शिवसेना का भाजपा और नरेंद्र मोदी पर हमला

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हाइलाइट्स:

  • शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के जरिए बीजेपी पर साधा निशाना
  • शिवसेना ने लिखा कि नौसेना अधिकारी ने सीएम का इस्तीफ मांगा लेकिन सीमा पर 20 जवानों की हत्या पर पीएम और रक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा क्यों नहीं मांगा
  • शिवसेना ने पूछा है कि कंगना को तो सुरक्षा दे दी गई लेकिन हिमाचल की गैंगरेप पीड़िता को सुरक्षा क्यों नहीं दी गई
  • कोरोना के बढ़ते मामलो पर और बढ़ती बेरोजगारी पर सरकार कब बात करेगी

मुंबई
शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के जरिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और अन्य भाजपा शासित सरकारों पर जमकर निशाना साधा है। महाराष्ट्र में शिवसेना फ़िलहाल फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत और मुंबई में शिवसैनिकों द्वारा रिटायर्ड नौसेना अधिकारी के साथ मारपीट मामले पर बैकफुट पर चल रही है। वहीं केंद्र द्वारा कंगना को वाई प्लस सुरक्षा देने से शिवसेना खासी नाराज भी है। रविवार को महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने भी अपने संबोधन कंगना पर कुछ भी खुलकर नहीं बोला था। इन्ही सब मुद्दों को लेकर शिवसेना ने सामना पर हमला किया है।

बढ़ती बेरोजगारी पर चर्चा होगी क्या
शिसवेना ने सामना के जरिए देश की समस्या पर सवाल उठाए हैं और पूछा है कि देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या ५० लाख के पार पहुंच गई है। अब तक ८० हजार मौतें हो चुकी हैं। राज्यों में कोरोना का कहर तमाम प्रयासों के बावजूद खत्म नहीं हो रहा है। ऐसे पार्श्वभूमि में संसद का अधिवेशन शुरू हो रहा है। लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर चिंता का ‘चीनी’ पारा रोज बढ़ रहा है। कश्मीर में अब पाकिस्तानी सरेआम गुप्त सर्जिकल स्ट्राइक करने लगे हैं। अर्थव्यवस्था के बारह बजे ही हैं तो लॉकडाउन, नोट बंदी के कारण करोड़ों लोग बेरोजगार हो गए हैं। इस पर संसद के दोनों सदनों में गंभीरतापूर्वक चर्चा होनेवाली है क्या? रोजी-रोटी, आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि विषयों पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा होनी चाहिए लेकिन देश की सुरक्षा के, लोगों की रोजी-रोटी के मुद्दों को हाशिए पर धकेलने के लिए अन्य व्यर्थ मुद्दों को कुरेदकर निकाला जा रहा है। यह जनता से दगाबाजी ही है। चीन की समस्या पर से ध्यान भटकाने के लिए प्रयास हो रहे हैं। महंगाई, बेरोजगारी मानो समस्या ही नहीं है, बल्कि गली-कूचे की समस्या ही आज राष्ट्रीय समस्या बन गई है। ऐसा माहौल सरकारी पार्टी की साइबर फौज तैयार कर रही है। अब उन्होंने इस महान राष्ट्रीय कार्य को आगे बढ़ाने के लिए मुंबई का चुनाव जानबूझकर किया है। मुंबई में मदन शर्मा नामक एक सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी पर संतप्त शिवसैनिकों ने हमला किया, इसका समर्थन कोई नहीं करेगा, इसका निषेध ही होना चाहिए लेकिन यह जो कोई सेवानिवृत्त अधिकारी महोदय हैं, उन्होंने राज्य की जनता द्वारा नियुक्त मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के संदर्भ में आपत्तिजनक व्यंग्य चित्र सोशल मीडिया पर साझा करके क्या हासिल किया? संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का सम्मान करो, ऐसा इन महोदय को नौसेना में रहते कोई सिखाया नहीं था क्या?

