कंगना बोलीं- जयाजी, आप और आपकी इंडस्ट्री ने कोई थाली नहीं दी, 2 मिनट के रोल वाली थाली भी हीरो के साथ सोने पर मिलती थी; अब बिग बी के घर की सुरक्षा बढ़ी

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jaya and kanagna
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फिल्म इंडस्ट्री में सुशांत सिंह मामले से शुरू हुआ विवाद संसद तक पहुंच चुका है। और, बात बॉलीवुड की थाली में छेद की हो रही है। सपा सांसद जया बच्चन ने राज्यसभा में थाली में छेद वाला बयान दिया था। इस पर कंगना रनोट ने बुधवार को भी जवाब दिया। कंगना ने ट्वीट किया- कौन सी थाली दी है जयाजी और उनकी इंडस्ट्री ने? मैंने इस इंडस्ट्री को फेमिनिज्म सिखाया। थाली देश भक्ति नारी प्रधान फिल्मों से सजाई। यह मेरी अपनी थाली है जयाजी आपकी नहीं।

जया के बयान पर विवाद बढ़ने के बाद महाराष्ट्र की उद्धव सरकार ने मुंबई में अमिताभ बच्चन के बंगले की सुरक्षा बढ़ा दी है।

बॉलीवुड की थाली में छेद पर क्यों उठ रहा सवाल?

1. दरअसल, विवाद सोमवार को मानसून सत्र के साथ ही शुरू हुआ। भाजपा सांसद रवि किशन ने 14 सितंबर को कहा कि पाकिस्तान और चीन से ड्रग्स की तस्करी हो रही है। यह देश की युवा पीढ़ी को बर्बाद करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि हमारे फिल्म उद्योग में इसकी पैठ हो चुकी है और एनसीबी इसकी जांच कर रही है। मेरी मांग है कि इस मामले में सख्त कार्रवाई की जाए।

2. अगले ही दिन मंगलवार को संसद में सपा सांसद जया बच्चन ने कहा- कुछ लोगों की वजह से आप पूरे इंडस्ट्री की छवि को धूमिल नहीं कर सकते। मुझे शर्म आती है कि कल लोकसभा में हमारे एक सदस्य, जो फिल्म उद्योग से हैं, उन्होंने इसके खिलाफ बोला। यह शर्मनाक है। आप जिस थाली में खाते हैं उसमें छेद नहीं कर सकते हैं।

3. जया के बयान पर कंगना ने मंगलवार और बुधवार दोनों दिन जवाब दिया। मंगलवार को कंगना ने कहा था- जया जी क्या ये बात आप तब कह पातीं, जब मेरी जगह आपकी बेटी श्वेता को पीटा जाता, ड्रग्स दी जाती और युवावस्था में शोषण होता। क्या ये बात आप तब कह पातीं, यदि अभिषेक ने लगातार हैरेसमेंट की बात की होती और आप उन्हें एक दिन लटका पातीं। हमारे साथ सहानुभूति रखिए।

4. बुधवार को ही रविकिशन ने कहा- जिस थाली में जहर हो, उसमें छेद करना ही पड़ेगा। जयाजी के जमाने में केमिकल जहर नहीं था, अब इंडस्ट्री को इससे बचाना होगा।

कंगना ने कहा, शो बिजनेस हमेशा से जहरीला रहा है

कंगना ने बुधवार को कहा, ‘शो बिजनेस हमेशा से जहरीला रहा है। लाइट और कैमरे की इस दुनिया में लोग भरोसा करने लगते हैं और इसी में जीने लगते हैं। लोग एक वैकल्पिक सच्चाई पर विश्वास करने लगते हैं और अपने चारों ओर एक घेरा बना लेते हैं। इस भ्रम से बाहर निकलने के लिए मजबूत आध्यात्मिक शक्ति की जरूरत पड़ती है।’

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संविधान का कर्तव्य है कि वह क्रांतिकारी आवाज को सुरक्षा दे। यहां इस मामले में आप लोकतंत्र में दो चीजें देखते हैं, 1- बचाने वाला, 2- जिसे बचाया गया। लोग दोनों ही नहीं बन पाते। ऐसा कुछ बनें, जो देश के लिए मायने रखता हो।

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