मुनव्वर राना की बेटी नजरबंद, बोलीं -हम सांकेतिक रूप से प्रदर्शन करना चाहते थे; 40 से ज्यादा पुलिसकर्मियों ने पूरे घर को घेर रखा है

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प्रदेश की राजधानी लखनऊ के घंटाघर पर सीएए के खिलाफ हुए प्रदर्शन में शामिल होकर चर्चा में आईं मशहूर शायर मुनव्वर राना की बेटी सुमैया राणा को लखनऊ पुलिस ने उन्हें उनके घर में नजरबंद कर दिया है। 12 घंटे से ज्यादा समय से सुमैया के घर पर 40 से ज्यादा पुलिसवाले तैनात हैं। सुमैया सांकेतिक रूप से सीएम आवास से थोड़ी दूर कालिदास चौराहे पर ताली थाली बजा कर प्रदर्शन करने वाली थीं। इसकी सूचना मिलने पर लखनऊ पुलिस ने उन्हें नजरबंद कर दिया।

लखनऊ पुलिस ने सुमैया राणा को नोटिस भेज कर कहा है कि सोशल मीडिया के जरिये पता चला है कि आप गौतमपल्ली थाना क्षेत्र में प्रदर्शन करना चाहती हैं। लखनऊ में धारा 144 लगी हुई है। साथ ही कोर्ट का भी सख्त निर्देश है कि हजरतगंज और गौतमपल्ली थाना क्षेत्र में प्रदर्शन न हो। धरना प्रदर्शन के लिए इको गार्डन में सुविधा दी गई है।

रात 12 बजे ही हमें नजरबंद कर दिया गया

सुमैया राणा का कहना है कि हम 20-25 महिलाओं के साथ 2 बजे कालिदास चौराहे पर सांकेतिक रूप से ताली थाली बजाओ का प्रदर्शन करना चाहते थे लेकिन देर रात 12 बजे से हमें नजर बन्द किया हुआ है। उन्होंने बताया कि उनकी एक और साथी को भी उसके घर मे बंद किया हुआ है।

सुमैया का कहना है कि महामारी की वजह से लोग भूखे मर रहे हैं। नौकरियां जा रही है। बाजार मंदा पड़ गया है, लेकिन सरकार इन सब बातों पर ध्यान देने के बजाय अपनी पीठ थपथपाने पर लगी है। इसलिए सरकार का जरूरी मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करने के लिए हम सांकेतिक रूप से प्रदर्शन करना चाहते थे।

घर के बच्चों के साथ-साथ अपार्टमेंट के लोग डरे हुए हैं
सुमैया ने बताया कि रात 12 बजे 40 से ज्यादा पुलिसवालों के साथ पुलिस अधिकारी मेरे घर कैसर बाग स्थित सिल्वर अपार्टमेंट में पहुंचे। जहां उन्होंने गार्ड से, ड्राइवर से पूछताछ की। घर मे भी तलाशी ली गई। इससे मेरे बच्चे डर गए मेरे पति को भी बाहर नहीं जाने दिया गया। अपार्टमेंट के लोग भी डरे हुए हैं। वह हमसे पूछ रहे है कि क्या मसला है। सुमैया ने कहा कि मेरे पास थ्रेट कॉल आती हैं। मैसेज आते हैं कि जान से मार देंगे। इस मामले में हम शिकायत करने दो बार कैसर बाग कोतवाली गए, लेकिन हमारी शिकायत नहीं सुनी गई।

नहीं पता बंदिशें कब हटेंगी
सुमैया राणा ने कहा रात 12 बजे से सुबह तक इलाके के एसीपी भी यहां पहरा देते रहे। अभी 10-12 महिला पुलिसकर्मी और 30 से ज्यादा पुरुष पुलिसकर्मी मेरे घर के आसपास लगे हुए हैं। यहां तक कि मीडिया से भी मेरी मुलाकात नहीं होने दे रहे हैं। मुझे नहीं पता है कि आखिर कब मुझ पर से यह बंदिश कब हटेगी।

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