From the South China Sea to South Asia and Central Asia, the expansionism of China has intensified and it is growing vigorously. – राजनीति: पड़ोसियों पर दादागीरी करता चीन

0
35
.

दक्षिण चीन सागर से लेकर दक्षिण एशिया और मध्य एशिया में चीन का विस्तारवाद तेज हो गया है। कोरोना महामारी के दौर में चीन भारत के लद्दाख क्षेत्र में घुसपैठ कर चुका है। लेकिन इस आपदा काल में चीन के निशाने पर दूसरे पड़ोसी दोस्त भी हैं। चीन ताजिकिस्तान के पामीर क्षेत्र और नेपाल के एवरेस्ट को भी अपना बता रहा है। उसकी इस विस्तारवादी नीति का शिकार बेल्ट एंड रोड पहल में शामिल देश भी हो रहे है। इस परियोजना के जाल में फंसे पड़ोसी देशों के इलाकों पर चीन की नजर है।

ताजा मामला ताजिकिस्तान का है। चीनी सरकार की एक वेबसाइट पर प्रकाशित लेख में चीन के एक इतिहासकार ने दावा किया है कि ताजिकिस्तान का पूरा पामीर क्षेत्र चीन का है, जिसे उन्नीसवीं सदी में चीन से छीना गया था। ब्रिटेन और रूस के दबाव में पामीर का क्षेत्र चीन के हाथ से निकल गया था। इतिहासकार के अनुसार ताजिकिस्तान से पामीर का इलाका वापस लिया जाना चाहिए। हाल में चीन ने एवरेस्ट को लेकर फिर विवाद खड़ा कर दिया और माउंट एवरेस्ट को चीन के तिब्बत स्वाययत क्षेत्र का हिस्सा बताया। कोरोना आपदा काल में ही चीन ने भूटान के सकतेंग वन्यजीव अभयारण्य को विवादित बताया है। चीन इसे भी अपना इलाका बता रहा है।

माउंट एवरेस्ट पर चीन की नजर पचास के दशक से ही है। माओत्से तुंग के कार्यकाल में भी नेपाल और चीन के बीच हुए सीमा विवाद में एवरेस्ट का मामला उठा था। लेकिन तब चीन ने एवरेस्ट को नेपाल का हिस्सा मान लिया था, कारण जो भी रहे हों। पर इस साल मई में चीन के सरकारी टेलीविजन ने एवरेस्ट को तिब्बत का हिस्सा बता कर नेपाल की नींद उड़ा दी। चीन की तरफ से ये शरारत तब की गई जब नेपाल की सत्ता में चीन के कट्टर समर्थक लोग काबिज हैं। नेपाल में नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी का राज है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली चीन-नेपाल संबंधों को नई ऊंचाई देने का दावा कर रहे है।

दिलचस्प बात तो यह है कि नेपाल का सर्वे विभाग भी स्वीकार कर रहा है कि चीन लगातार नेपाली इलाकों में घुसपैठ कर रहा है और नेपाल की जमीन हथिया रहा है। सर्वे विभाग ने पिछले साल जानकारी दी थी कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर नेपाल के चार जिलों की छत्तीस हेक्टेयर जमीन पर चीन ने कब्जा कर लिया है। इसके अलावा सैकड़ों हेक्टेयर और जमीन पर भी चीन कब्जा करने की ताक में है। इसके बावजूद नेपाल के प्रधानमंत्री ओली चीन के खिलाफ कुछ बोलने के बजाए भारत के साथ सीमा विवाद में उलझ गए। नेपाल ने नया राजनीतिक मानचित्र तक जारी कर दिया, जिसमें भारत के कुछ क्षेत्र को अपना बताया है।

अब बात करें ताजिकिस्तान की। पूरे पामीर क्षेत्र पर चीन की दावेदारी का मतलब है कि उसकी नजर ताजिकिस्तान के पैंतालीस फीसद इलाके पर है। हालांकि चीन और ताजिकिस्तान के बीच सीमा विवाद 2010 में ही सुलझ गया था और समझौता हो गया था। इस समझौते के तहत ताजिकिस्तान ने पामीर का लगभग 1158 वर्ग किलोमीटर इलाका चीन को 2011 में दे दिया था। उस समय चीन ने कहा था कि ताजिकिस्तान के साथ उसका सीमा विवाद खत्म हो गया है। लेकिन चीन अब फिर से नए पैंतरे चल रहा है।

