Uttar Pradesh Congress News Update; Priyanka Gandhi-Led Congress Announced Seven Committees To Prepare For Up Assembly Elections | नेतृत्व में बदलाव की चिट्ठी लिखने वाले सीनियर लीडर्स की अनदेखी; बचाव करने वालों को मिली अहम जिम्मेदारी, कांग्रेस को नुकसान की आशंका

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लखनऊ9 घंटे पहले

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प्रतीकात्मक फोटो।

  • विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए कांग्रेस ने सात अलग-अलग समितियां बनाईं
  • राजबब्बर, जितिन प्रसाद, आरपीएन सिंह जैसे नेता को समिति में नहीं मिली जगह
  • महासचिव प्रियंका गांधी ने यंग लीडर्स पर जताया भरोसा

विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए रविवार को कांग्रेस ने सात ​​​​​अलग-अलग कमेटियों की घोषणा की है। इन समितियों में यूपी के उन नेताओं की अनदेखी की गई है, जोकि उन 23 नेताओं में शामिल थे जिन्होंने शीर्ष नेतृत्व पर बदलाव के लिए सोनिया गांधी को पत्र लिखा था। जबकि उन नेताओं को इन समितियों में जगह मिली है, जिन्होंने शीर्ष नेतृत्व का बचाव करते हुए पत्र लिखने वाले नेताओं को ही कटघरे में खड़ा कर दिया था। ऐसे में जानकार कहते है कि इससे पार्टी और असंतुष्ट नेताओं के बीच खाई बढ़ती ही जाएगी। साथ ही डेढ़ दो साल बाद होने वाले यूपी चुनाव में इसका असर भी देखने को मिल सकता है। हालांकि यंग लीडर्स पर प्रियंका ने विश्वास जताया है। अब इसका क्या हासिल होगा यह भविष्य बताएगा।

खेमेबाजी और पार्टी-नेताओं के बीच बढ़ेगी खाई

कांग्रेस ने राजबब्बर, जितिन प्रसाद और आरपीएन सिंह जैसे पार्टी की पहली कतार के नेताओं की अनदेखी की है। कांग्रेस को समझने वाले कहते है कि यह सभी नेता जनसमर्थन वाले हैं। सीनियर जर्नलिस्ट प्रदीप कपूर कहते है कि सामने विधानसभा चुनाव है। ऐसे में जो जनसमर्थन वाले नेता हैं उन्हें साथ लेकर चलना चाहिए। कांग्रेस नेतृत्व को अगर भाजपा से चुनाव में लड़ाई करना है तो सभी को साथ लेकर चलना होगा। सीनियर नेता जहां जनसमर्थन ला सकते हैं और मार्गदर्शन कर संकट है तो यंग लीडर्स दौड़ भाग कर व्यवस्था संभाल सकते हैं।

बड़े नेताओं ने किया भी क्या है?

पार्टी में एक तबका इन बड़े लीडर्स के खिलाफ भी है। दबी जुबान में सब यही कह रहे है कि दिनोदिन पार्टी की हालत खराब हुई जा रही है। लेकिन यह बड़े लीडर्स कुछ करने को तैयार नहीं है न ही कुछ कर रहे हैं। ऐसे में नेतृत्व इन पर क्यों विश्वास करें। हालांकि प्रियंका गांधी ने जब यूपी का नेतृत्व करते हुए अजय कुमार लल्लू को प्रदेशाध्यक्ष बनाया तो कुछ सीनियर नेताओं को पार्टी से बाहर कर दिया गया। अभी उन नेताओं ने भी सोनिया गांधी को पत्र लिखा है। ऐसे में इस कवायद को भी प्रियंका गांधी के फैसले से जोड़ कर ही देखा जा रहा है।

