History sheater Durgesh Yadav/Lucknow Murder case Latest News Updates: Police Arrested 4 Accused In Lucknow Uttar Pradesh | सचिवालय में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करता था दुर्गेश, हत्यारोपी महिला से भी ऐंठे से 27 लाख, 4 गिरफ्तार

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लखनऊ31 मिनट पहले

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लखनऊ पुलिस के हत्थे चढ़े हिस्ट्रीशीटर दुर्गेश के साथी।

  • पीजीआई थाना क्षेत्र में बुधवार को दुर्गेश की हुई थी हत्या
  • पुलिस ने दुर्गेश के चार साथियों को गिरफ्तार कर मामले का किया खुलासा

राजधानी लखनऊ के पीजीआई थाना क्षेत्र स्थित वृंदावन कॉलोनी के सेक्टर 14 में बुधवार सुबह गोरखपुर के हिस्ट्रीशीटर दुर्गेश की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले की परतें अब खुलने लगी हैं। लखनऊ पूर्वी उपायुक्त चारू निगम ने गुरुवार को मृतक दुर्गेश बेरोजगारों से ठगी करता था। हत्यारोपी महिला पलक ठाकुर ने अपनी नौकरी लगवाने के लिए दुर्गेश को 27 लाख रूपए दिए थे। पुलिस ने इस मामले में दुर्गेश के 4 साथियों को भी गिरफ्तार किया है।

लखनऊ पूर्वी उपायुक्त चारू निगम ने प्रकरण का किया खुलासा।

लखनऊ पूर्वी उपायुक्त चारू निगम ने प्रकरण का किया खुलासा।

जालसाजी का गैंग चलाता था दुर्गेश

चारु निगम के मुताबिक हत्या की सूचना के बाद जब पुलिस मौके पर पहुंची तो छानबीन में कई युवाओं की मार्कशीट, नियुक्ति पत्र और विभिन्न विभागों की मुहर आदि बरामद हुई। जिससे शक गहराया। हत्या के समय दुर्गेश के अन्य तीन साथी जो उसी घर में रहते थे, वह सब फरार हो गए थे। मौके पर मानवेन्द्र यादव मिले जोकि हत्या के मामले में वादी भी हैं। हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस ने गुरुवार को ही कर ली थी। जबकि दुर्गेश के जालसाजी में साथ देने वाले अन्य साथियों की गिरफ्तारी आज हुई है। जिनमें मानवेन्द्र यादव, सोवेंद्र यादव, संजीत कुमार, अभय कुमार शामिल हैं। यह सब मौके से फरार थे।

हत्यारोपितों ने दुर्गेश को 1 करोड़ रुपए दिए थे

पुलिस के मुताबिक हत्यारोपी पलक ठाकुर ने अपनी नौकरी लगाने के लिए दुर्गेश को 27 लाख रुपए दिए थे। यही नहीं अपने कई जानने वाले जो नौकरी चाहते थे उनसे भी रूपए दिलाए थे। दुर्गेश का सचिवालय आना जाना था। लोगों को वह बताता था कि वह सचिवालय में नौकरी करता है। सचिवालय के नाम पर लोग भ्रमित होते थे और उसे पैसे देते थे। इस तरह से पलक के द्वारा दुर्गेश को लगभग 1 करोड़ रूपए दिए जा चुके थे। जब काफी दिन तक रेस्पॉन्स नहीं मिला तो पलक और उसका भाई संतोष दुर्गेश के पास पहुंचे, वहीं उन्होंने मनीष को भी बुलाया। जहां पलक ने मनीष के साथ मिलकर दुर्गेश को मारा पीटा। पलक ने पुलिस को बताया कि हम वीडियो इसलिए बना रहे थे ताकि वह कबूल कर ले कि पैसे उसके पास है और उसे वह जल्द लौटा देगा। या नौकरी दिला देगा ताकि जिनका पैसा है वह पलक पर दबाव न बनाए।

दुर्गेश के असलहे से ही उसकी मौत हुई

पुलिस के मुताबिक हाथापाई के बीच दुर्गेश ने अपनी हैंडमेड पिस्टल निकाल कर पलक पर तान दी। जिसके बाद बीच बचाव में गोली चली और दुर्गेश को लग गयी। जिससे दुर्गेश की मौत हो गयी। हत्या देख पलक और उसके साथी भी भागे, वहीं दुर्गेश के साथी भी भाग गए। मानवेन्द्र बाद में मौके पर पहुंचा।

मनीष के पिता रिटायर्ड पुलिस सब इंस्पेक्टर, इसलिए रौब झाड़ता था

चारु निगम के मुताबिक हत्यारोपित मनीष के पिता कानपुर के रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर रहे हैं। पुलिसिया माहौल में पला बढ़ा मनीष इसका गलत फायदा उठाने लगे। उसने नकली आईकार्ड भी बना लिया और लोगों पर दरोगा के नाम से रौब झाड़ता रहता था।

मकान मालिक की भी होगी जांच

दुर्गेश का मकान मालिक सचिवालय के सेक्शन अफसर के पद पर तैनात है। जबकि दुर्गेश उसी के घर में बिना रेंट एग्रीमेंट रहकर सचिवालय के नाम पर ही फर्जीवाड़ा भी कर रहा था। ऐसे में पुलिस अब मकान मालिक की भी जांच करेगी कि कहीं उसकी संलिप्तता तो इस पूरे प्रकरण में नहीं है।

हिस्ट्रीशीटर दुर्गेश के बारे में अभी छानबीन चलेगी

चारु निगम ने बताया कि मृतक दुर्गेश उरुवा थाना का हिस्ट्रीशीटर है। जालसाजी का प्रकरण उसके संबंध में पहली बार सामने आया है। इससे पहले उस लूट पाट जैसे ही आरोप है। अभी हम दुर्गेश के बारे में और छानबीन करेंगे कि कहीं और किसी ने तो उसके खिलाफ मुकदमा तो नही लिखवाया है। साथ ही किन किन विभागों से यह फर्जीवाड़ा चल रहा था यह भी पता लगाया जाएगा।

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