Chartered accountants leap from a five-story building out of fear of monkeys; | बंदरों के डर से चार्टेड अकाउंटेंट ने पांच मंजिला इमारत से लगाई छलांग: अस्पताल में इलाज के दौरान हुई मौत

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वाराणसीएक घंटा पहले

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मृतक कंचन कुशवाहा – फाइल फोटो

  • कुछ महीनों पहले गणेश धाम कॉलोनी में एक छात्र को बंदरों ने दौड़ाकर काट लिया था
  • मथुरा से बुलाए गए एक्सपर्ट भी बंदरों के आतंक को खत्म करने में नाकाम साबित हो रहे हैं

उत्तर प्रदेश में वाराणसी के बड़ा गणेश इलाके में गुरुवार देर शाम बंदरों के हमले से बचने के लिए छत से छलांग लगाने से मौत हो गई। बताया जा रहा हैं कि युवा सीए कंचन कुशवाहा छत पर किसी काम से गए थे, तभी बंदरों के झुंड ने उनको घेर लिया। बताया जा रहा है कि बचने के लिए छत से सीढ़ी की ओर भागे लेकिन दर्जनों बंदरों ने रास्ता रोक लिया। जान बचाने के लिए वो बगल के छत पर कूदने की कोशिश में गिर गए और गंभीर रूप से घायल हो गये। परिजनों ने अस्पताल में भर्ती कराया जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। हालांकि पुलिस आत्महत्या के एंगल से भी जांच में जुटी हुई है।

कोतवाली इंस्पेक्टर प्रमोद पांडेय ने बताया कंचन की मौत संदिग्ध लग रही है। पांच मंजिला मकान इनका खुद का है जो पुश्तैनी है। इनके तीन लड़कियां और एक लड़का है। इनके पिता जवाहर शास्त्री मशहूर अधिवक्ता और लेखक रहे हैं। इनका एक मकान महमूर गंज में भी हैं। प्रेक्टिस से साल का 20 लाख से ज्यादा का इनकम था। पिछले कुछ दिनों से ये डिप्रेशन में थे। संभवतः लगता है कि इन्होंने आत्महत्या किया हो,जिसकी जांच की जा रही है।

बंदरों के आतंक से पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं

दो वर्ष पूर्व सिगरा में इनके डर से छत से गिर कर एक मासूम अपनी जान गवां बैठा था।इसी तरह अर्दली बाजार के एक बुजुर्ग के ऊपर भी इन उत्पाती बंदरों ने दीवार गिरा दी थी और वो भी करीब 15 दिन मौत से जंग लड़कर जिंदगी की जंग हार गए थे।

छत में फैले कपड़े फाड़ देना, बच्चों को दौड़ा लेना, छत पर लगे पौधों को तोड़ देना, घर मे घुस कर फ्रिज और किचन से खाना आदि लेकर भाग जाना इन खुराफाती बंदरों की आदत में शुमार है। नगर निगम ने मथुरा से एक टीम बुलाई थी, जिसको 300 रुपए प्रति बन्दर की दर से भुगतान किया गया था और वो अभियान सफल नहीं साबित हुआ था।

बंदरों को नौगढ़ के जंगलों में छोड़ा गया था
बंदरों ने नक्सल क्षेत्र में तैनात PAC के जवानों के कैम्प पे धावा बोल उनका जीना मुहाल कर दिया था । साथ ही आसपास के गांववालों को भी परेशान कर दिया था। हालात यह हो गए थे की चंदौली जिला प्रशासन ने वाराणसी नगर निगम की किसी भी गाडी के चंदौली की सीमा में प्रवेश पर रोक लगा दी थी। और इसके साथ ही यह अभियान धाराशायी हो गया था। तब से इन बंदरों की तादात में बेतहाशा इजाफा हो चूका है ।

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