The joy seen on children’s faces after giving paper; He said – ‘Paper was simple, even those who could not do coaching could solve the paper; For the first time 12 children were seated in a room instead of 24 | परीक्षार्थियों के चेहरों पर दिखी खुशी; बोले-‘पेपर सरल था कोचिंग न कर पाने वाले भी इसे सॉल्व कर सकते थे; पहली बार एक कमरे में 24 की जगह 12 बच्चे बैठाए गए

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लखनऊ12 मिनट पहले

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लखनऊ में एक परीक्षा केंद्र के बाहर लगी भीड़।

  • बच्चे बोले कोरोना संकट में कोचिंग बंद हो गई थी, आज परीक्षा देने के बाद लगा पढ़ना सार्थक हो गया
  • भिभावक बोले- बसों में भीड़ थी लेकिन बच्चे को पेपर दिलाने के लिए रिस्क लेकर पहुंचना आना पड़ा परीक्षा केंद्र

कोरोना संकट के बीच नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) एग्जाम रविवार पांच बजे समाप्त हो गया। रविवार को 2:00 बजे से 5:00 बजे तक होने वाली परीक्षा में सभी अभ्यर्थियों को अलग-अलग समय पर परीक्षा केंद्र पर पहुंचने के लिए प्रवेश पत्र कर लिखा गया था। परीक्षा केंद्रों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाने के लिए लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग एंट्री गेट बनाए गए। बच्चों ने हाथ में ग्लब्स पहने हुए थे। टेंपरेचर ज्यादा वालों के लिए अलग कक्ष बनाया गया था। इस बार एक कमरे में 24 की जगह 12 बच्चों को एग्जाम में बैठने की व्यवस्था की गई थी।

लखनऊ में 72 परीक्षा केंद्रों पर हुआ एग्जाम

वहीं राजधानी लखनऊ के 72 परीक्षा केंद्रों पर 36,000 परीक्षार्थियों में से 31,584 बच्चों ने (87%) रविवार को परीक्षा दी। कोरोना संक्रमण में परीक्षा देने आए अभ्यार्थियों और अभिभावकों से राजधानी के हजरतगंज के कैथेड्रिल स्कूल और जानकीपुरम के सेंट मैरी इंटर कॉलेज सेंटर से दैनिक भास्कर की रिपोर्ट…..

परीक्षा सेंटर में सभी व्यवस्थाएं ठीक थीं, बिना कोचिंग वालों के लिए पेपर सही था

पिता के साथ परीक्षा देने आए तान्या कहती है कि कोरोना के संकट में परीक्षा कराना ठीक तो था लेकिन हेल्थ इश्यूज पर यह बहुत बड़ा खतरा भी था। अगर परीक्षा सेंटर पर व्यवस्था ना की गई होती तब हेल्थ को लेकर बड़ी समस्या हो सकती थी। लेकिन मेरे परीक्षा सेंटर पर सभी व्यवस्थाएं ठीक थी।तान्या कहती हैं कि मुझे खुद से पढ़ाई करना पड़ा सेल्फ स्टडी की है और जिस तरीके से पेपर आया था मुझे लगता है कि बहुत ही अच्छा पेपर हुआ है। कोचिंग बंद हो गई थी,सपोर्ट नहीं मिल पाया कोचिंग का और घर वालों ने खुद से पढ़ने के लिए के लिए मुझे प्रोत्साहन किया। मैंने पढ़ाई कि मुझे ऐसा लगता है कि मेरा एग्जाम का रिजल्ट अच्छा होगा।

नीट की परीक्षा दिलाने पहुंचे अभिभावक।

नीट की परीक्षा दिलाने पहुंचे अभिभावक।

अच्छा हुआ एग्जाम समाप्त हो गया, घरवालों ने पूरा सपोर्ट दिया
आरुषि कहती है कि एक साल बच गया अच्छा हुआ एग्जाम करा दिया गया। एक महीना लेट हो गया लेकिन कोई बात नहीं और सेंटर पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए बैठाया गया था। मुझे लग रहा था कि परीक्षा करा दी जाएगी इसलिए मैं लगातार पढ़ाई कर रही थी। सुप्रीम कोर्ट में मामला जाने के बाद भी मुझे लगा की परीक्षा जरूर होगी। मैंने सेल्फ स्टडी की है। घरवालों ने मेरा बड़ा सपोर्ट किया है और कई नोट्स पिताजी ने मुझे लाकर दिए जिससे मुझे पढ़ने में बहुत आसानी हुई।

