Boycotting Chinese Products; Swadeshi Toys Demand Increased Uttar Pradesh Gorakhpur | गोरखपुर में स्वदेशी खिलौनों ने 80% बाजार पर किया कब्जा, डिमांड और बाजार दोनों जगहों से गायब हो रहे चाइनीज आइटम

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गोरखपुर11 घंटे पहले

भारत में बने रिमोट कार, हेलीकाप्टर, बस, ट्रेन, म्यूजिकल गुड़िया और कार्टून कैरेक्टर वाले खिलौने बच्चों को पसंद आ रहे।

  • गोरखपुर में पांडेयहाता और शाहमारूफ में 100 से ज्यादा खिलौनों की थोक दुकानें
  • हर साल 75 से 80 करोड़ का होता है कारोबार, नेपाल और बिहार होती है खिलौनों की आपूर्ति

लेह-लद्दाख में बॉर्डर पर भारत-चीन के बीच तनाव जारी है। इसका असर अब मैदानी इलाकों में भी देखने को मिलने लगा है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में आम आदमी ने चाइनीज खिलौनों को नकार दिया है। एक समय था जब चाइनीज खिलौनों का गोरखपुर के बाजार में 80 फीसदी कब्जा था, लेकिन अब स्वदेशी खिलौने बाजार में काबिज होते जा रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह ग्राहकों में स्वदेशी उत्पादों को लेकर आई जागरुकता मानी जा रही है।

बाबूलाल, कारोबारी।

गुणवत्ता में भी भारतीय खिलाैने चाइनीज उत्पाद से कम नहीं
गोरखपुर के पांडेयहाता मोहल्ले में खिलाैनों की सबसे बड़ी होलसेल की दुकान है। दुकानदार बाबूलाल से कारोबार के संबंध में सवाल पूछा गया तो वे कहने लगे कि कोरोना महामारी के चलते व्यापार काफी प्रभावित है। पहले लॉकडाउन से सबकुछ चौपट हुआ, फिर चीन से तनातनी ने उस पर आग में घी डालने जैसा काम किया। बाजार से चाइनीज खिलौने गायब हैं। लेकिन इस बीच एक अच्छी चीज देखने को मिल रही है कि लोग चाइना के खिलौने नहीं खरीदना चाहते। ग्राहक जब बच्चों के लिए खिलौने खरीदने आ रहा है तो वह स्वदेशी की मांग कर रहा है। बाजार की डिमांड को देखते हुए अब भारत में बने खिलौने ही मंगाए जा रहे हैं। गुणवत्ता में भी वह चीन निर्मित उत्पाद से कम नहीं हैं। खिलौना खरीदने आए असदुद्दीन कहते हैं कि बाजार में भारतीय खिलौने ही दिख रहे हैं। चाइनीज आइटम नहीं मिल रहे हैं।

75-80 करोड़ का सालाना कारोबार

पांडेयहाता और शाहमारुफ में खिलौने की 100 से ज्यादा थोक की दुकानें हैं। आसपास के जिलों के अलावा नेपाल और बिहार के सिवान, छपरा, बेतिया और नरकटियागंज तक खिलाने की आपूर्ति गोरखपुर से होती है। एक अनुमान के मुताबिक खिलौने का सालाना कोरोबार करीब 75 से 80 करोड़ रुपए का है। यहां कई ऐसे थोक विक्रेता हैं, जो महीने में 50 लाख रूपए खिलौना बेच लेते थे। लेकिन लॉकडाउन के बाद से खिलौना की मांग करीब 50 फीसद तक कम हो गई है।

शफीक, विक्रेता।

शफीक, विक्रेता।

अब 80 फीसदी खिलौने भारत के, यह देशहित में

खिलौना विक्रेता शफीक अहमद का कहना है कि कोरोना के कारण बीते 8 महीनों में चीन से आने वाले सामान पर निर्भरता कम हुई है। दिल्ली समेत कई शहरों में शानदार खिलौने बन रहे हैं। हालांकि लॉकडाउन के बाद से उत्पादन में 35 फीसद तक कमी आई। बच्चों को जो खिलौने सर्वाधिक पसंद आता है, उसमें रिमोट कार, हेलीकाप्टर, बस, ट्रेन, म्यूजिकल गुड़िया और कार्टून कैरेक्टर वाले खिलौने शामिल हैं। यह सभी चाइना से निर्यात होकर आता है। लेकिन अब चाइना खिलौने का पूरी तरह से बहिष्कार हो गया है। यही वजह है कि यहां के बाजार में 80 फीसदी खिलौने भारत निर्मित हैं। ये देशहित में भी है।

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