गुरुतेग बहादुर नगर स्थित पंजाबी कॉलोनी: बदहाल पंजाबी कॉलोनी, BMC काट रही है बिजली-पानी – bad punjabi colony, bmc is cutting electricity-water

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मुंबई
सायन-कोलीवाडा गुरुतेग बहादुर नगर स्थित पंजाबी कॉलोनी बदहाल है। बीएमसी पिछले 15 साल से लोगों को यहां से हटाने की कोशिश कर रही थी। अब वह बिजली-पानी का कनेक्शन काट रही है, ताकि लोगों को यहां से हटाया जा सके। यहां पर रहने वाले लोगों का कहना है कि वे खुद यहां से हटना चाहते थे, लेकिन पहले उन्हें पर्याय जगह तो मिले, जहां वे अपने परिवार के साथ रह सकें।

पंजाबी कॉलोनी को सन 1950 के आसपास भारत सरकार ने करीब 12 एकड़ भूखंड पर बसाया था। कुल 25 बिल्डिंगें बनाई गई थीं और करीब 1200 किराएदार थे। धीरे-धीरे बिल्डिंगें जर्जर होती गईं, लेकिन डिवेलपमेंट नहीं हुआ। इसका कारण बताया जाता है कि इस जमीन का मालिकाना हक राष्ट्रपति के नाम पर था। पिछली फडणवीस सरकार में राजस्व मंत्री रहते हुए एकनाथ खडसे ने यहां के लोगों को मालिकाना हक दिलाने व इस क्षेत्र के विकास के लिए एक समिति गठित की थी। अब जाकर इन्हें मालिकाना हक मिलने लगा है। मुंबई शहर जिले के कलेक्टर राजीव निवतकर कहते हैं कि पंजाबी कॉलोनी की 25 बिल्डिंगों में से 17 बिल्डिंगों का मालिकाना हक सोसायटियों को दे दिया है। छह बिल्डिंगों की सोसायटियों को मालिकाना हक देने का काम चल रहा है और दो बिल्डिंगों के कागजात की जांच-पड़ताल चल रही है। वे कहते हैं कि पंजाबी कॉलोनी का अब कलेक्टर से कोई लेना-देना नहीं है। विकास के लिए जिसे चाहें, नियुक्त करें।

सभी इमारतें कराएंगे खाली
सहायक बीएमसी आयुक्त गजानन विनायक बेल्लारे कहते हैं कि धीरे-धीरे यहां की सभी 25 इमारतों को खाली कराएंगे, क्योंकि ये सब इमारतें खतरनाक हो चुकी हैं। इन इमारतों के स्लैब, सुरक्षा दीवार आदि आए दिन गिर रहे हैं। यहां से लोगों को हटाना अब जरूरी हो गया है। बिल्डिंग नंबर 20 से 25 तक के बिजली-पानी के कनेक्शन काट दिए गए हैं। बिल्डिंग नंबर 18 का मामला कोर्ट में है और एक बिल्डिंग में कोरोना के मरीज हैं, जिस वजह से खाली नहीं कर रहे हैं। हमारी कोशिश होगी कि जल्द से जल्द खतरनाक इमारतों से लोगों को बाहर निकाला जाए।

विकास करने के जर्मनी और हॉन्गकॉन्ग के विकास आए
पंजाबी कॉलोनी को नया रूप देने के लिए देश-विदेश के डिवेलपरों ने दिलचस्पी दिखाई है। हॉन्गकॉन्ग और जर्मनी के डिवेलपर भी इस क्षेत्र को नया रूप देने के लिए आए। लोग कहते हैं कि पिछले 15-20 साल से कई धुरंधर बिल्डर आए। यहां की इमारतों में रहने वालों को कुछ बिल्डरों ने टीवी दिया तो किसी ने पैसे दिए, लेकिन मामला जस का तस बना रहा। अब इमारतें खाली कराने की खबर और मालिकाना हक मिलने से कई सारे बिल्डर फिर मैदान में कूद पड़े हैं।

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