‘देशद्रोही, बेईमान. बोल पर कंगना रनौत ने किया शिवसेना पर पलटवार- ‘ना डरूंगी, ना झुकूंगी…खून भी दे सकती हूं’

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हाइलाइट्स:

  • सामना के संपादकीय के जरिए कंगना रनौत और मोदी सरकार पर बोला गया हमला
  • पत्रकारों को बताया गया देशद्रोही, सुपारीबाज कलाकारों का समर्थन करना हरामखोरी
  • कंगना को बताया ऐरा गैरा, लिखा कोई भी ऐरा-गैरा नहीं मार सकता महाराष्ट्र को टपली
  • मुंबई को बदनाम और खोखला करने की हो रह साजिश, नहीं करेंगे बर्दाश्त

मुंबई
सुशांत केस को लेकर महाराष्ट्र में उठा सियासी तूफान अब कंगना रनौत और शिवसेना के बीच तब्दील होता नजर आ रहा है। अपने ट्वीट्स से उद्धव सरकार और मुंबई पुलिस पर ताबड़तोड़ हमला करने वालीं कंगना रनौत बुधवार को मुंबई पहुंच रही हैं। कंगना के आने से पहले शिवसेना के मुखपत्र सामना में कंगना को बेईमान, देशद्रोही…जैसे शब्दों से तीखा हमला किया गया। जवाब में कंगना भी कहां चुप रहने वाली थीं। कंगना ने दनादन ट्वीट्स कर शिवसेना पर तीखा हमला किया।

कंगना ने चुनौती भरे लफ्जों में ट्वीट किया, ‘मुंबई में मेरा घर है। मैं मानती हूं, महाराष्ट्र ने मुझे सब कुछ दिया है। मगर मैंने भी महाराष्ट्र को अपनी भक्ति और प्रेम से एक ऐसी बेटी की भेंट दी है जो शिवाजी महाराज की जन्मभूमि में स्त्री सम्मान और अस्मिता के लिए अपना खून भी दे सकती है, जय महाराष्ट्र!’

मोदी सरकार पर भी तीखा हमला
इससे पहले शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के जरिए कंगना रनौत को एक बार फिर से निशाने पर लिया। सामना के संपादकीय में कंगना को बेईमान बताया गया है। यहां तक कि कंगना को देशद्रोही, बेईमान और मानसिक विकृत बताया गया है। वहीं मोदी सरकार को देशद्रोही को सुरक्षा देने की बात कही गई है। पत्रकारों को भी देशद्रोही बताकर हरामखोर कहा गया।

‘सामना’ में लिखा है कि मुंबई की तुलना ‘पाक अधिकृत’ कश्मीर से करना और मुंबई पुलिस को माफिया आदि बोलकर खाकी वर्दी का अपमान करना बिगड़ी हुई मानसिकता के लक्षण हैं। महाराष्ट्र की 11 करोड़ मराठी जनता और मुंबई का अपमान मतलब देशद्रोह जैसा अपराध प्रतीत होता है। जब ऐसा अपराध करनेवाले लोगों के साथ राष्ट्रभक्त मोदी सरकार का गृह मंत्रालय सुरक्षा कवच देकर खड़ा होता है, तब हमारे 106 शहीद स्वर्ग में आंसू बहा रहे होंगे।

‘राजद्रोह का समर्थन करना हरामखोरी’
‘सामना’ ने कहा कि राजनीतिक एजेंडे को सामने लाने के लिए देशद्रोही पत्रकार और सुपारीबाज कलाकारों के राजद्रोह का समर्थन करना भी ‘हरामखोरी’ ही है। मतलब माटी से बेईमानी ही है। जो लोग महाराष्ट्र के बेईमानों के साथ खड़े हैं, उन्हें 106 शहीदों की बद्दुआ तो लगेगी ही, लेकिन राज्य की 11 करोड़ जनता भी उन्हें माफ नहीं करेगी! ‘मुंबा’ माता का अपमान करनेवालों के नाम महाराष्ट्र के इतिहास में डामर से लिखे जाएंगे। बेईमान कहीं के! ये लोग अब राष्ट्रभक्ति का तुनतुना न बजाएं, बस इतनी ही अपेक्षा है!

