भोजपुरी में पढ़िए : खांटी माटी के तीन परधानमंतरी अइसन जिनकर भौकाल से पस्त हो गइल पाकिस्तान | patna – News in Hindi

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यूपीएसी क्रेक कइला के बाद प्रोबेशन में पहिला पोस्टिंग बनारस भइल. रहे खातिर त सरकारी कोआटर मिल गइल रहे, लेकिन उहां मन तनिको ना लागे. माई के रोज फोन प फोन आवे कि बबुआ दिकत हो ता त मामा किहां मड़ुआडीह चल जा. मन सोच विचार में परलs रहे कि एक दिन मामा खुदही आ गइले डेरा प. परनाम पाती भइल त मामा तनी ठिठोली कइले. कहले, का हो दया बड़का हाकिम बन गइल बाड़s, इहां दस दिन से परल बाड़s आ एगो फोनो ना कइलs हs ! फेरू हंस के कहले, उठवs अटैची अ चल ममहर के मड़ई में. हमरो हंसी छूट गइल. मामा कार रोकले त आलिशान मकान के गेट पर चमचमात लिखलs लऊकल- विभूति शंकर पांडेय, प्रोफेसर, अंग्रेजी विभाग, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय. हमरो ठिठोली के मन भइल. कहनी, का ममा अगर ईहे मड़ई हs तs बाबा बिसनाथ सबके देस अइसने मड़ई.

भोजपुरिया माटी के प्रधानमंतरी
मामी के गोड़ लागs के नहाये चल गइनी. मामा कहले, जल्दी तैयार हो जा, आज साथे बईठ के मोदी जी के मन की बात सुने के. तब हमरो इयाद आइल कि अरे आज तs एतवार हs. मामा के साथ बैठकी जमलs. मन की बात खत्म भइल तो मामा कहले, मोदी जी भले गुजराती हवें लेकिन ऊ परधानमंत्री बनले भोजपुरिया इलाका में आ के. मोदी जी कहबो करेले कि हम बनारस के कर्जा कबो ना सधा पाइब. भोजपुरी के नाम सुनते तनी हमरो जोश आ गइल. कहनी, ममा भोजपुरिया पानी के रवानी बहुते तेज हs. ई माटी से दू लाल त अइसन पैदा भइले जे भारत के परधानमंतरी बनले.

अब त मोदियो जी में भोजपुरिये माटी के महक बा. ई तीनों जना में एगो खास बात ई बा कि इनका भौकाल से पाकिस्तान तीन बेर पस्त भइल. मोगलसराय के शास्त्री जी 1965 में पाकिस्तान के हरवले. बलिया के चंद्रशेखर जी 1991 में पाकिस्तान के परधानमंतरी नवाज शरीफ के एकबग्गे फोन प हड़कवले त आतंकियन के झुरझुरी छूट गइल. बनारस के मोदी जी बालाकोट से पाकिस्तान में अइसन बबाल मचवले कि दुनिया देखलस कि भारत कवन चीज हs. अइसे भोजपुरिया समाज के लालूओ जी एक बेर संसद में कहले रहन कि हां ! हमहूं बनल चाहs तानी प्रधानमंतरी . लालूजी जी देवगौड़ा जी अउर गुजराल जी के त परधानमंतरी बनवले लेकिन अपने ना बन पइले.भोजपुरी स्पेशल- गायक बन गइले नायक, भोजपुरी सिनेमा अपना समाजे से कटि गइल

भारत के लाल रहन लालबहादुर
मामा भोजपुरिया माटी के बखान करे लगले. लाल बहादुर शास्त्री जी के जनम मोगलसराय में भइल रहे. उनकर बाबूजी ओहिजा सरकारी ईस्कूल में मास्टर रहीं. उनकर आगा के पढ़ाई बनारस के हरिसचंदर हाई ईस्कूल अ काशी विद्यापीठ में भइल रहे. उनकर नाम पहिले लालबहादुर वर्मा रहे. लेकिन संस्कृत से बीए कइला प उनका शास्त्री के उपाधि मिलल. एकरा बाद ऊ लाल बहादुर शास्त्री लिखे लगले. मई 1964 में जब जवाहर लाल नेहरू गुजर गइले त शास्त्री जी परधानमंतरी भइले. उनका कुर्सी प बइठला के एक्के साल बाद सुखाड़ से देश में भुखमरी हो गइल. अनाज के दाना मोहाल हो गइल. तब शास्त्री सोचले कि अनाज बचावे के खातिर एक सांझ के भोजन छोड़ दिहल जाए. लेकिन दोसरा के सिखावे से पहिले ऊ आपन घर में ई बात के साधलs चाहत रहन. एक दिन ऊ घर में फरमान सुना देहले कि आज सांझ के भोजन ना बनी. उनकर तीनों लइका ओह रात उपासे रह गइल लोग.

