Hathras Case: 12 गांव के सवर्णों की पंचायत के बाद डर रहा पीड़ित परिवार, भाई ने कहा- आज सब हैं, कल जब कोई नहीं रहेगा तो हमारी……

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हाथरस। उत्तर प्रदेश में हाथरस जिले के गांव की 19 साल की दलित लड़की के साथ 14 सितंबर को हैवानियत की गई। 28 की सुबह उसकी मौत हो गई थी। इस केस की जांच सीबीआई से कराए जाने की सिफारिश हो चुकी है। लेकिन जिस तरह से इस मामले को लेकर क्षेत्र में जातीय चिंगारी उठने लगी है, उससे परिवार डरा-सहमा है।

आज सुबह पीड़ित परिवार के घर में रविवार रात की तरह भीड़ तो नहीं है, लेकिन कमरे से रह-रहकर सिसकियों की आवाजें आ रही है। कुछ मीडियाकर्मी कैमरे लिए आंगन में इधर से उधर घूम रहे हैं और सुबह-सुबह परिवार के किसी सदस्य को टीवी पर लाने के लिए परेशान हैं। इन सबके बीच परिवार अपने रिश्तेदारों से मिल रहा है और अपना दुख बांट रहा है।

पीड़ित के भाई ने कहा पंचायत के बाद डर है हमें

पीड़ित के भाई ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मुझे पता चला है कि 12 गांव के सवर्ण लोगों की पंचायत हुई है। ऐसे में हम लोगों को डर लग रहा है। हमें सुरक्षा की जरूरत है क्योंकि आज सभी हैं। कल जब कोई नहीं रहेगा तब क्या करेंगे। आसपास के गांव वर्ग विशेष बाहुल्य हैं। आज हाथरस कांड को लेकर मथुरा में महापंचायत का ऐलान किया गया है। यह ऐलान क्षत्रिय राजपूत महासभा ने किया है। आरोप है कि केस में सच्चाई को दबाया जा रहा है। बेटी को न्याय मिले, लेकिन किसी निर्दोष को न फंसाया जाए।

डीएम को हटाना जरूरी है

पीड़ित के रिश्तेदारों ने एक सुर में कहा कि जिस डीएम ने बिटिया की लाश लावारिसों की तरह जलवा दी, उससे इंसाफ की उम्मीद कैसे करेंगे? जो लगातार हमें धमकाता रहा, उससे कैसे इंसाफ मिलेगा। परिवार की मांग है कि डीएम प्रवीण कुमार को हटाया जाए।

बाहर से भी लोग आ रहे परिवार से मिलने

आगरा, मथुरा, अलीगढ़ यहां तक दिल्ली से लोग पीड़ित परिवार से मिलने पहुंच रहे हैं। इनका कहना है कि हम लगातार मीडिया में पीड़ित परिवार को देख रहे हैं। हम इनसे मिलकर आश्वासन देने आए हैं। और बाहरी दुनिया को बताएंगे कि आखिर कितनी परेशानी में है पीड़ित परिवार।

परिवार के बीच पहुंची एसआईटी।

एसआईटी की टीम पहुंची है जांच के लिए

रविवार सुबह एक बार फिर एसआईटी की टीम जांच के लिए पहुंची। शनिवार रात जब एसआईटी की टीम पिता का बयान लेने पहुंची थी तो बयान नहीं हो पाया था। एसआईटी के नाम पर ही मीडिया को तीन दिन तक गांव में जाने नहीं दिया गया। हालांकि जांच अब सीबीआई को ट्रांसफर कर दी गई है, लेकिन एसआईटी अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट सरकार को भेजेगी।

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