जैसे कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है। इस महाभोज कार्यक्रम के दौरान मीठे व्यंजनों और नौ स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं जिनमें मुख्य रूप से पचड़ी काल्लम, ओल्लम, दाव, घी, सांभर, केले और पापड़ के चिप्स शामिल हैं। खास बात ये है कि इन व्यंजनों को केले के पत्तों पर परोसा जाता है।

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