कांग्रेस-एनसीपी के रुख ने बीएमसी में बढ़ाई शिवसेना की मुश्किलें

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बृजेश त्रिपाठी, मुंबई
बीजेपी की ओर से भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर मेयर किशोरी पेडणेकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया गया है। अविश्वास प्रस्ताव का क्या होगा यह कांग्रेस-एनसीपी के रुख पर तय होगा। राज्य की सत्ता में साझेदार कांग्रेस और एनसीपी के रुख से बीएमसी में शिवसेना की मुश्किल बढ़ गई है। कांग्रेस- एनसीपी दोनों दलों के नेताओं का कहना है कि अविश्वास प्रस्ताव के दौरान पार्टी का क्या रुख होगा, इस पर पक्ष के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद तय किया जाएगा। लेकिन बीएमसी में शिवसेना की मनमानी से दोनों दलों के नगरसेवकों में नाराजगी है। इसलिए अविश्वास प्रस्ताव के दौरान दोनों दल क्या स्टैंड लेंगे, इस पर पत्ता नहीं खोल रहे हैं।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि राज्य की सत्ता में हम भले ही शामिल हैं, लेकिन बीएमसी में अब भी हम विपक्ष में हैं। नेता विपक्ष का पद कांग्रेस के पास है। ढाई दशक से बीएमसी की सत्ता पर काबिज शिवसेना पहले भी मनमानी करती थी, अब भी वही कर रही है, उसके रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। जबकि राज्य की सत्ता में हम साझीदार हैं। राज्य में मिली-जुली सरकार बनने के बाद शिवसेना को बीएमसी में कांग्रेस-एनसीपी के नगरसेवकों को भी तवज्जो देनी चाहिए थी, लेकिन शिवसेना ने ऐसा नहीं किया। अब बीजेपी ने मेयर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया है, तब उन्हें हमारी याद आई है।

दोनों दलों के नगरसेवक शिवसेना के बर्ताव से नाराज
हमारे नगरसेवकों ने हमेशा शिवसेना से कहा कि जो भी फैसले लिए जाएं, उसमें हमारी भी सहमति ली जाए, हमें भी शामिल किया जाए। लेकिन शिवसेना ने इस पर कभी ध्यान नहीं दिया और मनमानी तरीके से फैसले करते रहे। कोरोना संकट के दौरान भी कांग्रेस- एनसीपी नगरसेवकों ने लगातार मेयर, स्टैंडिंग कमिटी अध्यक्ष और बीएमसी कमिश्नर से कहा कि कोई भी फैसला लेते समय हमें भी विश्वास में लें, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आज यह स्थिति है कि दोनों दलों के नगरसेवक शिवसेना के बर्ताव से नाराज हैं। अविश्वास प्रस्ताव को लेकर वह कह रहे हैं कि इस संबंध में वे अपनी- अपनी पार्टी नेताओं के सामने बात रखेंगे, उसके बाद निर्णय लिया जाएगा कि क्या करना है।

बीजेपी ने भी कांग्रेस-एनसीपी नेताओं से अविश्वास प्रस्ताव को लेकर संपर्क साधा
सूत्रों के मुताबिक बीजेपी ने भी कांग्रेस-एनसीपी नेताओं से अविश्वास प्रस्ताव को लेकर संपर्क साधा है, जो शिवसेना के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर है। जानकारों का कहना है कि बीएमसी में यदि शिवसेना को सत्ता बचानी है, तो हरहाल में कांग्रेस- एनसीपी के सहयोग की जरूरत होगी। चाहे वह प्रत्यक्ष हो या अप्रत्यक्ष रूप से हो। 227 सदस्यीय बीएमसी में सत्ता का समीकरण कांग्रेस के रुख पर तय होगा। एनसीपी और सपा की भी भूमिका महत्वपूर्ण होगी। इस संबंध में सपा का रुख जानने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हुआ।

28 सितंबर को महासभा की बैठक
सूत्रों के मुताबिक, बीएमसी ने 28, 29 और 30 सितंबर को महासभा की बैठक बुलाई है। इस संबंध में नगरसेवकों को सूचना दी जा चुकी है। बीजेपी के एक नगरसेवक ने बताया कि इसी दौरान अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना है।

बीएमसी में आंकड़ों का खेल
कुल नगरसेवक- 227
शिवसेना- 97
बीजेपी- 82
कांग्रेस- 29
एनसीपी- 8
एसपी- 6
मनसे- 1
एमआईएम- 2
दो नगरसेवकों का मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

अविश्वास प्रस्ताव पर पार्टी हाईकमान से बात करेंगे: नेता विपक्ष
रवि राजा, नेता विपक्ष, बीएमसी ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पर पार्टी हाईकमान से बात करेंगे। हर मुद्दे पर हम अपनी बात रखेंगे। पार्टी जो भी निर्णय लेगी हम उसके साथ रहेंगे। उधर, राखी जाधव, एनसीपी, गुट नेता बीएमसी ने कहा कि इस संबंध में हम पार्टी नेताओं के सामने अपना रुख रखेंगे। पार्टी नेतृत्व जो आदेश देगा उसी पर हम आगे बढ़ेंगे।

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