वैज्ञानिकों का दावा- सर्दी में पहने जाने वाले कपड़ों से हो सकता है कोरोना से बचाव! | health – News in Hindi

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सर्दी में तापमान घटने की वजह से इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि लोग घरों में ही रहे और ये वक्त कोरोना के लिए मिनी क्वारनटीन जैसा साबित हो सकता है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि सर्दी (Winter) में पहने जाने वाले कपड़े जैसे कि स्कार्फ, ग्लव्स, पर्सनल पीपीई किट (PPE Kit) की तर्ज पर लोगों को कोरोना (Corona) से बचाने में मदद कर सकते हैं.


  • News18Hindi

  • Last Updated:
    September 8, 2020, 10:58 AM IST

कोरोना वायरस (Coronavirus) के कहर ने पूरी दुनिया पर आज भी तहलका मचा रखा है. हालांकि कई जगहों पर जिंदगी दोबारा पटरी पर दौड़ना शुरू हुई है लेकिन कोरोना पर पूरी तरह काबू नहीं किया जा सका है. लोग अपनी और दूसरों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए काम कर रहे हैं. डॉक्टरों ने लोगों से कहा है कि कोरोना से बचने के लिए मास्क (Mask) का इस्तेमाल जरूर करें, बार बार हाथों को सैनिटाइज (Sanitize) करें और सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) का पालन जरूर करें. इसके अलावा इम्यूनिटी को स्ट्रॉन्ग बनाने के लिए भी कहा जा रहा है. दरअसल मजबूत इम्यून सिस्टम शरीर को कई प्रकार के वायरल इंफेक्शन से बचाता है. इसी बीच कई एक्सपर्ट सर्दी में कोरोना वायरस की दूसरी लहर पैदा होने की बात कह चुके हैं. लेकिन ब्रिटेन के एक वैज्ञानिक ने कहा है कि हो सकता है कि कोरोना की दूसरी लहर 2021 के मार्च में आए.

कोरोना के लिए मिनी क्वारनटीन
दरअसल ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के प्रोफेसर बेन निउमन ने कहा है कि सर्दी में पहने जाने वाले कपड़े जैसे कि स्कार्फ, ग्लव्स, पर्सनल पीपीई किट की तर्ज पर लोगों को कोरोना से बचाने में मदद कर सकते हैं. आज तक में छपी खबर के अनुसार प्रोफेसर निउमन ने ब्रिटेन को लेकर कहा है कि हो सकता है कि अगले साल मार्च से पहले कोरोना की दूसरी लहर न आए. उन्होंने कहा कि सर्दी में तापमान घटने की वजह से इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि लोग घरों में ही रहे और ये वक्त कोरोना के लिए मिनी क्वारनटीन जैसा साबित हो सकता है. डेली मेल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना वायरस इन्फ्लूएंजा वायरस की तरह मौसमी नहीं है और भीषण सर्दी की जगह बसंत ऋतु में पीक पर रह सकता है.

कोरोना की दूसरी लहर पैदा हो रही हैआपको बता दें कि ब्रिटेन सहित यूरोप के कई देशों में कोरोना के मामले दोबारा बढ़ने लगे हैं. इससे ये आशंका भी जाहिर होती नजर आ रही है कि कोरोना की दूसरी लहर पैदा हो रही है. प्रोफेसर निउमन के अनुसार सर्दी में हो सकता है कि कोरोना पॉजिटिव आने वाले लोगों का परसेंटेज रेट सही न आए, क्योंकि फ्लू की वजह से अधिक संख्या में लोग कोरोना टेस्ट के लिए पहुंच सकते हैं. इसकी वजह से पॉजिटिव होने वाले लोगों की दर कम हो सकती है.

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कोरोना के पीक पर होने की बात कही
वहीं, ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंजलिया में प्रोफेसर पॉल हंटर कहते हैं कि जो उम्मीद की जा रही थी, उससे काफी पहले ही कोरोना के केस में बढ़ोतरी शुरू हो गई है. उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के अधिकारियों ने भी जनवरी में दोबारा कोरोना के पीक पर होने की बात कही है और निश्चित तौर से यह दिसंबर-जनवरी के बीच का समय हो सकता है. आपको बता दें कि कोरोना को लेकर विश्वभर में अभी भी कई तरह की बातें की जा रही हैं.



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