नौसेना अधिकारी ने पीएम का स्तीफा क्यों नहीं मांगा
शिवसेना ने सामना में लिखा है कि चीन की सीमा पर २० जवान शहीद हुए। उनकी हत्या का बदला अभी तक नहीं लिया गया। चीन की मुंहजोरी जारी है। यह जो पूर्व नौसेना अधिकारी हैं उन पर हुए हमले के विरोध में भाजपा ने सड़क पर उतरकर आंदोलन किया। अब इस पूर्व नौसेना अधिकारी ने मुख्यमंत्री ठाकरे के इस्तीफे की मांग की है। लेकिन अपने सैन्य पेशे के अनुरूप उन्हें २० सैनिकों की हत्या के जिम्मेदार राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री से इस्तीफे की मांग करनी चाहिए थी। मध्य प्रदेश मुरैना जिले में सत्ताधारी भाजपा नेता की गोली से एक जवान गंभीर रूप से जख्मी होने की खबर आई। ये खबर कल की ही है। इससे पहले जलगांव में भाजपा के सांसद उन्मेष पाटील ने सीमा सुरक्षा बल के जवान सोनू महाजन का घर खाली कराने के लिए आतंक मचा दिया। सांसद पाटिल के कार्यकर्ताओं ने सोनू पर तलवार से हमला किया। आज नौसैना अधिकारी के लिए सड़क पर उतरनेवाली भाजपा के लोग उस समय सोनू महाजन नामक पूर्व सैनिक के पक्ष में सड़क पर क्यों नहीं उतरे? उत्तर प्रदेश-बिहार जैसे राज्यों में भी अब तक पूर्व सैनिकों पर कितने हमले हुए हैं? इसकी एक बार जांच कर ही लो। जिस अखलाक की हत्या गौमांस प्रकरण में हुई उसका भी बेटा सेना में सेवा प्रदान कर रहा है। ६४ वर्षीय सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी कैप्टन अमानुल्लाह और उनकी पत्नी की घर में घुसकर भीड़ ने हत्या कर दी। उसमें कै. अमानुल्लाह मारे गए थे। यह घटना भाजपा शासित योगी राज में हाल ही में हुई और इसे लेकर प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री साहब ने सेवानिवृत्त कैप्टन की पत्नी को फोन करके चर्चा आदि की, ऐसा कभी पढ़ने को नहीं मिला।

पालघर मामले पर बवाल लेकिन कर्नाटक पर चुप्पी
शिवसेना ने आरोप लगाया है कि विगत २४ घंटों में कर्नाटक में तीन पुजारियों की पत्थर से कूंचकर हत्या कर दी गई तो उत्तर प्रदेश के मंदिर में जा रहे पुजारी की चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई। पालघर की दुर्भाग्यपूर्ण घटना में राजनीतिक निवेश करनेवाले और उनके मीडिया के ‘सहयोगी’ इन दोनों साधुओं की हत्या के मामले में चुप हैं। भाजपा के लोग सड़क पर उतरकर इन घटनाओं का निषेध करते हुए गलती से भी नहीं दिखे क्योंकि यह सब व्यर्थ कारोबार उन्होने सिर्फ महाराष्ट्र के लिए ही सुरक्षित रखा है।

हिमाचल की गैंगरेप पीड़िता को न्याय नहीं मिला
सामना ने लिए है कि एक अभिनेत्री ने मुंबई का, मुंबई पुलिस का अपमान किया इसलिए नाराजगी व्यक्त की गई। उसे धमकी मानकर उसे ‘वाई प्लस’ ऐसी जबरदस्त सुरक्षा व्यवस्था हिमाचल व केंद्र सरकार ने दी। लेकिन हिमाचल के कांगड़ा क्षेत्र में एक विवाहित महिला से ७ लोगों ने सामूहिक बलात्कार किया, उसके बाद उसे जान से मारने की धमकी दी। इसलिए दहशत में आकर जीनेवाली उस अबला को ‘जेड’ सुरक्षा वहां की मुख्यमंत्री, देश के गृह मंत्री को देनी ही चाहिए थी। ऐसा क्यों नहीं हुआ?

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