प्राइवेट स्कूलों की हालत खराब, बहुत तेजी से हो रही शिक्षकों की छंटनी

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लखनऊ। कोरोना वायरस  वैश्विक महामारी की मार पूरा देश झेल रहा है। इस महामारी ने सभी के आगे रोजगार का संकट खड़ा कर दिया है। दो महीने से ज्यादा समय तक चलने वाले लॉकडाउन ने हजारों लोगों की नौकरी छीन ली है और उनको बेरोजगार बना दिया है। पैसों के संकट ने निजी स्कूलों की हालत भी अब खस्ता कर दी है। जिसके चलते लखनऊ के निजी स्कूलों में शिक्षकों की बंपर छंटनी शुरू हो गई है। निजी स्कूल प्रबंधनों ने हाथ खड़े कर दिए हैं कि वो अब सैलरी नहीं दे पाएंगे।

छोटे स्कूलों का हाल तो बेहाल है ही इसके साथ बड़े स्कूलों तक की हालत खस्ता  हो गई है। बड़े स्कूलों तक ने छटनी की प्रक्रिया शुरु कर दी है। सबसे ज्यादा प्री-प्राइमरी और प्राइमरी कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षकों की हालत खराब है। कई बड़े स्कूलों ने इनके शिक्षकों को बिना वेतन के घर बैठा दिया है। शिक्षकों से कहा गया है कि जब हालात सामान्य होंगे और बच्चे स्कूल आएंगे तब बुला लिया जाएगा।

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आपको बता दें कि राजधानी में यूपी बोर्ड, सीबीएसई, आईएससी और बेसिक शिक्षा परिषद से जुड़े निजी स्कूलों की संख्या 15 सौ से ज्यादा है। निजी स्कूल प्रबंधनों ने फीस न मिलने की वजह से छटनी करना शुरु कर दिया है। फीस न मिलने के चलते कई छोटे स्कूलों ने अप्रैल से शिक्षकों को वेतन तक नहीं दिया है। अब धीरे धीरे बड़े स्कूल भी कुछ ऐसा ही करने को मजबूर हैं। आपको बता दें कि गोमतीनगर में संचालित शहर के एक नामचीन स्कूल ने अपने शिक्षकों को अब फीस के अनुपात में वेतन देने की घोषणा कर दी है। वहीं, इसी इलाके के एक अन्य निजी स्कूल प्रबंधन ने वेतन को काटकर आधा कर दिया है। ऐसे कई मामले शहर के कई स्कूलों में देखने को मिले हैं।

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अनिल अग्रवाल (अध्यक्ष, अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन) ने कहा, कोई भी स्कूल अच्छे शिक्षकों के बिना नहीं चल सकता। आज हालात खराब हैं। कल फिर अच्छे हो जाएंगे। अभिभावकों द्वारा फीस न दिए जाने के कारण निजी स्कूलों की माली हालत भी बिगड़ी है। शिक्षक और कर्मचारी के इस तरह के  प्रकरणों में नियमों के साथ मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखना जरूरी है।

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  1. योगी सरकार को सभी पत्रकारों को देना चाहिए बीमा कवर की सुविधा: प्रियंका गांधी - First Eye News

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