हरसिमरत कौर के इस्‍तीफे पर संजय राउत ने ली चुटकी, कहा- ‘NDA में कुछ तो गड़बड़ है’

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हाइलाइट्स:

  • शिवसेना के नेता संजय राउत का कहना है कि कुछ तो गड़बड़ है
  • हम दोनों तो सबसे पुराने सहयोगी थे, बाकी तो पेइंग गेस्‍ट हैं- राउत
  • अकाली दल और शिवसेना का साथ बरकरार- संजय राउत
  • राउत बोले- अकाली दल अगर झूठ बोल रहा है तो हरीशचंद्र कौन है

मुंबई
कृषि विधेयक को लेकर विपक्षी दलों के साथ ही सरकार के सहयोगी भी उनका विरोध कर रहे हैं। पंजाब में एनडीए की सहयोगी शिरोमणि अकाली दल की ओर से मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने गुरुवार को बिल के विरोध में इस्‍तीफा दे दिया था। वहीं अब एनडीए के पूर्व सहयोगी शिवसेना के नेता संजय राउत ने सरकार पर निशाना साधा है। संजय राउत ने कहा है कि जो बातें प्रधानमंत्री कह रहे हैं इसके बावजूद अगर आपका मंत्री इस्तीफा देता है तो कुछ गड़बड़ी है।

एक निजी न्‍यूज चैनल से बात करते हुए संजय राउत ने कहा कि प्रधानमंत्री जो बात कह रहे हैं, अगर इसके बाद कोई मंत्री इस्‍तीफा देता है तो कुछ गड़बड़ है। उन्‍होंने कहा कि हमने एनडीए नहीं छोड़ा। वे झूठ की राजनीति कर रहे थे, जिसके कारण हम मजबूर हो गए थे। हम दोनों तो सबसे पुराने सहयोगी थे, बाकी तो पेइंग गेस्‍ट हैं।

कहीं तो है गड़बड़- संजय राउत
कृषि विधेयक पर संजय राउत ने कहा कि एनडीए को कृषि बिल पर चर्चा करनी चाहिए थी। अगर सभी दलों को छोड़ भी दें, तो कृषि सेक्टर से जुड़ा महत्वपूर्ण फैसला लेते वक्त भी रणनीतिक चर्चा करनी चाहिए थी। इस बिल पर कोई चर्चा ही नहीं हुई। सभी लोग कह रहे हैं कि इससे किसानों को नुकसान होगा। एनडीए की पूर्व सहयोगी शिवसेना के नेता संजय राउत का कहना है कि जो बातें प्रधानमंत्री कह रहे हैं इसके बावजूद अगर आपका मंत्री इस्तीफा देता है तो कुछ गड़बड़ी है।

‘अकाली दल और शिवसेना का साथ बरकरार’
संजय राउत ने कहा कि पहले शिवसेना ने एनडीए को छोड़ा था और अब शिरोमणि अकाली दल ने छोड़ा है। इसका मतलब कुछ तो गड़बड़ है। उन्‍होंने कहा कि हम और अकाली दल आज भी एक साथ हैं।

‘तो फिर कौन है हरीशचंद्र’
उन्होंने यह भी कहा कि हम झूठ बोल रहे थे, अकाली दल अगर झूठ बोल रहा है तो हरीशचंद्र कौन है। बिल को लेकर पंजाब के किसानों की नाराजगी पर संजय राउत बोले कि पंजाब में किसान नाराज हैं तो मतलब पूरे देश में किसान नाराज हैं। महाराष्ट्र पंजाब के साथ है। उन्होंने कहा कि पंजाब के बाद अब हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में भी किसानों का प्रदर्शन शुरू होगा।

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