दिल्ली हिंसा: पूर्व डीजीपी बोले, देशभक्तों को फंसा, नफरती भाषण देने वाले भाजपा नेताओं को छोड़ रही पुलिस

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नई दिल्ली। रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी जूलियो फ्रांसिस रिबेरो ने दिल्ली दंगों में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दिल्ली पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव को एक पत्र लिखकर सांप्रदायिक दंगों में जांच की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। रिबेरो मुंबई पुलिस कमिश्नर, गुजरात और पंजाब के डीजीपी और रोमानिया में भारतीय राजदूत भी रह चुके हैं।

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दिल्ली सांप्रदायिक दंगा मामले में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा और उत्तर-पूर्व जिला पुलिस ने 100 से अधिक चार्जशीट दाखिल की हैं और करीब 1400 लोगों को गिरफ्तार किया है। पत्र में पूर्व आईपीएस अधिकारी ने कहा, ‘दिल्ली पुलिस ‘शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों’ के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, जबकि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी कर रही है, जिन्होंने हिंसा के लिए भड़काऊ और सार्वजनिक तौर पर सांप्रदायिक भाषण दिए। सच्चे देशभक्त आपराधिक मामलों में फंस रहे हैं। पत्र में उन्होंने आगे कहा, ‘मैंने आपको भारी मन से लिखा है। एक सच्चे देशभक्त और भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व स्वाभिमानी सदस्य के रूप में, मैं आपसे अपील करता हूं कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज 753 एफआईआर में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें।

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दिल्ली पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। मगर जानबूझकर उन लोगों के खिलाफ संज्ञेय अपराधों को दर्ज करने में विफल रही जिन्होंने नफरत फैलाने वाले भाषण दिए थे, जिनसे उत्तर-पूर्व दिल्ली में दंगे भड़क गए। उन्होंने आगे लिखा कि ये मेरे जैसों को परेशान करने वाला है कि भाजपा नेता कपिल मिश्रा, अनुराग, ठाकुर और प्रवेश वर्मा जैसों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, जबकि धर्म के आधार पर भेदभाव का विरोध करने वाली महिलाओं को अपमानित किया गया और महीनों तक जेल में रखा गया।

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