Yogi Adityanath | Akhara Parishad Comes Out In Support Up Cm Yogi Adityanath After Agra’s Mughal Museum Renamed As Chhatrapati Shivaji Maharaj | आगरा के इतिहासकार ने 5 साल पहले नामकरण पर दर्ज कराई थी आपत्ति; अब योगी के समर्थन में अखाड़ा परिषद भी उतरा

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आगरा14 मिनट पहले

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साल में 2015 में स्वीकृत मुगल म्यूजियम प्रोजेक्ट अभी कुछ कदम भी नही बढ़ पाया है। सपा सरकार में कुछ निर्माण शुरू भी हुआ रहा लेकिन योगी सरकार में यह अभी मौके पर बन्द पड़ा हुआ है।

  • आगरा के इतिहासकारों ने सीएम के निर्णय पर जताई खुशी, बोले- मुगलों ने सिर्फ अत्याचार किया
  • सपा शासनकाल में 2015 में मुगल म्यूजियम बनने का हुआ था ऐलान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को आगरा में बनने वाले मुगल म्यूजियम को छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम से जाना जाएगा। नए उत्तर प्रदेश में गुलामी की मानसिकता के प्रतीक चिन्हों का कोई स्थान नहीं है। हम सबके नायक शिवाजी महाराज हैं। लेकिन इस निर्णय के बाद सोशल मीडिया पर एक वर्ग सरकार को निशाने पर ले रहा है तो वहीं, अखाड़ा परिषद जैसे संगठन समर्थन में उतर आए हैं।

महंत नरेंद्र गिरी ने कहा- बलिदानियों के नाम रखा जाए इमारतों का नाम

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि मुगलों ने देश में आतंकवाद फैलाया। हमारे आदर्श मुगल नहीं हो सकते हैं। योगी के फैसले पर संत समाज साथ खड़ा है। उन्होंने एक कदम आगे बढ़ते हुए कहा कि जो इमारतें मुगलों के नाम पर हैं उन्हें देश के बलिदानियों के नाम पर रखा जाए।

इतिहासकार राज किशोर राजे।

इतिहासकार राज किशोर राजे।

साल 2015 में इतिहासकार ने नामकरण पर जताई थी आपत्ति

कुछ भी हो, लेकिन 151 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले आगरा के मुगल म्यूजियम के नाम को बदलने की मांग सपा सरकार में इसकी नींव पड़ने के साथ ही शुरू हुई थी। आगरा के इतिहासकार राज किशोर शर्मा राजे ने 28 मई 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर म्यूजियम के नामकरण पर आपत्ति दर्ज कराई थी। कहा था कि आगरा को मुगलों ने नहीं बसाया था, बल्कि इसके होने के प्रमाण त्रेता युग से मिल रहे थे। उन्होंने म्यूजियम का नाम अग्रवन करने की भी अपील की थी। इसके बाद 17 जून 2019 को भी एक लेटर लिखा था।

सोशल मीडिया पर कुछ यूं चल रहा विरोध

त्रेतायुग से आगरा के होने का प्रमाण

दरअसल, इतिहासकार राज किशोर आगरा के इतिहास के बारें में कई किताबें लिख चुके हैं। उन्होंने फतेहपुर सीकरी के म्यूजियम के भीतर अकबर के दरबार के नवरत्नों की मूर्तियां लगने पर नवरत्नों के न होने की बात प्रमाणित की थी। इसके साथ ही राजे का कहना है कि महर्षि जमदग्नि व उनके पुत्र भगवान परशुराम के रुनकता के आश्रम और कैलाश मंदिर की स्थापना का इतिहास है। जो त्रेता युग मे भी आगरा के होने को प्रमाणित करता है। इसका मतलब है कि मुगलों ने आगरा को नहीं बसाया था और मुगलों ने भारत मे योगदान न देकर सिर्फ अत्याचार ही किया है।

छत्रपति साहूजी महाराज।

छत्रपति साहूजी महाराज।

आगरा से ऐसा है शिवाजी महाराज का रिश्ता

इतिहासकार बताते है कि छत्रपति शिवाजी 16 मार्च, 1666 को अपने बड़े पुत्र संभाजी के साथ आगरा आए थे। तब मुगल बादशाह औरंगजेब ने उन्हें कैद कर लिया था। बाद में लगभग 5 महीने बाद 13 अगस्त, 1666 को वे फल की एक टोकरी में बैठकर गायब हो गए। औरंगजेब हाथ मलता रह गया। यही नहीं बताया जाता है फरारी के दौरान शिवाजी आगरा में कई स्थानों पर भी रुके। उन्हीं यादों को संजोने के लिए मुगल म्यूजियम में छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ी जानकारियां भी रखी जाएंगी।

पूर्व में इतिहासकार द्वारा लिखा गया लेटर।

पूर्व में इतिहासकार द्वारा लिखा गया लेटर।

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