लखनऊ: हत्या से पहले हिस्ट्रीशीटर दुर्गेश यादव की हुई थी जमकर पिटाई, VIDEO आया सामने | lucknow – News in Hindi

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हत्या से पहले दुर्गेश यादव की गई थी पिटाई

मृतक दुर्गेश यादव (Durgesh Yadav) गोरखपुर का हिस्ट्रीशीटर था. जिसके खिलाफ लूट ,रंगदारी, फर्जीवाड़े के 8 मुकदमे गोरखपुर में दर्ज थे. वह राजधानी में प्रॉपर्टी डीलर का चोला ओढ़कर रह रहा था.


  • News18Hindi

  • Last Updated:
    September 3, 2020, 9:56 AM IST

लखनऊ. राजधानी लखनऊ (Lucknow) के पीजीआई (PGI) थाना क्षेत्र के सेक्टर 14 स्थित बरौली क्रॉसिंग के पास बुधवार को दिन दहाड़े गोरखपुर के हिस्ट्रीशीटर दुर्गेश यादव (Durgesh Yadav) की हत्या कर दी गई थी. अब इस मामले में एक वीडियो सामने आया है. वीडियो में गिरफ्तार आरोपी मनीष यादव और पलक ठाकुर अपने साथियों के साथ दुर्गेश यादव की पिटाई करते हुए नजर आ रही हैं. वीडियो में पिटाई के दौरान पैसों के लेनदेन को लेकर भी बात हो रही है. इस वीडियो को आरोपियों ने ही बनाया था.

दोनों आरोपी गिरफ्तार

बता दें मृतक गोरखपुर का हिस्ट्रीशीटर था. जिसके खिलाफ लूट ,रंगदारी, फर्जीवाड़े के 8 मुकदमे गोरखपुर में दर्ज थे. वह राजधानी में प्रॉपर्टी डीलर का चोला ओढ़कर रह रहा था. इतना ही नहीं दुर्गेश की हत्या का आरोपी मनीष यादव और पलक ठाकुर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. उनके पास से हत्या में इस्तेमाल हुई पिस्टल भी बरामद कर ली गई है. मृतक दुर्गेश और आरोपी नौकरी लगवाने के नाम पर ठगने के रैकेट से जुड़े थे.

बुधवार को पीजीआई इलाके में दुर्गेश यादव की हत्या की जांच करने जब पुलिस पहुंची तो उनकी आंखें खुली रह गई. जिस मकान में दुर्गेश रहता था वो सचिवालय के एक समीक्षा अधिकारी का था. कमरे में हर जगह खून बिखरा था. इससे साफ हो रहा था कि दुर्गेश और आरोपियों में मारपीट हुई थी. कमरे की तलाशी ली गई तो भारी मात्रा में फर्जी मार्कशीट और नौकरियों से जुड़े हुए दस्तावेज मिले. सचिवालय से जुड़े हुए भी कई कागजात और मुहर पुलिस को मौके से मिली.

एक प्रेस का आई कार्ड मिला जो दुर्गेश यादव के नाम पर था
पुलिस ने जब गहनता से छानबीन की तो पता चला कि मारा गया दुर्गेश यादव गोरखपुर के उरुवा बाजार थाने का हिस्ट्रीशीटर था, जिसके खिलाफ लूट, रंगदारी, फर्जीवाड़े के 8 मुकदमे गोरखपुर में दर्ज थे. सूत्रों के मुताबिक दुर्गेश के खिलाफ राजधानी लखनऊ में भी एफआईआर दर्ज हैं. पुलिस सूत्रों के मुताबिक ये पूरा मामला फर्जी मार्कशीटों के जरिए सरकारी नौकरी के नाम पर ठगने वाले गिरोह से जुड़ा हो सकता है.



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