bhima koregaon case: Mumbai News: भीमा-कोरेगांव मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करेगी उद्धव ठाकरे सरकार! – uddhav thackeray government may order sit probe into bhima koregaon case

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मुंबई
महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार जल्दी ही भीमा-कोरेगांव मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर सकती है। गुरुवार को राज्य सरकार के कुछ मंत्रियों के साथ एनसीपी चीफ शरद पवार की मीटिंग में इस बात के संकेत मिले हैं। फिलहाल, एल्गार परिषद मामले की जांच एनआईए के हाथ में है, जिसे उसने जनवरी 2020 में अपने हाथ लिया था। तबसे जांच एजेंसी ने मामले में 6 मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है।

गुरुवार को एनसीपी चीफ ने भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में चल रही जांच की समीक्षा के लिए वाईबी चव्हाण भवन में एक मीटिंग आयोजित की थी। बैठक में उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, गृह मंत्री अनिल देशमुख, शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड़, ऊर्जा मंत्री नितिन राउत, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) सीताराम कुंटे और प्रमुख सचिव (गृह) अमिताभ गुप्ता शामिल थे। इस दौरान कार्यकर्ताओं और वकीलों के एक ग्रुप ने मामले की मौजूदा स्थिति के बारे में मंत्रियों को जानकारी दी।

मीटिंग में शामिल एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भीमा-कोरेगांव मामले की जांच के लिए एक एसआईटी का गठन करेगी। उन्होंने बताया कि अनिल देशमुख, नितिन राउत और सीताराम कुंटे एसआईटी के तकनीकी पक्ष पर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि पिछली बार राज्य सरकार ने एसआईटी के गठन की घोषणा की थी लेकिन जांच एनआईए ने संभाल लिया था। कानून व्यवस्था हालांकि राज्य सरकार का विषय है, ऐसे में प्रदेश सरकार एसआईटी का गठन कर सकती है।

एनआईए कर रही मामले की जांच
मंत्री ने कहा कि एनआईए एल्गार परिषद मामले की जांच कर रही है लेकिन हम भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले की जांच करेंगे और सही दोषियों के खिलाफ केस करेंगे। वहीं, इससे पहले दिसंबर 2019 में शरद पवार ने मामले में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं कि गिरफ्तारी को गलत और प्रतिशोधपूर्ण बताया था और मामले की जांच को एसआईटी से कराने की मांग की थी। महीने भर बीत जाने के बाद भी पवार की मांग पर विचार नहीं किया गया, जिसके बाद एनआईए ने पुणे पुलिस से मामले को अपने हाथ में लेकर जांच शुरू कर दी।

शरद पवार ने जांच पर उठाए सवाल
गुरुवार की मीटिंग में शरद पवार ने जांच की दिशा पर सवाल उठाए। उन्होंने राज्य सरकार को मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया। पवार ने कहा कि वह एक्सपर्ट्स से राय ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें हैरानी है कि तकरीबन हर रोज किसी न किसी को नक्सल बोलकर क्यों गिरफ्तार किया जा रहा है। मुझे लगता है कि यह सही नहीं है। हमने भीमा-कोरेगांव मामले की समीक्षा की है। केंद्र के पास अधिकार है कि वह एनआईए के जरिए मामले की जांच करे लेकिन राज्य सरकार के पास भी कुछ शक्तियां हैं और हम देख रहे हैं कि महाराष्ट्र सरकार इसमें क्या कर सकती है। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह इस मामले को संसद में उठाएंगे।

इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने भीमा-कोरेगांव कमिशन को तीन महीने का एक्सटेंशन दे दिया है। कमीशन का कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो रहा था। लॉकडाउन की वजह से सरकार ने यह फैसला लिया है।

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