Ayodhya : मस्जिद और म्यूज़ियम में दिखेगी अवध की गंगा जमुनी तहज़ीब, पुष्पेश पंत बने कंसलटेंट क्यूरेटर | lucknow – News in Hindi

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पद्मश्री पुष्पेश पंत को म्यूजियम का सर्वेसर्वा बनाया गया है.

अतहर हुसैन ने बताया कि पांच एकड़ जमीन पर मस्जिद, अस्पताल, कम्यूनिटी किचन, इंडो इस्लामिक रिसर्च सेंटर के साथ जो म्यूजियम बनाया जाएगा, वह लोगों को इंडो इस्लामिक संस्कृति से रूबरू कराएगा.


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  • Last Updated:
    September 5, 2020, 12:00 AM IST

लखनऊ. अयोध्या (Ayodhya) के धन्नीपुर में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के आदेश पर मिली पांच एकड़ जमीन पर सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड (Sunni Central Waqf Board) मस्जिद, हॉस्पिटल, इंडो इस्लामिक कल्चर फाउंडेशन, एक म्यूज़ियम, और एक कम्युनिटी किचन बनाएगा. इसके लिए एक ट्रस्ट का भी एलान किया जा चुका है. मस्जिद (Mosque) के साथ ही तमाम चीजों के निर्माण के लिए लोगों से आर्थिक सहयोग भी लिया जाएगा. इसके लिए बाकायदा ट्रस्ट के अकाउंट को सार्वजनिक किया गया है.

पुष्पेश पंत म्यूजियम के सर्वेसर्वा

ट्रस्ट के सचिव अतहर हुसैन ने बताया कि पांच एकड़ जमीन पर मस्जिद, अस्पताल, कम्यूनिटी किचन, इंडो इस्लामिक रिसर्च सेंटर के साथ जो म्यूजियम बनाया जाएगा, वह लोगों को इंडो इस्लामिक संस्कृति से रूबरू कराएगा. अतहर हुसैन ने बताया कि इतिहासकार पद्मश्री पुष्पेश पंत को म्यूजियम का सर्वेसर्वा बनाया गया है. उन्होंने बताया कि पुष्पेश पंत जवाहरलाल विश्विद्यालय दिल्ली से सेवानिवृत्त प्रोफेसर होने के साथ ही बड़े इतिहासकार भी हैं. यह संग्रहालय और अभिलेखागार मस्जिद परिसर में बनने वाले इंडो-इस्लामिक रिसर्च सेंटर का ही हिस्सा होगा. इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन के प्रवक्ता अतहर हुसैन ने पुष्पेश पंत के बारे में बताया कि 1947 में जन्मे पंत जेएनयू से प्रोफेसर पद से रिटायर हुए हैं. ट्रस्ट की ओर से प्रो. पंत को कंसलटेंट क्यूरेटर मनोनीत किया गया है.

कौन हैं पुष्पेश पंतपद्मश्री पुष्पेश पंत अंतरराष्ट्रीय संबंधों के साथ भारतीय व्यंजन कला के भी जानकार हैं. साल 2011 में प्रकाशित उनकी पुस्तक ‘इंडिया : दि कुकबुक’ को न्यूयार्क टाइम्स सर्वश्रेष्ठ पुस्तक घोषित कर चुका है. प्रो. पंत ने बताया कि अयोध्या के रौनाही में मस्जिद के अलावा अस्पताल, संग्रहालय, अभिलेखागार होंगे. पुष्पेश पंत ने कहा कि उनकी सोच है कि इस परिसर में बनने वाली मस्जिद, अस्पताल के अलावा सभी निर्माण में अवध की मिली-जुली गंगा जमुनी संस्कृति की झलक मिले. इसलिए वहां उर्दू जुबान की कैलीग्राफी के उत्कृष्ट नमूने, भारतीय-इस्लामी स्थापत्य कला के बेहतरीन निर्माण रूमी दरवाजा, इमामबाड़ा, मकबरे, मंदिर आदि के मॉडल भी देखने को मिलेंगे. आपको बता दें कि प्रो. पंत का लखनऊ से पुराना नाता रहा है. साल 1927-28 में उनके पिता ने यहां मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई की.



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