जिउतिया व्रत 2020: संतान की कामना के लिए 10 सितंबर को महिलाएं रखेंगी निर्जला व्रत, जानिए इस व्रत की महिमा

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संतान प्राप्ति व संतान की लंबी उम्र की कामना हर मां करती है। संतान की लंबी आयु के लिए महिलाएं आने वाले 10 सितंबर को जिउतिया व्रत रखेंगी। बता दें कि नियम के अनुसार इस व्रत के एक दिन पहले महिलाएं निर्जला रहेंगी और अगले दिन व्रत खोला जाएगा। ध्यान रहे कि इस बार ये व्रत 9 सितंबर को रात 9.55 बजे से शुरू हो रहा है और 10 सितंबर तक चलेगा। एक दिन पहले नहाय खाय के साथ यह व्रत शुरू होता है। बता दें कि 11 सितंबर को जिउतिया व्रत का पारण सूर्य के उदय होने पर कर दिया जाएगा। इसलिए कुल मिलाकर यह व्रत 32 घंटे का होगा।

जिउतिया व्रत की पौराणिक कथाः
गन्धर्वराज जीमूतवाहन बड़े धर्मात्मा और त्यागी पुरुष थे। युवाकाल में ही राजपाट छोड़कर वन में पिता की सेवा करने चले गए थे। एक दिन भ्रमण करते हुए उन्हें नागमाता मिली, जब जीमूतवाहन ने उनके विलाप करने का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि नागवंश गरुड़ से काफी परेशान है, वंश की रक्षा करने के लिए वंश ने गरुड़ से समझौता किया है कि वे प्रतिदिन उसे एक नाग खाने के लिए देंगे और इसके बदले वो हमारा सामूहिक शिकार नहीं करेगा। इस प्रक्रिया में आज उसके पुत्र को गरुड़ के सामने जाना है। नागमाता की पूरी बात सुनकर जीमूतवाहन ने उन्हें वचन दिया कि वे उनके पुत्र को कुछ नहीं होने देंगे और उसकी जगह कपड़े में लिपटकर खुद गरुड़ के सामने उस शिला पर लेट जाएंगे, जहां से गरुड़ अपना आहार उठाता है और उन्होंने ऐसा ही किया। गरुड़ ने जीमूतवाहन को अपने पंजों में दबाकर पहाड़ की तरफ उड़ चला। जब गरुड़ ने देखा कि हमेशा की तरह नाग चिल्लाने और रोने की जगह शांत है, तो उसने कपड़ा हटाकर जीमूतवाहन को पाया। जीमूतवाहन ने सारी कहानी गरुड़ को बता दी, जिसके बाद उसने जीमूतवाहन को छोड़ दिया और नागों को ना खाने का भी वचन दिया।

 

 

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