Delhi: Politics started after railways notice to remove slums from railway area – दिल्‍ली: रेलवे की जमीन पर बनी झुग्गियों को हटाने का नोटिस मिलते ही सियासत शुरू, बयानबाजी तेज

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सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे की जमीन पर बनी 48 हजार झुग्गियों को हटाने का आदेश दिया है (प्रतीकात्‍मक फोटो)

खास बातें

  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, रेलने ने नोटिस चस्‍पा किए
  • इस मामले में पर पार्टियां लगा रही एक-दूसरे पर आरोप
  • झुग्‍गी में रहने वाले को सता रहा उजड़ने का डर

नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने रेलवे की जमीन पर बनी 48 हजार झुग्गियों (slums) को तीन महीने के अंदर हटाने को कहा है. इस आदेश के बाद अब रेलवे ने इन झुग्गीवालों को नोटिस देकर (Railway notice) मकान खाली करने को कहा है, लेकिन नोटिस आते ही अब बीजेपी (BJP) और आम आदमी पार्टी (AAP) एक-दूसरे पर गरीबों को हटाने का इल्जाम लगा रहे हैं वहीं कांग्रेस ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.नोटिस मिलते ही बीजेपी, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस, तीनों ही पार्टियों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है.

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तुगलकाबाद रेल पटरियों के किनारे बनी झुग्गी में चित्रा देवी सालों से रहती आ रही हैं.तीन दिन पहले अचानक एक नोटिस झुग्गी के बाहर चिपका मिला. रेलवे नोटिस मिलने के बाद चित्रा देवी चिंतित हैं. पूरी तरह उजड़ने का अंदेशा इनको परेशान कर रहा है..चित्रा कहती हैं, ‘हम यहां तीस साल से रहते हैं आठ तारीख को ये नोटिस चिपका गए अब कहां जाएंगे.’ चित्रा की की तरह हजरा बेगम भी इस तरह की नोटिस पाने वालों में शामिल है. जहां झुग्गी वहां मकान का सपना संजोए वे अपनी झुग्गी में सूकून से रह रही थी, अब रेलवे की इस नोटिस ने उनकी भी नींद उड़ा रखी है. हजरा बेगम ने बताया, ‘हमें कहा गया था कि जहां आपकी झुग्गी है, वहीं फ्लैट दिया जाएगा. अब इस लॉकडाउन में इतने लोगों को साथ लेकर मैं कहां जाऊं.

तुगलकाबाद के इस इलाके में 300 से ज्यादा अवैध झुग्गियां पटरी के नजदीक बनी हैं. वैसे नोटिस मिलते ही बीजेपी, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस, तीनों ही पार्टियों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है. बीजेपी के नेता सदन रामवीर बिधूड़ी और आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता राघव चढ्ढा के बीच ट्विटर वॉर छिड़ गया है जबकि कांग्रेस के नेता अजय माकन ने दिल्ली सरकार और रेलवे पर गुमराह करने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. माकन कहते हैं, ‘रेल पटरियों के 60 जगहों पर 48000 अवैध झुग्गियां बनी हैं जहां सालों से लोग रहते आए हैं.अब रेल मंत्रालय दिल्ली सरकार के साथ मिलकर इन झुग्गियों को खाली करवाने के लिए रणनीति बना रहा है.नोटिस भी उसी का हिस्सा है.रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव कहते हैं, ‘सोमवार को खुद रेल मंत्री ने बैठक की थी, हम लोग दिल्ली सरकार के साथ बैठक कर रहे हैं. एक रणनीति बना रहे हैं. तीन माह के भीतर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालन करना है.’

गौरतलब है कि दिल्‍ली विधानसभा चुनाव के दौरान तीनों ही प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने झुग्गी के बदले फ्लैट देने का वादा किया था. करीब 16 हजार गरीबों के फ्लैट तैयार भी हैं, लेकिन सालों से उनका आवंटन ही नहीं हो पाया है.एक अनुमान के अनुसार दिल्ली में 40 फीसदी आबादी अनाधिकृत कॉलोनियों में रहती है और इन कालोनियों को वैध करने के नाम पर राजनीति भी जमकर होती है. ऐसे में झुग्‍गी में रहने वाले इन लोगों को पुनर्वास किए बिना हटाना रेलवे के लिए बहुत चुनौती भरा काम है. 

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