भारत-चीन विवाद पर संसद में बोले राजनाथ सिंह, कहा-दुनिया की कोई ताकत भारतीय सेना को पेट्रोलिंग से नहीं रोक सकती

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नई दिल्ली। India-china standoff:भारत और चीन के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर तनाव के मुद्दे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh)ने गुरुवार को राज्‍यसभा में बयान दिया.. उन्‍होंने जोर देकर कहा कि दुनिया की कोई ताकत भारतीय सेना को पेट्रोलिंग से नहीं रोक सकती. उन्‍होंने साफ किया कि यथास्थिति में बदलाव की चीन की कोशिश में किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है.

रक्षा मंत्री के संबोधन की 10 खास बातें..

  1. स्वतंत्र भारत में भारत की सेनाओं ने देश की सुरक्षा के लिए अपना सर्वोच्च न्योछावर करने में कभी कोई कोताही नहीं बरती है. आप सबको ज्ञात है कि 15 जून 2020 को गलवान घाटी में कर्नल संतोष बाबू के साथ हमारे 19 और बहादुर जवानों ने माँ भारत की सीमा की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहूति दे दी. हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लद्दाख जाकर वीर जवानों का हौसला बढ़ाया है. मैंने भी बहादुर जवानों से मिलकर उनके शौर्य और अटूट साहस का अनुभव किया है. सदन से मैं अनुरोध करता हूँ कि गलवान में शहीद 20 जवानों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की जाए.
  2. चीन के साथ हमारे सीमा मुद्दे के बारे में बताना चाहता हूं. सदन इस बात से अवगत है कि भारत एवं चीन का सीमा का प्रश्न अभी तक  अनसुलझा है. भारत और चीन की सीमा का customary और traditional alignment, चीन नहीं मानता है. यह सीमा-रेखा, well-established भौगोलिक सिद्धांतों पर आधारित है, जिसकी पुष्टि न केवल treaties और agreements द्वारा, बल्कि historic usage और practices द्वारा भी हुई है. दूसरी ओर चीन यह मानता है कि सीमा अभी भी औपचारिक रूप से निर्धारित नहीं है. दोनों देश, 1950 एवं 1960 के दशक में इस पर बातचीत कर रहे थे, परन्तु इस पर पारस्परिक रुप से स्वीकार्य समाधान नहीं निकल पाया.
  3. चीन लद्दाख में भारत की लगभग 38,000 वर्ग किमी जमीन कब्जा किए हुए है. इसके अलावा, 1963 में एक तथाकथित Boundary-Agreement के तहत, पाकिस्तान ने PoK की 5180 वर्ग किमी भारतीय जमीन, अवैध रूप से चीन को सौंप दी है. China, अरुणाचल प्रदेश की सीमा से लगे हुए लगभग 90,000 square km भारतीय क्षेत्र को भी अपना बताता है. भारत तथा China, दोनों का मानना है कि सीमा का प्रश्न, एक जटिल मुद्दा है. इस मुद्दे का समाधान, शांतिपूर्ण बातचीत से निकाला जाए. अभी तक भारत-चीन के सीमा क्षेत्र में commonly delineated Line of Actual Control (LAC) नहीं है और LAC को लेकर दोनों का perception अलग-अलग है. इसलिए peace और tranquillity बहाल रखने के लिए दोनों देशों के बीच कई तरह के agreements और protocols हैं.
  4.  दोनों देशों ने यह माना है, कि LAC पर शांति और स्थिरता बहाल रखी जाएगी, जिसपर LAC की अपनी-अपनी respective positions और boundary question का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. इस आधार पर वर्ष 1988 के बाद से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में काफी विकास हुआ है लेकिन LAC पर peace और tranquillity में किसी भी प्रकार की गंभीर स्थिति का दोनों देशों के आपसी संबंधों पर निश्चित रूप से असर पड़ेगा.