इशारों में कंगना को बताया बेईमान और मानसिक विकृत
मराठी लोगों से बेईमानी करने वाले मानसिक विकृत लोगों से मराठी मानुष हमेशा लड़ता रहा है। कोई भी आए और महाराष्ट्र की मराठी राजधानी पर टपली मारे, कोई ऐरा-गैरा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को अरे-तुरे करके चुनौती दे, तो इसके विरोध में पूरे महाराष्ट्र को एक होना चाहिए। महाराष्ट्र संतप्त है लेकिन भारतीय जनता पार्टी मुंबई और राज्य के मुख्यमंत्री का अपमान करनेवालों का सीधे-सीधे समर्थन कर रही है।

‘महाराष्ट्र की अस्मिता और सम्मान के लिए दे सकती हूं खून’
इधर, कंगना ने पलटवार करते हुए ट्वीट किए। उन्होंने लिखा, ‘मैं मानती हूं महाराष्ट्र ने मुझे सब कुछ दिया है, मगर मैंने भी महाराष्ट्र को अपनी भक्ति और प्रेम से एक ऐसी बेटी की भेंट दी है जो महाराष्ट्र शिवाजी महाराज की जन्मभूमि में स्त्री सम्मान और अस्मिता केलिए अपना ख़ून भी दे सकती है। मैं 12 साल की उम्र में हिमांचल छोड़ चंडीगढ़ हॉस्टल गई। फिर दिल्ली में रही और सोलह साल की थी जब मुंबई आई, कुछ दोस्तों ने कहा मुंबई में वही रहता है जिसे मुंबा देवी चाहती हैं, हम सब मुंबा देवी देवी के दर्शन करने गए, सब दोस्त वापस चले गए और मुंबा देवी ने मुझे अपने पास ही रख लिया।’

कंगना ने लिखा, ‘रानी लक्ष्मीबाई के साहस, शौर्य और बलिदान को मैंने फ़िल्म के जरिए जिया है। दुख की बात यह है मुझे मेरे ही महाराष्ट्र में आने से रोका जा रहा है मैं रानी लक्ष्मीबाई के पद चिन्हों पर चलूगी ना डरूंगी, ना झुकूंगी। गलत के ख़िलाफ़ मुख़र होकर आवाज़ उठाती रहूंगी।’

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‘मुंबा देवी का अपमान’
मुंबई पर अपना हक जतानेवाले बहुत सारे लोग आगे आए हैं। लेकिन ‘मुंबा’ देवी का ही प्रसाद है। देवी स्वरूप मुंबई मां की तुलना पाक अधिकृत क्षेत्र से करके हमारी देवी का ही अपमान किया गया। हिंदुत्व और संस्कृति का, धर्म और 106 शहीदों के त्याग का अपमान किया गया तथा ऐसा अपमान करके छत्रपति शिवराय के महाराष्ट्र पर नशे की पिचकारी फेंकने वाले व्यक्ति को केंद्र सरकार विशेष सुरक्षा की पालकी का सम्मान दे रही है।

‘मुंबई को बदनाम और खोखला करने की साजिश’
मराठीजनों, मुंबा देवी का यह अपमान जिसे प्रिय है, ऐसे लोग दिल्ली में और महाराष्ट्र के विधिमंडल में बैठे हैं इसलिए मुंबई पर खतरा बना हुआ है। मुंबई को पहले बदनाम करो, फिर उसे खोखला करो। मुंबई को पूरी तरह से कंगाल करके एक दिन इसे महाराष्ट्र से तोड़ने की करतूत नए सिरे से रची जा रही है।

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सामना में लिखा है कि अमदाबाद, गुड़गांव, लखनऊ, वाराणसी, रांची, हैदराबाद, बेंगलुरु और भोपाल जैसे शहरों के बारे में अगर कोई अपमानजनक बयान देता तो केंद्र ने उसे वाइ श्रेणी सुरक्षा की पालकी दी होती क्या? यह महाराष्ट्र के भाजपाई स्पष्ट करें। देवेंद्र फडणवीस, प्रधानमंत्री मोदी या गृहमंत्री शाह का नाम ‘अरे-तुरे’ से उच्चार करनेवाले टीनपाट चैनलों के मालिकों को भाजपा वालों ने ऐसा समर्थन दिया होता क्या?

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‘सीमा पर हिम्मत दिखाई होती तो बेइज्जती न होती’
मोदी सरकार को निशाने पर लेते हुए सामना में लिखा गया कि आज जिस प्रकार से सारे भाजपा वाले महाराष्ट्रद्रोहियों के साथ खड़े हैं, उसी विश्वास से हमारी सीमा में घुसे चीनी बंदरों के बारे में हिम्मत दिखाई होती तो लद्दाख और अरुणाचल की सीमा पर देश की बेइज्जती ना हुई होती। देश की इज्जत तार-तार न हो, इसके लिए राष्ट्रभक्तों ने संयम रखा हुआ है, बस इतना ही।

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