बिकरू कांड- विकास दुबे की मेहरबानी से प्रधान बनने वालों को लगा बड़ा झटका, छिनी प्रधानी

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कानपुर। विकास दुबे की महरबानी से प्रधान बनने वालों को बड़ा झटका लगा है। कानपुर में चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरु गांव में बीते दो जुलाई को गैंगस्टर विकास दुबे ने सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी। इसके ठीक 8वें दिन विकास दुबे भी पुलिस की गोली का शिकार हुआ था। गुरुवार को जिला प्रशासन ने विकास दुबे की एक और पहचान भी मिटा दी। बिकरु गांव और पड़ोस के भीटी गांव के प्रधानों को उनके पद से हटा दिया गया। बिकरु गांव में बीते 25 सालों से विकास दुबे के छोटे भाई दीपक की पत्नी अंजनी दुबे प्रधान थी। विकास दुबे का गांव में आतंक इस कदर था कि अंजलि निर्विरोध चुनी गई थी। जबकि भीटी गांव में जिलेदार सिंह ग्राम प्रधान था। जिलेदार वर्तमान में जेल में है। उसे विकास दुबे की मेहरबानी से प्रधानी मिली थी।

प्रशासन ने ग्राम पंचायत सदस्यों को कार्यवाहक प्रधान बनाया

कानपुर शूटआउट के बाद से बिकरु और भीटी गांव के प्रधानों ने पंचायत राज विभाग से संपर्क नहीं किया था। नोटिसों का जवाब भी दोनों प्रधानों की तरफ से नहीं दिया गया। जिसके चलते दोनों गांवों का विकास कार्य ठप था। विकास कार्य को आगे बढ़ाने के लिए इन गांवों में नए प्रधान नामित कर दिए गए हैं। बिकरु गांव में अंजलि दुबे को हटाकर रामश्री को कार्यवाहक प्रधान बनाया गया है, वहीं भीटी में जिलेदार को हटाकर विष्णु पाल सिंह को प्रधान का अधिकार सौंपा गया है।

आसपास के 10 गांवों की प्रधानी में था दखल

गांव वालों का कहना है कि विकास दुबे का खौफ इस कदर था कि आसपास के 20 से अधिक गांवों में उसकी मर्जी से ही प्रधान चुने जाते थे। दबंगई के बल पर जिसे वह चाहता था, प्रधानी का सेहरा उसी के सिर बंधता था। बीते 25 सालों से बिकरु गांव में उसके परिवार या फिर उसके गिरोह के लोग ही ग्राम प्रधान बन रहे थे। बिकरु गांव से विकास और उसकी पत्नी ऋचा दुबे भी प्रधान रह चुकी है। वर्तमान में बिकरु गांव में उसकी बहू अंजलि प्रधान थी। लेकिन पूरी जिम्मेदारी धीरेंद्र दुबे उर्फ धीरू संभालता था। उसकी मर्जी के बगैर गांव में एक ईंट भी नहीं लग सकती थी।

क्या है कानपुर शूटआउट?

कानपुर के चौबेपुर थाना के बिकरु गांव में 2 जुलाई की रात गैंगस्टर विकास दुबे और उसकी गैंग ने 8 पुलिसवालों की हत्या कर दी थी। अगली सुबह से ही यूपी पुलिस विकास गैंग के सफाए में जुट गई। 9 जुलाई को उज्जैन के महाकाल मंदिर से सरेंडर के अंदाज में विकास की गिरफ्तारी हुई थी। 10 जुलाई की सुबह कानपुर से 17 किमी पहले पुलिस ने विकास को एनकाउंटर में मार गिराया था। इस मामले में अब तक मुख्य आरोपी विकास दुबे समेत छह एनकाउंटर में मारे गए हैं।

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