Provocative behavior of Chinese troops at LAC showed disregard for bilateral agreements: India tells China – भारत ने कहा- चीनी फौज की उकसावे वाली कार्रवाई द्विपक्षीय समझौतों का अपमान : सूत्र

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विदेश मंत्रालय ने बैठक में चीन से कहा, “चीनी सैनिकों की इतनी बड़े पैमाने पर मौजूदगी 1993 और 1996 के समझौतों के अनुरूप नहीं है. चीन की ओर से इस पर कोई विश्वसनीय स्पष्टीकरण भी नहीं दिया गया है.” भारत ने कहा कि भारतीय जवानों ने सभी समझौतों और प्रोटोकॉल का ईमानदारी से पालन किया है.

सूत्रों के मुताबिक, भारत ने चीन से कहा, “भविष्य में किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए जरूरी है कि जिन जगहों पर गतिरोध बना हुआ है वहां से सैनिकों की वापसी सुनिश्चित की जाए.” भारत ने जोर दिया है कि “मौजूदा स्थिति का तुरंत समाधान दोनों देशों के हित में है.”

बैठक के दौरान, दोनों देशों ने पूर्वी लद्दाख में चल रहे गतिरोध के समाधान के लिए पांच सूत्रीय योजना पर सहमति जताई है. जिसमें सभी मौजूदा समझौतों और प्रोटोकॉल का पालन, शांति बनाए रखना और तनाव बढ़ाने वाली किसी भी कार्रवाई से बचना शामिल है. 

बैठक के बाद विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें कहा गया है कि दोनों पक्षों ने चर्चा के बाद पांच बिंदुओं पर सहमति जताई है. 

इसमें कहा गया है, “दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने माना है कि सीमावर्ती इलाकों में जो मौजूदा स्थिति है वो किसी के भी हित में नही है. दोनों पक्ष इस बात पर सहमत है कि दोनों सेनाओं को बातचीत जारी रखनी चाहिए, उचित दूरी बनाई रखी जानी चाहिए और तनाव को कम करने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए.”

समाचार एजेंसी भाषा की खबर के मुताबिक, प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच बातचीत रात आठ बजे (भारतीय समयानुसार) के कुछ देर बाद शुरू हुई और कम से कम दो घंटे तक चली. बातचीत का एकमात्र लक्ष्य सीमा पर तनाव को कम करना और गतिरोध के स्थल से सैनिकों की वापसी का था. दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है. आशा की जा रही है कि इस बातचीत से करीब चार महीने से जारी गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में कुछ सकारात्मक पहल होगी. 

एक सूत्र ने बताया, ‘‘बातचीत का मुद्दा दोनों देशों की सेनाओं के बीच तनाव को कम करना और सैनिकों को वहां से वापस बुलाना था.” पिछले एक सप्ताह से भी कम वक्त में दोनों देशों के बीच यह दूसरी उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता है. मई की शुरुआत में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शुरू हुए गतिरोध के बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच यह पहली आमने-सामने की मुलाकात थी. 

इससे पहले मास्को में ही शुक्रवार को दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच बातचीत हुई थी. इससे पहले जयशंकर और वांग के बीच फोन पर 17 जून को बात हुई थी. उसके दो दिन पहले ही पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गये थे. इस झड़प में कुछ चीनी सैनिकों की भी मृत्यु हुई थी, लेकिन उन्होंने अपनी संख्या नहीं बतायी है. अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के अनुसार, चीन के 35 सैनिक मारे गए थे. 

जयशंकर-वांग की बातचीत से दो दिन पहले मंगलवार को भारतीय सेना ने कहा था कि चीनी सेना ने एक दिन पहले शाम में पैंगोंग झील क्षेत्र के दक्षिणी तट पर स्थित एक भारतीय चौकी की ओर बढ़ने का प्रयास किया और हवा में गोलियां चलाईं। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर 45 साल के अंतराल में गोली चलने की यह पहली घटना थी. भारतीय सेना का बयान चीनी सेना के उस आरोप के बाद आया था जिसमें कहा गया था भारतीय सैनिकों ने एलएसी पार की और पैंगोंग झील के पास ‘‘गोलीबारी की.” भारतीय सेना ने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था. 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने शाम में डिजिटल मीडिया ब्रीफिंग में भारत की स्थिति को दोहराया कि वह मौजूदा स्थिति का शांतिपूर्ण वार्ता के जरिए हल के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा, “भारत और चीन दोनों ही स्थिति को सुलझाने के लिए राजनयिक और सैन्य चैनलों के माध्यम से नियमित संपर्क में हैं. यह सहमति तब बनी जब दोनों रक्षा मंत्री मिले थे.”

वीडियो: भारत-चीन के विदेश मंत्री मिले

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