क्या होता है सेप्सिस? पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को हो गया था सेप्टिक शॉक | health – News in Hindi

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पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी (Former President Pranab Mukherjee) का सोमवार 31 अगस्त 2020 को निधन हो गया. दिमाग में खून का थक्का (Blood Clot) जमने के साथ ही उन्हें लंग इंफेक्शन (Lung Infection) और बाद में कोविड-19 (Covid-19) का संक्रमण भी हो गया था. पूर्व राष्ट्रपति का इलाज दिल्ली के आरआर अस्पताल में चल रहा था और डॉक्टरों ने बताया था कि वे लंग इंफेक्शन के कारण सेप्टिक शॉक (Septic Shock) में थे. आखिर यह सेप्टिक शॉक होता क्या है, यह सेप्सिस (Sepsis) से किस तरह अलग है और कितना खतरनाक है, चलिए जानते हैं.

सेप्सिस क्या है?

ब्लड इंफेक्शन को सेप्सिस या सेप्टिसीमिया कहा जाता है. किसी संक्रमण से होने वाली यह सबसे हानिकारक स्थितियों में से एक है. जब संक्रमण से निपटने के लिए खून में घुलने वाले कैमिकल पूरे शरीर में ही जलन और सूजन का कारण बन जाते हैं तो इसे सेप्सिस कहते हैं. इसकी वजह से शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं और यह कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है और वह काम करना बंद कर सकते हैं. लांसेंट में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के सिएटल में वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के अध्यनकर्ताओं ने 195 देशों के मेडिकल रिकॉर्ड की जांच की. इस दौरान 10.9 करोड़ लोगों की मृत्यु के रिकॉर्ड का भी बारीकी से विश्लेषण किया गया. अध्यनकर्ताओं ने पाया कि साल 2017 में 1.1 करोड़ लोगों की जान सेप्सिस की वजह से गई.सेप्सिस के लक्षण

सेप्सिस के लक्षणों की पहचान करना कुछ कठिन है. इसके बावजूद कुछ संकेत हैं, जिन्हें आप सेप्सिस के लक्षणों के रूप में पहचान सकते हैं –

  • सांस लेने में दिक्कत
  • शरीर का तापमान अचानक कम या ज्यादा होना
  • मानसिक स्थिति में अचानक बदलाव आना
  • प्लेटलेट्स कम होना
  • दिल से असमान्य रूप से पंपिंग होना
  • पेट में दर्द होना
  • पेशाब कम आना

सेप्सिस के कारण

आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम आपके शरीर का आक्रमण करने वाले बाहरी रोगाणुओं और विषाणुओं से बचाव करती है. सेप्सिस के दौरान अंडर-रिएक्शन या ओवर-रिएक्शन के कारण इसमें खराबी आ जाती है.

सेप्सिस के लिए सबसे ज्यादा बैक्टीरियल संक्रमण को ही दोषी माना जाता है, लेकिन यह कई अन्य संक्रमणों की वजह से भी हो सकता है. यह शरीर के किसी भी भाग में हो सकता है. हल्की चोट और खंरोंच से भी सेप्सिस हो सकता है. कई अन्य गंभीर बीमारियों (निमोनिया, यूरिनरी ट्रैक्ट इनफेक्शन, अपेंडिक्स और मैनिन्जाइटिस) से ग्रसित लोगों में सेप्सिस का जोखिम बढ़ जाता है. अगर अस्पताल में भर्ती हैं तो कैथेटर, सर्जिकल चीरे, छालों और बैक्टीरिया की वजह से भी सेप्सिस हो सकता है.

सेप्सिस से बचाव कैसे करें

अगर आपको सेप्सिस संक्रमण के लक्षण महसूस होते हैं तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं. सेप्सिस के इलाज में एक-एक क्षण महत्वपूर्ण होता है. जितनी जल्दी इलाज करवाएंगे, उतना ही बेहतर परिणाम मिलेगा. सेप्सिस की रोकथाम के लिए आप निम्न सरल उपाय अपना सकते हैं –

  • टीकाकरण
  • साफ-सफाई का खास ध्यान रखें

कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग, उनकी देखभाल करने वाले, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं में इसका खतरा ज्यादा होता है.

सेप्टिक शॉक क्या होता है?

सेप्सिस अगर बेकाबू हो जाता है, जिसमें संक्रमण बहुत ज्यादा फैल जाता है, कई अंग काम करना बंद कर देते हैं और ब्लड प्रेशर गिर जाता है तो इसे सेप्टिक शॉक कहते हैं. यह स्थिति जानलेवा होती है. यही कारण है कि सेप्सिस को साइलेंट किलर भी कहा जाता है. इसके इलाज के लिए डॉक्टर रोगी को तरल पदार्थ जैसे नमक-चीनी का घोल या ओआरएस देते हैं.

डॉक्टर को कब दिखाएं

सेप्सिस ज्यादातर तो अस्पताल में भर्ती हुए मरीजों को ही होता है. आईसीयू में भर्ती मरीज में सेप्सिस होने का खतरा और भी ज्यादा होता है. यदि आपको सेप्सिस के लक्षण दिख रहे हैं या सर्जरी के बाद सेप्सिस हो गया है तो तुरंत अस्पताल में भर्ती होकर इसका इलाज करवाना चाहिए.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, सेप्सिस के लक्षण, कारण, बचाव, इलाज और दवा पढ़ें. न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.



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