भोजपुरी में पढ़िए – अस्लील दुअर्थी के साथ उन्मादी गीत-कविता से भी निबटे के पड़ी | gorakhpur – News in Hindi

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क तो नीम, उस पर करैला. हिंदी के ई खूब लोकप्रिय मुहाबरा ह. एह मुहाबरा के प्रयोग के बारे में सभे जानेला कि कवना संदर्भ में होला. भोजपुरी गीतन के दुनिया आजकल एही दौर से गुजर रहल बा. पिछिलका तीन—चार दसक से भोजपुरी गीत—संगीत अस्लील,द्विअर्थी आ स्त्रीविरोधी गीतन के दलदल में फंसल रहे. ओकरा से लड़त—लड़त जब ओकरा से पार पावे के कोसिस भइल, ओकरा के लेके बिरोध के माहौल बनल त अब उन्मादी गीतन के नवका दौर करइला के रूप में आपन रंग देखा रहल बा.

एने कुछ सालन से भोजपुरी गायकी में एगो नया चलन आ सिलसिला सुरु भइल बा. धरम—संप्रदाय के आधार बना के उन्मादी गीत गावे के. ई सिलसिला तेजी से आगे बढ़ भी रहल बा. अईसन होखे के पाछे एगो कारन ई भी मानल जा रहल बा कि चूंकि ओने अस्लील,द्विअर्थी भा स्त्रीविरोधी गीत गावेवाला कलाकार लोग के धीरे—धीरे बिरोध सुरू होखल त उ लोग के जगह—जगह बिरोध झेले पड़ल. ओह धारा के बड़—बड़ भा आइकॉन लेखा स्थापित कलाकारन के दुर्गति सुरू भइल. कहीं स्टेज से उतारल गइल, कहीं स्टेजे पर मारपीट भइल, कहीं कार्यक्रम के बिरोध होखल. तरह—तरह के घटना घटे सुरू भइल.

एकर असर ई भइल कि ओह धारा, मने अस्लील,द्विअर्थी,स्त्रीबिरोधी गीत गावेवलन के स्टेज सो मिलल कम हो गईल. हालांकि लोग ओह से बाज नईखे आईल. स्टुडियो में रिकार्ड कई के अबहियो रोज औसतन दु—चार गो ओईसनका गीत यूट्यूब भा सोसल मीडिया पर साझा कईये रहल बा. बाकि खाली यूट्यूब भा सोसल मीडिया से कलाकारी त चली ना. त ओह धारा से दुरदुरावल चाहे ओह धारा में आपन संभावना खतम होखत देखी के ओही जमात के एगो खेमा उन्मादी गीत गावे सुरू कईलस. फेरू देखा—देखी,तेजी ई चलन में आईल, सिलसिला बनल आ अब परवान चढ़ रहल बा.

ई त एगो कारन प बात भइल, एह नवका दौर के सुरू होखे के. आउर भी अनेक कारन बा. बाकि ओह कारन से पड़ताल करे, ओह गायकन,गीतकारन के कोसे—गरियावे से जादा जरूरी बा, ओईसनका गीतन के पसंद करेवाला भा उन्मादी गीतन प गर्व करेवाला,आनंदित होखेवाला श्रोता लोगन के कुछ जरूरी बात जानल. रउआ अगर धार्मिक उन्माद के चासनी में लटपटाईल गीतन प लहालोट हो रहल बानी त संछेप में बस एतने बुझीं कि रउआ आपन भोजपुरी गीत—संगीत—संस्कृति, परंपरा भा समृद्ध विरासत के नेंव के ही नीचे से कोड़ के कमजोर क रहल बानी. भोजपुरी गीत—संगीत के परंपरा साझा संस्कृति के परंपरा रहल बा.एकर लमहर  आ सुनहरा इतिहास बा.भोजपुरी के आदि कवि, साझी संस्कृति के प्रतीक संत कबीर के कहल जाला, मानल जाला. कबीर त एगो नांव भइले.कबीर के पहिले चल के लोकपरंपरा में गीत—गायन के दुनिया में गइला प साझी संस्कृति के रंग आउरी चटक दिखेला. भोजपुरी गीत गायन में एगो लोकप्रिय विधा रहल बा शीतला माई के गीत गायन के. शीतला के गीत हिंदू आ मुसलमान, दुनो संप्रदाय में समान रूप से रहल बा. एही तरी कजरी त दुनिया भर में लोकप्रिय हो चुकल बिधा बा. कजरी के एगो नांव कज्जली भी ह. कज्जली विंध्याचल देबी माई के नांव ह. कहल जाला कि जे भी कजरी गायेवाला नया कलाकार होखत रहे, उ आपन पहिलका रचना भा पहिलका हाली के गायन कज्जली देबी के मंदिर में जाकर सुना के समर्पित करत रहे, तब उ कजरी गायन में आवत रहे.

