Pitra Paksh beginning today; Due to the epidemic, the administration has stopped the shraddha karma on the vampire redemption pool, silence | पितृ पक्ष की आज से शुरुआत, पिशाच मोचन कुंड पर श्राद्ध कर्म पर प्रशासन ने रोक लगाई

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वाराणसी5 दिन पहले

  • अमावस्या के दिन 17 तारीख को पितृ पक्ष का आखिरी दिन
  • वाराणसी में घाटों पर बाढ़ की वजह से नहीं हो रहा श्राद्ध कर्म

अश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से अमावस्या तक 15 दिन तक पितृ पक्ष रहेगा। बुधवार से इसकी शुरुआत हो गई है। काशी के पिशाच मोचन कुंड और गंगा घाटों पर पिंडदान, श्राद्ध, तर्पण करने वाले लोग नहीं पहुंचे। जिला प्रशासन ने इस बार 15 दिन तक किसी भी आयोजन पर रोक लगा दी है।

मुन्ना लाल पंडा ने बताया कि यह कुंड द्वापर त्रेता युग के समय का बताया जाता है। पिसाच नाम के ब्राह्मण को प्रेत बाधा थी। उसने यहां आकर महादेव के दर्शन के लिए तप किया था। महादेव ने जब दर्शन दिए तो उसने मुक्ति की बात कही। ब्राह्मण ने मुक्ति के बाद महादेव से कहा कि अन्य प्राणियों के यहां भी अकाल मृत्यु होती है। उनको मुक्ति मार्ग कैसे मिलेगा। मैं यहीं रहना चाहता हूं। तब महादेव ने वरुण देव को बुलाकर यहां कुंड में जल भरवाया, तभी से इस विमल तीर्थ में त्रिपिंडी श्राद्ध की परंपरा चली आ रही है।

पिशाच मोचन पर अनुष्ठान पर लगी रोके बाद तैनात पुलिसकर्मी।

हर साल करीब डेढ़ लाख लोग आते थे
मुन्ना पंडा ने बताया कि 15 दिन के मेले में डेढ़ लाख लोग आते थे। इस बार तो एक आदमी यहां नहीं आया। जिला प्रशासन ने पुलिसकर्मियों को भी कुंड पर तैनात कर दिया है। बबलू पंडा ने बताया कि जमा पैसों से ही अभी खाया जा रहा है। ज्यादा दिन तक ऐसी नौबत रही तो कोई दूसरा काम करना होगा। पितृ पक्ष में यजमान अच्छा खासा दान करते थे। आमदनी अच्छी होती थी। ऑनलाइन श्राद्ध पर हर कोई विश्वास नहीं करता है। इसका प्रचलन यहां न के बराबर है।

पिशाच मोचन का मुख्य द्वार।

पिशाच मोचन का मुख्य द्वार।

अकाल मृत्यु में मारे गए पूर्वजों के लिए होता है त्रिपिंडी श्राद्ध
पंडित कमलेश पांडेय ने बताया पितृ पक्ष 17 सितम्बर तक रहेगा और इन 15 दिनों तक लगातार वाराणसी के पिशाच मोचन कुण्ड पर देश के कोने कोने से लोग आकर अपने पूर्वजों के लिए पिंड दान करते हैं।मान्यता है कि जो पूर्वज अकाल मृत्यु को प्राप्त हो चुके होते है, उनको पित्र पक्ष में काला तिल और जल का दान दिया जाता है। पितरों की आत्मिक शांति के लिए तिल और जल से तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करते हैं।

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