केरल में 90 साल की वृद्ध महिला अखबारों के ई-संस्करण को पढ़ने के लिए सीख रही हैं लैपटॉप का उपयोग

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लैपटॉप पर अखबार पढ़ती हुई मैरी मैथ्यूज

नई दिल्ली: कोरोना संकट के दौर में सबसे अधिक परेशानी अधिक उम्र के लोगों को हो रही है. लेकिन इन सब के बीच केरल से आ रही यह तस्वीर उन करोड़ों वृद्धों के लिए प्रेरणादायक बन सकती है जो अपनी बढ़ती उम्र के कारण जिंदगी से हार मानने लगते हैं. केरल की एक 90 वर्षीय दादी की इंटरनेट पर उन तस्वीरों ने दिल जीता है जिसमें वो खबर पढ़ने के लिए लैपटॉप का उपयोग करते हुए देखी जा रही है. समाचार वेबसाइट Mashable द्वारा महिला की पहचान मैरी मैथ्यू के रूप में की गई है. उनके पोते, अरुण थॉमस द्वारा साझा किए जाने के बाद उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है.
मैथ्यू का जन्म 1930 के दशक में हुआ था, जब लैपटॉप मौजूद नहीं था और समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के माध्यम से ही समाचार को पढ़ा जाता था. 90 साल की उम्र में, वह अब ई-समाचार पत्रों को पढ़ने के लिए एक लैपटॉप का उपयोग करना सीख रही है. उनकी इस उपलब्धि पर सोशल मीडिया में उन्हें खूब प्यार और प्रशंसा मिल रही है.

अरुण थॉमस ने रेडिट पर अपनी दादी की तीन तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, “मेरी दादी, 90 साल की उम्र में, ई-अखबार पढ़ने के लिए लैपटॉप का इस्तेमाल करना सीख रही है. मुझे लगता है कि बदलाव को स्वीकार करने और उनके अनुकूल होने की उनकी इच्छा वास्तव में प्रशंसनीय है.” उस तस्वीर पर 8,000 से अधिक लाइक्स और सैकड़ों कमेंट सामने आए हैं.

लोगों ने नए कौशल सीखने के लिए सुश्री मैथ्यूज की प्रशंसा की, वहीं कई अन्य लोगों ने उनके पोते से उन्हें पढ़ने में आसानी के लिए आईपैड या टैबलेट खरीदने पर विचार करने के लिए कहा. कमेंट सेक्शन में थॉमस ने लिखा कि उनकी दादी अभी भी डिजिटल अखबारों को अधिक पसंद नहीं करती हैं, उन्होंने लिखा, “जाहिर है कि वह इसे उतना पसंद नहीं करती हैं, जितना कि फिजिकल पेपर को लेकिन मुझे लगता है कि वह बहुत तेजी से आगे बढ़ रही हैं और यह बहुत जल्द पसंद करने लगेगी”

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए, उन्होंने आगे बताया कि परिवार ने COVID-19 के डर से फिजिकल पेपरलेना बंद कर दिया है “वह पिछले एक महीने से समाचारों को ऑनलाइन पढ़ रही है, धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से सीख रही है. हमें कोविड -19 की आशंका के कारण फिजिकल पेपर को छोड़ना पड़ा और वो अखबार पढ़ना पसंद करती है, इसलिए, यह एकमात्र तरीका था,”

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