यूपी: गृह उद्योग के नाम पर तेजी से फलफूल रहा कच्ची शराब का धंधा, आखिर कब लगेगी रोक?

0
45
.

लखनऊ।(फर्स्ट आई ब्यूरो) उत्तर प्रदेश में धड़ल्ले से कच्ची शराब का कारोबार फल फूल रहा है। ताजा मामला यूपी के बागपत और मेरठ से सामने आया है जहां पर दो दिन के अंदर सात लोगों की कच्ची शराब ने जान ले ली है। इन लोगों के घरों में कोहराम मच गया है। बता दें कि प्रशासन मामले की कार्रवाई में लग गया है और उमीद है कि हर बार की तरह ये मामला भी कुछ दिन चर्चा में रहने के बाद दब जाएगा। क्योंकि ऐसा पहली बार नहीं बल्कि हमेशा ही होता रहा है कि जहरीली शराब लोगों की जान भी ले लेती है और इसके अवैध धंधे पर अंकुश भी नहीं लग पाता है।  लोगों का कहना है कि यहां पर घर-घर शराब बनने के साथ ही खुलेआम बेची जा रही है।  लेकिन किसी प्रकार की कार्रवाई आज तक नहीं की गई।

दो दिन में सात लोगों की मौत

बागपत के चमरावल गांव में दो दिन में जहरीली शराब से पांच लोग मौत की नींद सो गए। वहीं मेरठ में भी जानी थाना क्षेत्र के मीरपुर जखेडा गांव में शराब पीने से दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों के परिजन का कहना है कि ये मौतें शराब के जहरीली होने से हुईं हैं। हांलाकि पुलिस ने सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया हैं।

ये भी पढ़ें- राजनाथ सिंह और फ्रांस की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ली ने अंबाला में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने से पहले इन मुद्दो की चर्चा

गंभीर बीमारियों का शिकार होते लोग

देशभर में अवैध शराब का कारोबार बिना किसी रोक-टोक के खूब फलफूल रहा है। प्रशासन सो रहा है इसलिए लोग दिन रात जागकर अवैध शराब बनाकर बेच रहे हैं। सस्ती होने के कारण इसकी बिक्री भी सबसे ज्यादा है। कम पैसे में बिकने वाली शराब शरीर के लिए कितनी हानिकारक है इसका लोगों को कोई अंदाजा नहीं है। कच्ची शराब में तरह-तरह के नौसादर, स्प्रिट और यूरिया के अलावा तरह-तरह के केमिकल मिलाकर उसे और नशीला बनाकर बेचा जा रहा हैजिससे लोगों में तमाम प्रकार की बीमारियां पैदा हो रहीं हैं। इसके सेवन से लोग लीवर और किडनी की बीमारियों से भी ग्रसित हो रहे हैं। साथ ही हर साल कई लोगों की मौत भी हो जाती है।

 जिम्मेदार दें ध्यान तो अवैध शराब पर लगे लगाम

गृह उद्योग के नाम पर फलफूल रहे कच्ची शराब के धंधे पर रोक लगाना नामुमकिन हो गया है। आबकारी महकमा चन्द गांवों में छापेमारी कर कुछ लोगों को अवैध कच्ची शराब के साथ पकड़कर अपनी पीठ थपथपाने में लगा रहता है। वहीं अवैध कच्ची शराब के कारोबारी बड़े पैमाने पर अवैध कच्ची शराब बनाने में लगे रहते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिना रोक-टोक कच्ची शराब बनायी और बेंची जा रही है। लेकिन आबकारी महकमा अवैध शराब के बनाने व बिक्री पर रोक लगाने में पूरी तरह विफल रहा। विभागीय जिम्मेदारों की लापरवाही की वजह से ही अवैध शराब के धंधे पर रोक लगाना मुश्किल लग रहा है।

शासन और प्रशासन की सख्ती कुछ ही दिन की रहती है। क्योंकि घटना के वक्त जिम्मेदार जागते हैं और फिर वापस गहरी नींद सो जाते हैं। जिस कारण से अवैध शराब के धंधे पर अंकुश नहीं लग पाया है। कुछ दिन तक थमने के बाद फिर से कच्ची शराब का धंधा जोर पकड़ लेता है और शासन प्रशासन को मुंह चिड़ाते हुए धड़ल्ले से बिक्री चालू हो जाती है।

ये भी पढ़ें-एक्शन में सीएम योगी- निलंबन के बाद अब इन 2 IPS अफसरों की संपत्तियों की होगी विजिलेंस जांच

कब चेतेंगे जिम्मेदार

अवैध कच्ची शराब का कारोबार दिनो दिन फलता फूलता जा रहा है। लेकिन महकमें के जिम्मेदार इस ओर ध्यान देने को तैयार नहीं हैं। यही बड़ी वजह है कि बड़े पैमाने पर कच्ची शराब का कारोबार चलता रहता है और इसी शराब से लोगों की मौत भी होती रहती है। यही नहीं अवैध कच्ची शराब पीने से लोगों की मौत होने के बाद भी विभागीय जिम्मेदार चेतने को तैयार नहीं हैं।

Authors

.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here