सीनियर जर्नलिस्ट समीरात्मज मिश्रा कहते है कि खाई बढ़नी तय है। क्योंकि यूपी से जिन नेताओं ने पत्र लिखा उन्हें किनारे किया गया, लेकिन जिस नेता ने उनकी आलोचना की उसे समिति में शामिल किया गया है। उन्होंने कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष निर्मल खत्री का नाम लिया। समीरात्मज मिश्रा साथ में यह भी कहते है कि 2014 से 2020 तक पार्टी के यह बड़े नेता सिर्फ चुनावों में दिखाई सुनाई पड़ते हैं। लेकिन जब सड़क पर संघर्ष करना होता है तो युवाओं की ओर देखा जाता है। ऐसे में यदि प्रियंका गांधी ने विधानसभा की तैयारियों के लिए युवाओं पर भरोसा किया तो गलत नहीं किया। कांग्रेस ने सबको साधने की कोशिश की है। ऐसे में गुटबाजी बढ़ेगी लेकिन बहुत खास फर्क पार्टी पर नही पड़ेगा।

क्या कांग्रेस लीडरशिप के अकाल से तो नही जूझेगी?

यूपी कांग्रेस के मजबूत स्तंभ रहे सत्यदेव त्रिपाठी, सिराज मेहंदी और पूर्व सांसद संतोष सिंह समेत 9 लोगों को पिछले साल पार्टी से बाहर कर दिया गया था। अब जो पहली पंक्ति के नेता है उनकी भी अनदेखी की गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या चुनाव से पहले कांग्रेस में नेताओं की कमी तो नहीं हो जाएगी। सीनियर जर्नलिस्ट समीरात्मज मिश्रा कहते हैं कि जिन बड़े नेताओं की अनदेखी की गई वह बड़े कैसे बने? उन्हें टिकट दिया गया। वह सांसद, विधायक बने। मंत्री बनाया गया तो आज वह बड़े नेता कहलाते हैं। लेकिन पिछले 6 साल से सभी नेता क्या कर रहे हैं। यह सही है कि कांग्रेस को मरम्मत की जरूरत है। ऐसे में कहीं कहीं पुरानी चीजों का मोह तो छोड़ना ही पड़ेगा। भविष्य देखना है तो नए नेताओं को तैयार करना पड़ेगा। यह सही भी है। अब जो सेकंड रो के नेताओं को जिन्हें बढ़ाया गया है अब उनके पास खुद को प्रूफ करना होगा। क्योंकि बिना मौका दिए अगर रिजेक्ट किया गया तो उनके पास शिकायत का मौका रहेगा।

कांग्रेस को अब अपनों से ही होगा खतरा ?

यूपी में रसातल की तरफ जा रही कांग्रेस को उबरने के लिए बहुत कुछ करना होगा। इसी क्रम में प्रियंका गांधी काम भी कर रही है लेकिन समितियों की घोषणा के बाद एक धड़ा मान कर चल रहा है कि नाराजगी बढ़ी है और इसका खमियाजा पार्टी को चुनावों में उठाना पड़ेगा लेकिन एक धड़ा यह भी मां कर चल रहा है कि अगर पार्टी को फिर से एकजुट और ऊपर उठाना है तो ऐसे कड़े फैसले लेने पड़ेंगे। सीनियर जर्नलिस्ट प्रदीप कपूर कहते हैं कि कांग्रेस ने साबित कर दिया है कि वह भविष्य में अब उन लोगों को वरीयता नही देगी जिन्होंने लेटर लिखा था। हालांकि प्रदीप कपूर कहते है कि पार्टी उन खतरों के बेटे में भलीभांति जानती है कि बड़े नेताओं की अनदेखी कर क्या क्या देखना झेलना पड़ सकता है लेकिन पार्टी अब अपनी नई टीम पर भरोसा कर रही है। साथ ही संभावना है कि आने वाले समय मे अगर परिस्थितियां बदलती है तो ये नाराज नेता फिर से पार्टी के पाले में आ सकते हैं।

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