इतिहास भरल पड़ल बा कि कजरी गायन में हिंदू आ मुसलमान, दुनो संप्रदाय के लोग समान रूप से सक्रिय रहल. ई कुल त पारंपरिक गीतन के बात भइल. पारंपरिकता के छोड़ के आधुनिक काल में भी देखल जाव त एक से एक नांव भइल, जे भोजपुरी गायन में साझी संस्कृति के परंपरा के मजबूत कईलस आ लोग ओकरा के खूब प्यार—दुलार देलस. भोजपुरी में एगो गीतकार,कलाकार भइले रसूल मियां. बिहार के गोपालगंज के रहेवाला. रसूल मियां आजादी के लड़ाई के गीत खातिर त जानले गइले बाकि समान रूप से अपना समय में उहां के लोकप्रिय राम आ कृष्ण के गीत रचे, गावे खातिर रहे. बिहार के सारन जिला के ही मास्टर अजीज भइनी. भोजपुरी के रचनाकार.

उहां के राम आ कृष्ण के कथागीत कहत—गावत रहनी. अपना समय में उहां के कथागीत के लोकप्रिय दूर—दूर ले रहे. ओकरा बाद के बात कईल जाव त एगो बड़ा लोकप्रिय नांव आवेला मोहम्मद खलील के. मोहम्मद खलील मने आधुनिक भोजपुरी लोकगीत गायन के अपना समय के स्टार कलाकार. भोजपुरी के पहिलका व्यवस्थित बैंड लेखा बना के गावेवाला कलाकार. महेंदर मिसिर, भोलानाथ गहमरी जइसन रचनाकारन के गीतन के लोकप्रिय बनावेवाला कलाकार. उ मोहम्मद खलील के जब गायकी सुरू होखत रहे त पहिलका गीत देवी के अराधना गीत रहत रहे, बिनईला सारदा भवानी, पत राखीं महारानी.

अईसन अनेक नांव रहल बा भोजपुरी गीत गायन में. ई त कुछ नांव के चरचा भइल ह.एह कुल नांव के चरचा के पाछे मकसद रहल ह कि गायक आ गीतकार लो त अपना प्रसिद्धि खातिर उन्मादी गीत लिखे भा गावे सुरू कईले बा, गावत रही. ओह लोग प नियंत्रण अतना आसान नइखे. अस्लील,द्विअर्थी भा स्त्रीबिरोधी गीतन गवला प जवन तरीका से बिरोध भइल, हो रहल बा, ओह तरीका के अपना के उन्मादी गीतन के रोकल भी नइखे जा सकत. एकरा के रोके के एके तरीका बा. श्रोता आ दर्सक बहिस्कार करे सुरू करे. अईसन गीतन के सुनल बंद करे. एह खातिर ना कि कवनो कलाकार के भा गीतकार के बिरोध करे के बा. भोजपुरी के खूबसूरती आ पहचान बचावे खातिर. भोजपुरी के मजबूत पहचान ओकर साझी संस्कृति के बिरासत आ परंपरा ह.

( ये लेखक का अपना विचार है. )



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