जय जवान-जय किसान
अगिला दिन शास्त्री जी देश भर के लोगन से निहोरा कइले कि रउआ सभे हफ्ता में अगर एक दिन भोजन छोड़ देब तs हजारों मन अनाज बांच जाई. तब भूख से बेयाकुल लोग के कुछुओ तs राहत मिली. शास्त्री जी के कहला के अइसन असर भइल कि गांव के गांव लोग हफ्ता में एक दिन भोजन छोड़ दिहले. एतने ना शास्त्री जी परधानमंतरी आवास के परती जमीन के अपनही हर बैल लेके जोते लगले. एकर फोटो सब अखबार में छपल. ऊ देश भर के लोगन से कहल चाहतs रहन कि एको ईंच जमीन बेकार न रहे के चाहीं. कुछओ न त सागे सबजी उपजावे के चाहीं. ओही साल भारत के पकिस्तान से लड़ाईओ लाग गइल. शास्त्री जी मीठ बोले वाल रहन लेकिन करेजा से बहुत बरियार रहन. पांच महीना लड़ाई चललs. भारत पाकिस्तान के हरा देहलस. ओही घरी शास्त्री जी नारा दिहले, जय जवान- जय किसान.

जब नवाज शरीफ के हड़कवले चंद्रशेखर जी
बतकही अभी चलते रहे कि मामी आ गइली. कहली, मामा-भगीना कौना गप में मगन बाड़s? तब मामा, मामी के ताना मरले, अरे दयाशंकर आइएएस हो गइले, कुछुओ खियावs पियावs. मामी तनी हड़बड़यली फेर कहली, हां दया खातिर बनारस के केसरिया लस्सी बनावs तानी. थोड़का देर बाद मामी लस्सी दे गइली. भोजपुरिया प्रधानमंतरी के बात दिमाग में घुमड़त रहे. लस्सी पियत पियत हमरो चंद्रशेखर जी के एगो कहानी इअयाद आ गइल. इ खिस्सा बीबीसी के सुनवले रहन उनकर परधान सचिव शशिकांत मिश्रा जी. कानपुर के रहे वला मिसिर जी 1956 बैच के आइएएस रहीं. चंद्रशेखर जी जब 1990 में परधानमंतरी बनले त मिसिर जी के परधान सचिव बनवले. मिसिर बहुत काबिल अफसर रहीं.

भोजपुरी विशेष – लालूजी लचार काहे भइले,कइसे मिली राजद के गद्दी ?

चंद्रशेखर जी के पहिले से राजकाज के कवनो तजुरबा ना रहे. ऊ कबो मंतरियो न बनल रहन. मिसिर जी प उनका बहुते भरोसा रहे. एक दिन कश्मीर के गुलमर्ग में आतंकियन के दस्ता स्वीडेन के इंजीनियरन के उठा लेलस. स्वीडेन के राजदूत तुरंते मिसिर जी मिलले. अपना देश के इंजीनियरन के जान बचावे के गोहार लगावले. मिसिर जी सब बात परधानमंतरी चंद्रशेखर जी के बतवले. चंद्रशेखर जी भोजपुरिया मरद रहीं अउर ठोक ठेठा के बात करत रहीं. ओही घरी हौटलाइन पर पाकिस्तान के परधानमंतरी नवाज शरीफ के फोन लगावल गइल. जब लाइन पर नवाज शरीफ अइले त चंद्रशेखरर जी कहनी, का भाईजान का बदमाशी कर रहल बानी ? नवाजशरीफ इ बोली सुन के एकदम्मे हड़बड़ा गइले.

कहले, हमरा से कवन गलती भ गइल ? तब चंद्रशेखर जी बेलाग कहले, रउवा लोग कश्मीर से स्वीडेन के इंजीनियरन के किडनैप कइले बानी. नवाज शरीफ सकपका गइले. फेर कहले कि इ काम आतंकियन के होई, एकरा से हमार का मतलब. चंद्रशेखर जी फेन रपेटले, भाईजान कुछुओ कहीं, असलियत सभे जानतs, इंसानियत भी कौनो चीज होखे ला. कुछुए दिन के बाद स्वीडेन के इंजीनियर सही सलामत अपना घरे चल गइले.

लालूजी कहले रहनs, हमहूं बनल चाहs तानी परधानमंतरी
1996 के लोकसभा चुनाव में लालू जी अपना दम पर बिहार से जनता दल के 22 सांसद जीतवले रहन. केहू के बहुमत ना मिलल. खिचड़ी सरकार बने के खेला शुरू भइल. ओह घरी लालूजी चारा घोटला के केस में फंसल रहन लेकिन उनकर हैसियत अइसन रहे कि केहू के राजा बना देस. देवगौड़ा जी उनके बल प परधानमंतरी बनले. चारा घोटला केस के मोत्तलिक खटपट भइल त लालू जी देवगौड़ा जी कुर्सी से हटवा देहले. फेन अपना पसंद के गुजराल जी के कुर्सी प बैइठले. गुजराल जी जब पीएम बनले त ओह घरी ऊ बिहारे से राज्यसभा के सदस्य रहन. लालूए जी उनके के सांसद बनवले रहन. गुजराल जी के घर के पाता पटना के सब्जीबाग मोहल्ला रहे.

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बाद में, लालूओ जी परधानमंतरी बनल चाहतs रहन. जुलाई 2008 में ऊ संसद में कहले रहन, हं, हमरो मन में इच्छा बा परधानमंतरी बने के. फेन भाजपा के लोगन देने देख के कहले, काहे न अइसन इच्छा रहे के चाहीं हमरा मन में ? लेकिन अबहीं कवनो हड़बड़ी नइखे. बिना मेल के बियाह कनपटी भर सेनुर नइखीं रगरल चाहतs. एह से केहू का परधानमंतरी बनी ? लेकिन लालू जी के इ हसरत पूरी न भइल.

(ये लेखक के निजी विचार हैं)



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