Police screws on Bahubali MLA Mukhtar Ansari, reward of 25-25 thousand rupees declared on both sons | बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी पर पुलिस का शिकंजा, दोनों बेटों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित

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लखनऊ4 मिनट पहले

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यूपी सरकार ने बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के दोनों बेटों के खिलाफ 25-25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है।

  • डालीबाग में हुए अवैध निर्माण के मामले में दर्ज किया गया था हजरतगंज में केस
  • बाद में प्रशासन की ओर से कार्रवाई करते हुए दो टॉवरों को धवस्त कर दिया गया था

पंजाब के रोपड़ जेल में बंद यूपी के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी व उनके दोनों बेटों के खिलाफ लखनऊ पुलिस ने भी शिकंजा कस दिया है। जेल में बंद मुख्तार मुख्तार का बी वारंट कराने के साथ पुलिस ने दोनों बेटों अब्बास और उमर पर 25-25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है। वहीं इनाम घोषित होने के बाद दोनों की जल्द गिरफ्तारी की संभावनाएं जताई जा रही हैं। वहीं लखनऊ पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडे के अनुसार वारंट बाय नाम की कार्रवाई सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण के मुकदमे में की गई है। गैर जमानती वारंट के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया गया है।

एलडीए ने बीते 27 अगस्त को बाय थे दो टावर
हजरतगंज की डालीबाग कॉलोनी में निष्क्रान्त जमीन पर कब्जा करके दो टावर का निर्माण कराने के मामले में 27 अगस्त को हजरतगंज में दर्ज की गई थी। एलडीए ने दोनों टावर 27 अगस्त को जमीदोंज कर दिए थे। इस मामले में जियामऊ के लेखपाल सुरजन लाल ने तीनों के खिलाफ हजरतगंज कोतवाली में केस दर्ज कराया था। हजरतगंज की एसीपी राकेश मिश्रा का कहना है कि मुख्तार का विवरण तैयार है कोर्ट के आदेश अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अब्बास के पास से मिले थे विदेशी असलहे

मुख्तार अंसारी का बड़ा बेटा अब्बास नेशनल शूटर है। उसके खिलाफ 12 अक्टूबर 2009 को महानगर कोतवाली में शस्त्र लाइसेंस के मामले में धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसकी जांच एसटीएफ ने की थी। लखनऊ पुलिस की एक टीम ने दिल्ली के वसंत कुंज स्थित किराए के मकान पर छापेमारी करके ऑस्ट्रेलिया मेड असलहे बरामद किये थे। अब्बास पर आरोप है कि उसने लखनऊ डीएम की अनुमति के बगैर अपना शस्त्र लाइसेंस दिल्ली के पेपर पर ट्रांसफर करा लिया और वहां पांच असलहे और खरीद लिए थे।

बी वारंट क्या है, कब जारी किया जाता है?

हाईकोर्ट के अधिवक्ता सौरभ तिवारी का कहना है यह न्यायालय जिस व्यक्ति को हाजिर करवाना चाहता है, उसके लिए बी वारंट जारी कर सकता है। फिलहाल इसका कोई भी सेक्शन सीआरपीसी में नहीं है इसको जारी का अधिकार न्यायालय के पास होता है।

न्यायालय उस व्यक्ति को सम्मन जारी करता है, जिसे सम्मन के माध्यम से न्यायालय में हाजिर करवाने का प्रयास किया जाता है। लेकिन यदि व्यक्ति सम्मन से बच रहा है और सम्मन तामील होने के उपरांत भी न्यायालय के समक्ष हाजिर नहीं होता है और न्याय में बाधा बनता है तो ऐसी परिस्थिति में न्यायालय को गिरफ्तार करके अपने समक्ष पेश किए जाने का वारंट जारी करता है।

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