डर था पेपर कठिन न आ जाए,लेकिन बहुत ही ईजी था पेपर था
आकांक्षा गुप्ता बताती है कि डर था पेपर कहीं कठिन न आ जाए लेकिन बहुत ही ईजी था। कोचिंग बंद हो गई थी लेकिन मेरी ऑनलाइन कैसे चल रही थी। पेपर बहुत ही सरल आया था 11th-12th पढ़ाई किया होगा तो वह भी पेपर दे सकता था। कोरोना के सभी प्रोटोकॉल के तहत सेंटर पर अच्छी व्यवस्था की गई थी। मेरे पिताजी डर रहे थे पता नहीं कैसी व्यवस्था होगी लेकिन मेरे प्रवेश पत्र में मिनट 2 मिनट सारे नियम लिखे गए थे जिनका पालन करते हुए मैंने पेपर दिया और मेरा पेपर अच्छा हुआ।

नीट की परीक्षा देने के लिए परीक्षा के केंद्र के बाहर लगी भीड़।

नीट की परीक्षा देने के लिए परीक्षा के केंद्र के बाहर लगी भीड़।

जानकीपुरम सेंट मैरी इंटर कॉलेज- अभिभावक बोले- परीक्षा के लिए रिस्क लेकर आना पड़ा

करनैलगंज गोण्डा निवासी विश्वनाथ ने बताया, कि भतीजी का नीट पेपर का परीक्षा केन्द्र जानकीपुरम् स्थित सेन्ट मैरी इण्टर कॉलेज में पड़ा था। सुबह चार बजे घर निकल रोडवेज बस स्टाप पहुंचे। वहां काफी देर तक इन्तजार करने के बाद बस मिली। बस के अंदर क्षमता से ज्यादा सवारियां बैठी थी। बस चालक सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ा रहा था। इतना ही नही रोडवेज बस से जब पालीटेक्निक चौराहे पर उतरे तो टैम्पो में भी खचाखच सवारी भरी थी। मजबूरन टैम्पो में भतीजी को बैठाकर परीक्षा केन्द्र पर पहुंचे। सरकार ने जो दावा किया था,कि छात्रों के लिए अतिरिक्त रोडवेज बसें और ट्रेन चलाई जायेगी। जिससे नीट परीक्षार्थियों को सुविधा मिलेगी। सुविधा की जगह असुविधा मिली।

गोंडा से अपने बच्चे को परीक्षा दिलाने पहुंचे अभिभावक विश्वनाथ

गोंडा से अपने बच्चे को परीक्षा दिलाने पहुंचे अभिभावक विश्वनाथ

  • गोंडा निवासी छात्रा स्नेहा ने बताया,कि उसका परीक्षा केंद्र सेन्ट मैरी इंटर कॉलेज में पड़ा था। स्नेहा ने बताया,कि कोचिंग बंद होने से घर में पढ़ाई करना पड़ा। पढ़ाई कराने में मेरी माँ का सबसे ज्यादा योगदान रहा।
  • सनौरी गांव लखीमपुर खीरी निवासी शादाब खान ने बताया, कि उनके छोटे भाई अल्ताफ खान का परीक्षा केंद्र सेन्ट मैरी इंटर कॉलेज में था। अल्ताफ विकलांग हैं। इस कारण बस के बजाय मोटरसाइकिल से भाई को परीक्षा दिलाने आना पड़ा।
  • जानकीपुरम स्थित सेन्ट मेरी इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र पर बिलग्राम हरदोई से नीट की परीक्षा देने आई छात्रा पारूल ने बताया,कि वह अपने किसान पिता के साथ चार पहिया वाहन से परीक्षा देने आई हैं। कोरोना संकट काल में कोचिंग बंद थी। इस लिए घर पर पढ़ाई करनी पड़ी। मेरी पढ़ाई की तैयारी में मेरे माता और पिता ने सहयोग किया। थोड़ा कोरोना से डर लग रहा है।

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