नेपाल पर नजर डालें तो पाएंगे कि सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से नेपाल भारत के नजदीक है। इसके बावजूद नेपाल ने हाल के वर्षों में चीन से खूब नजदीकियां बढ़ाई हैं। बीते वर्ष अक्तूबर में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग काठमांडो के दौरे पर गए थे। उनका स्वागत करते हुए नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने कहा था कि नेपाल और चीन का संबंध समुद्र की तरह गहरा और एवरेस्ट की तरह ऊंचा है। लेकिन जिस एवरेस्ट की ऊंचाई से नेपाल और चीन के संबंधों की तुलना विद्या देवी भंडारी कर रही थी, उस एवरेस्ट को चीन अपना हिस्सा बताने में लग गया है। चीन के साथ संबंधों को इस तरह परिभाषित करने का काम पाकिस्तान के हुक्मरान भी करते रहे हैं और अक्सर बताते रहे हैं कि चीन के साथ पाकिस्तान का संबंध शहद की तरह मीठा, समुद्र की तरह गहरा और हिमालय की तरह ऊंचा है।
चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड के शुरुआती भागीदारों में ताजिकिस्तान का नाम भी आता है।

नेपाल भी इस परियोजना में शामिल है। दोनों देश इस परियोजनाओं से जुड़े कई समझौते कर चुके है। तजाकिस्तान में तो इससे जुड़ी कई परियोजनाओं का काम भी पूरा हो चुका है। नेपाल में भी नौ परियोजनाएं चल रही हैं। लेकिन चीन की गतिविधियों से अब नेपाल और ताजिकिस्तान की चिंता भी बढ़ने लगी है। दोनों देश इस बात को लेकर परेशान हैं कि कहीं वे चीन के कर्ज जाल में तो नहीं फंस जाएंगे। ऐसी आशंकाएं जताई जा रही हैं कि चीन नेपाल और तजाकिस्तान जैसे गरीब देशों की हालत श्रीलंका जैसी कर देगा। मालूम हो कि श्रीलंका चीन के भारी कर्ज जाल में फंस चुका है। अगर नेपाल और ताजिकिस्तान जैसे देश भविष्य में चीन का कर्ज नहीं लौटा पाए तो चीन इन देशों के संसाधनों का मनमाने तरीके से दोहन करेगा।

मध्य एशिया में चीन के विस्तारवादी रवैये से रूस सतर्क है। मध्य एशिया के देश एक समय में सोवियत संघ के हिस्सा रहे हैं। सोवियत संघ के विघटन के बाद चीन ने मध्य एशिया के देशों के साथ सीमा विवाद हल किया। लेकिन एक बार फिर चीन ने ताजिकिस्तान के इलाके पर दावा ठोका है। रूस को अच्छी तरह से पता है कि चीन मध्य एशिया के देशों में बेल्ट एंड रोड परियोजना के तहत भारी निवेश कर चुका है। आज नहीं तो कल, चीन गरीब देशों को अपने कर्ज के जाल में फंसाएगा। इसमें भी कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि रूस मध्य एशिया से लेकर पश्चिम एशिया तक अपने वर्चस्व को किसी भी कीमत पर कम नहीं होने देगा।

रूस को वर्तमान भू-राजनीति में पश्चिम और मध्य एशिया में अमेरिका से नहीं, बल्कि चीन से चुनौती मिलेगी। सीरिया में रूस ने ईरान के साथ तालमेल कर अमेरिका की रणनीति को पहले ही विफल कर दिया है। उस स्थिति में रूस इन इलाकों में चीन की दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं करेगा। रूस की चिंता यह भी है कि चीन समय-समय पर रूस से सीमा को लेकर विवाद करता रहा है। हाल में रूस के व्लादिवोस्तोक शहर पर भी चीन ने दावेदारी की। चीन का तर्क है कि व्लादिवोस्तोक किसी जमाने में चीन के किंग वंश के अधीन था।

चीन की विस्तारवादी नीति के कारण ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (एसीओ) जैसे संगठनों के भविष्य पर प्रश्न चिन्ह लगने लगा है। भारत और ताजिकिस्तान भी एससीओ के सदस्य हैं। चीन और भारत दोनों ब्रिक्स के सदस्य हैं। लेकिन चीन ब्रिक्स और एससीओ के सदस्य देशों के इलाकों में ही घुसपैठ कर रहा है और उनके इलाकों पर दावा ठोक रहा है। चीन की इस हरकत से ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन मजबूत सदस्य देश रूस की स्थिति विकट हो गई है।

रूस इन दोनों संगठनों को मजबूत रखना चाहता है। चीन की विस्तारवादी नीति ब्रिक्स और एससीओ के हित में नहीं है। हालांकि रूस और चीन के बीच आपसी आपसी संबंध अच्छे हैं। चीन रूस से बड़े पैमाने पर गैस खरीद रहा है, रूस उसे एस-400 मिसाइलें भी बेच रहा है। इसके बावजूद रूस चीन की विस्तारवादी नीति को पसंद नहीं कर रहा है। ऐसे में भविष्य में मध्य एशिया और पश्चिम एशिया में रूस और चीन का हितों का टकराव तय है।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App। में रुचि है तो




सबसे ज्‍यादा पढ़ी गई




Source link

Authors

.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here