वाराणसी: आजाद भारत के छठे डोम राजा होंगे 15 साल के हरिओम चौधरी | varanasi – News in Hindi

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15 साल के हरिओम नारायण चौधरी होंगे नए डोम राजा

आजाद भारत के छठे डोम राजा (Dom King) के रूप में 15 साल के हरिओम नारायण चौधरी (Hariom Narayan Chaudhary) की ताजपोशी होने जा रही है. पिछले दिनों डोम राजा परिवार के पांचवें राजा जगदीश चौधरी का निधन हो गया था जिसके बाद से यह गद्दी खली है.

वाराणसी. फिरंगियों से आजादी मिलने के 19 साल बाद 1966 में अचानक रातों रात देश की अलग-अलग रियासतों के राजा, कुंवर, नरेश की गद्दी और तमगा छिन गया. सभी के नाम के आगे पूर्व लग गया. बावजूद इसके, देश में एकलौती गद्दी और राजा का एकलौता तमगा काशी (Kashi) के डोम राजा (Dom King) के पास सुरक्षित रहा. तब से अब तक काशी के महाश्मसान के मालिक और कालू डोम के वंशज डोम राजा, राजा बने रहे. पिछले दिनों डोम राजा परिवार के पांचवें राजा जगदीश चौधरी का निधन हो गया. जिसके बाद ये गद्दी सूनी हो गई. लेकिन अब एक बार फिर काशी को नया डोम राजा मिलने जा रहा है. आजाद भारत के छठे डोम राजा के रूप में 15 साल के हरिओम चौधरी की ताजपोशी होने जा रही है.

बता दें कि परिवार नियोजन की जागरुकता की कमी की वजह से काशी में रहने वाले करीब पांच हजार डोम परिवारों की आबादी बढ़ी तो कर के रूप में मिलने वाली आय के हिस्सेदार भी बढ़े. लाजमी है आय कम होने की कसक भी है. बावजूद इसके, डोम राजा और उनके परिवार के लोगों की काशियाना ठसक आज भी बरकरार है.इसी काशियाना ठसक के नए सुल्तान हरिओम चौधरी होंगे. काशी में डोम परिवार की अहमियत का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि डोम राजा दिवंगत जगदीश चौधरी को पीएम नरेंद्र मोदी ने चुनाव में अपना प्रस्तावक बनाया. यही नहीं उनके निधन पर पीएम मोदी और सीएम योगी समेत विपक्ष के नेताओं ने भी शोक जाहिर किया.

डोम राजा की पौराणिक मान्यता

परम्परा से भी प्राचीन और इतिहास से भी पुरातन काशी में डोम राजा की परंपरा पौराणिक मान्यता के अनुसार अनादि काल से है. लेकिन वर्तमान में डोमराज परिवार जो शेरावाली कोठी में रहता है इनकी करीब 250 साल की परम्परा कालू डोम से मानी जाती है. स्वतंत्रता संघर्ष और आज़ादी के बाद के दौर में स्वर्गीय देवी चौधरी और स्वर्गीय लक्ष्मी नारायण चौधरी डोमराजा रहें. बाद में लक्ष्मी नारायण चौधरी राजा हुए. 25 साल पहले जब उनकी मृत्यु हुई तब उनके बेटे कैलाश चौधरी डोमराजा हुए. कैलाश चौधरी के बाद उनके पुत्र रंजीत चौधरी डोमराजा बनें. तीन साल पहले ही जगदीश चौधरी राजा बने थे.अब उनकी मौत के बाद ये गद्दी उनके बेटे हरिओम नारायण चौधरी संभालेंगे.छठी कक्षा में पढ़ते हैं हरिओम

महज 15 साल के हरिओम नारायण चौधरी पर ये जिम्मेदारी तब आयी है जब वो छठी कक्षा में पढ़ते हैं और  उनको सैकड़ों साल पुरानी इस परम्परा को लेकर बहुत अनुभव भी नहीं है. हरिओम कहते हैं कि जबतक वो बालिग नहीं हो जाते तबतक उनकी दादी सारंगी देवी गद्दी संभालेंगी और बालिग होने के बाद वो खुद गद्दी पर बैठेंगे. नए डोमराजा के पगड़ी की रस्म 6 सितम्बर को त्रिपुरा भैरवी घाट के किनारे शेरावाली कोठी में होगी. उस दिन मरहूम जगदीश चौधरी का त्रयोदशाह की रस्म होनी है. पूरा परिवार और डोम समाज उस दिन इस ऐतिहासिक पल पर मौजूद रहकर अपना नया राजा चुनेगा. लेकिन नाबालिग राजा परम्परा कैसे निभाएगा, इसके लिए पूरा परिवार सहयोग कर रहा है.

डोम राजा का रुतबा काशी नरेश से बढ़कर

नये डोम राजा के ममेरे भाई और परिवार के सदस्य शालू चौधरी कहते हैं कि मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र दोनों घाटों की जिम्मेदारी संभालना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन परिवार साथ खड़ा है इसलिए कोई समस्या नहीं होगी। हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, काशी में मरने और यहां अंतिम संस्कार होने पर जीवात्मा को खुद भगवान शिव तारक मंत्र प्रदान करते हुए मोक्षगति देते हैं. यहां मोक्ष की आग डोम परिवार ही देता है. जिसके लिए परिजनों को डोम कर देना पड़ता है. खुद दिवंगत डोम राजा जगदीश चौधरी के दाह संस्कार के लिए कर चुकाना पड़ा था. यही नहीं, महान सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र को डोम परिवार के वंशज कालू डोम ने खरीदा था और जब राजा हरिश्चंद्र के पुत्र का शव यहां घाट पर आया तो राजा हरिश्चंद्र ने अपनी पत्नी से भी कर मांगा था. काशी में डोम राजा का रुतबा काशी नरेश से बढ़कर है. संस्कृति के जानकार गुलशन कपूर कहते हैं कि इन्हीं पौराणिक मान्यताओं और संस्कृति को खुद में समेटे डोम परिवार खुद पर गर्व करता है और काशी में इसलिए इन्हें सम्मान की नजर से देखा जाता है.



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