लखनऊ: सब्जियों के भाव में लगी आग तो CM योगी आदित्यनाथ ने कसे अफसरों के पेंच

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आपको याद नहीं होगा कि आपने कब इतना महंगा आलू खरीदा होगा. आलू ने पिछले एक डेढ़ महीने से रफ्तार पकड़ी है. आज आलू 40 रुपए किलो बिक रहा है.

लखनऊ. सब्जियों के भाव (Vegetable Price) कुछ इस तरह चढ़ रहे हैं कि इससे खिन्न होकर सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) को बोलना पड़ गया. उन्हें अफसरों को निर्देश देने पड़े कि जमाखोरी की वजह से ऐसा न होने पाये. उन्हें याद है कि इन्हीं कीमतों ने एक बार अटल बिहारी बाजपेयी सरकार की नींद उड़ा दी थी. इसीलिए आनन-फानन में केन्द्र सरकार ने प्याज के निर्यात को रोका तो सीएम योगी आदित्यनाथ ने अफसरों के पेंच कसे. लेकिन, आखिर बीते एक महीने में ऐसा क्या हो गया कि आलू, प्याज, टमाटर, लहसून, अदरक, परवल, करैला, बीन्स के भाव दोगुने हो गये.

सात साल पहले इतना महंगा हुआ था आलू

लौकी 20 की थी, 40 की हो गयी. हरी सब्जियों की कीमतों में उछाल आये तो एक हद तक बात समझ में आती है कि चलो इन दिनों बरसात की वजह से पैदावार गिर गयी होगी. पौध भी पानी से सड़ जाती है लेकिन, आलू. आपको याद नहीं होगा कि आपने कब इतना महंगा आलू खरीदा होगा. आलू ने पिछले एक डेढ़ महीने से रफ्तार पकड़ी है. घर के बाहर ठेले वाले 10-15 रूपये किलो दे जाते थे. लेकिन, हर हफ्ते 5 रूपये प्रति किलो दाम बढ़ने शुरु हुए. पहले बीस, फिर पच्चीस और आज की तारीख में 40 रूपये प्रति किलो. आलू के एक व्यापारी ने बताया कि साल 2013 में इतना महंगा आलू बिका था और उसी ने बताया कि इस समय भाव क्यों तेज है.

कम पैदावार रही वजहदुबग्गा थोक सब्जी मंडी में आढ़ती मो. रियाज एण्ड कंपनी के आमिर ने बताया कि गनीमत है कि लॉक डाउन रहा नहीं तो आलू पचास में बिक रहा होता. आलू की फसल जब खेत में लगी थी तब मौसम बहुत खराब रहा. पैदावार में कमी का असर ये रहा कि यूपी के आलू बेल्ट का कोई भी कोल्ड स्टोरेज पूरा नहीं भर सका. जब पैदावार ही कम रही तो कीमत तो बढ़ेगी ही. इसमें और उछाल आता यदि लॉकडाउन न होता. सहालग और स्कूल कॉलेज बन्द होने से आलू की खपत बहुत कम रही. हालांकि उम्मीद ये है कि और कीमतों में बढ़ोतरी अब नहीं होनी चाहिए.

जमाखोरी से भी समस्या बढ़ी है

प्याज की भी कुछ यही कहानी है. दुबग्गा सब्जी मंडी में प्याज के थोक आढ़ती रज़ी भाई ने बताया कि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से प्याज की आवक गिरी है. यदि सरकार ने प्याज बाहर भेजना न बन्द किया होता तो हालात और खराब होते. कुछ तो जमाखोरी से भी समस्या बढ़ी है. आलू की जमाखोरी में संकट है क्योंकि उसके जल्दी सड़ने का डर रहता है लेकिन प्याज में ये संकट नहीं है. ऐसे में दाम जल्द टूटने लगेंगे और प्याज काबू में आ जायेगा.

टमाटर भी हुआ लाल

टमाटर 80 पहुंच गया है. हिमाचल और उत्तराखण्ड से आने वाला टमाटर सीजन खत्म होने के कारण बन्द हो गया है. आप अभी जो टमाटर खा रहे हैं वो कर्नाटक से आ रहा है. इसीलिए महंगा है. थोक मण्डी दुबग्गा में आढ़ती हाज़ी अब्दुल कादिर एण्ड कंपनी के हम्ज़ा ने बताया कि बुधवार को 25 किलो की क्रेट 1300 रूपये में बिकी है यानी थोक में 52 रूपये किलो. तीन दिन पहले 1600 का भाव था. अब फुटकर में तो इसकी कीमत 80 रूपये किलो तक तो पहुंच ही जायेगी. हम्ज़ा को लगता है कि अगले एक दो महीने तक टमाटर ऐसे ही तेज बना रहेगा.

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