  5. वर्ष 1993 एवं 1996 के समझौते में इस बात का जिक्र है कि LAC के पास दोनों देश अपनी सेनाओं की संख्या कम से कम रखेंगे. समझौते में यह भी है, कि जब तक सीमा मसले का पूर्ण समाधान नहीं होता है, तब तक LAC का आदर और अनुपालन किया जाएगा तथा उसका उल्लंघन नहीं किया जाएगा. इन समझौतों में भारत व चीन, LAC के clarification द्वारा एक आम सहमति पर पहुँचने के लिए भी प्रतिबद्ध हुए थे. इसके आधार पर 1990 से 2003 तक दोनों देशों द्वारा LAC पर एक common understanding बनाने की कोशिश की गई लेकिन इसके बाद China ने इस कार्यवाही को आगे बढ़ाने पर सहमति नहीं जताई.
  6. अप्रैल माह से पूर्वी की  सीमा पर चीन की सेनाओं की संख्या तथा उनके armaments में वृद्धि देखी गई. मई महीने के प्रारंभ में, चीन ने गलवान घाटी क्षेत्र में हमारी बलों के सामान्‍य पैट्रालिंग पैटर्न में व्यवधान शुरू किया, जिसके कारण face-off की स्थिति उत्पन्न हुई. Ground Commanders `द्वारा इस समस्या को सुलझाने के लिए, विभिन्न समझौतों तथा protocol के तहत वार्ता की जा रही थी, कि इसी बीच मई महीने के मध्य में China द्वारा, western sector में कई स्थानों पर LAC पर transgression करने की कोशिश की गई. इनमें Kongka La, Gogra और Pangong Lake का North Bank शामिल है. इन कोशिशों को हमारी सेनाओं ने समय पर देख लिया तथा उसके लिए आवश्यक जवाबी कार्यवाही की. हमने China को डिप्‍लो‍मेटिक तथा मिलिट्री चैनल्‍स के माध्यम से यह अवगत करा दिया कि इस प्रकार की गतिविधियां, यथास्थिति को एकतरफा बदलने का प्रयास हैं. यह भी साफ कर दिया गया कि ये प्रयास हमें किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है.
  7. एलएसी के ऊपर टकराव बढ़ता हुआ देख कर दोनों तरफ के सैन्य कमांडरों ने 6 जून 2020 को मीटिंग की, तथा इस बात पर सहमति बनी कि reciprocal actions के द्वारा disengagement किया जाए. दोनो पक्ष इस बात पर भी सहमत हुए कि LAC को माना जाएगा तथा कोई ऐसी कार्रवाई नहीं की जाएगी, जिससे यथास्थिति बदले. किन्तु इस सहमति के उल्लंघन में चीन द्वारा एक हिंसक संघर्ष की स्थिति 15 जून को गलवान में create की गई. हमारे बहादुर सिपाहियों ने अपनी जान का बलिदान दिया, पर साथ ही चीनी पक्ष को भी भारी क्षति पहुँचाई, और अपनी सीमा की सुरक्षा में कामयाब रहे.
  8. चीन की कार्रवाई से हमारे विभिन्न द्विपक्षीय समझौतों के प्रति उसका disregard दिखता है. चीन द्वारा troops की भारी मात्रा में तैनाती किया जाना 1993 और 1996 के समझौतों का उल्लंघन है. LAC का सम्मान करना और उसका कड़ाई से पालन किया जाना, सीमा क्षेत्रों में शांति और सद्भाव का आधार है, और इसे 1993 एवं 1996 के समझौतों में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है.  जबकि हमारी armed forces इसका पूरी तरह पालन करती हैं, Chinese side की ओर से ऐसा नहीं हुआ है.
  9. अभी की स्थिति के अनुसार चीनी पक्ष ने LAC और अपने अंदरूनी क्षेत्रों में, बड़ी संख्या में सैनिक टुकड़ियां और गोलाबारूद mobilize किआ हुआ है.  पूर्वी लद्दाख और Gogra, Kongka La और Pangong Lake का North और South Banks पर कई friction areas हैं. चीन की कार्रवाई के जवाब में हमारी armed forces ने भी इन क्षेत्रों में उपयुक्त counter deployments किए हैं ताकि भारत की सीमा पूरी तरह सुरक्षित रहे.
  10. सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से देशवासियों को यह विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि हमारे Armed Forces के जवानों का जोश एवं हौसला बुलंद है, और हमारे जवान किसी भी संकट का सामना करने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ हैं. हम लद्दाख में एक चुनौती के दौर से गुजर रहे हैं, लेकिन साथ ही मुझे पूरा भरोसा है कि हमारा देश और हमारे वीर जवान इस चुनौती पर खरे उतरेंगे. मैं इस सदन से अनुरोध करता हूँ कि हम एक ध्वनि से अपनी सेनाओं की बहादुरी और उनके अदम्य साहस के प्रति सम्मान प्रदर्शित करें.

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