रंगकर्मी विलायत जाफरी ने मुंबई में अंतिम सांस ली, 85 की उम्र में कोरोना को मात देकर घर लौटे थे, मगर बिगड़ती गई तबीयत

0
133
.

 

  • लखनऊ आकाशवाणी और दूरदर्शन के निदेशक भी रहे, रायबरेली में 1935 में जन्म हुआ था
  • लखनऊ से रहा खासा जुड़ाव और लगाव, दैनिक भास्कर ने साहित्यकार और रंग मंच को देखने-सुनने वालों से उनके किस्से जाने

प्रख्यात रंगकर्मी विलायत जाफरी का सोमवार को मुंबई में निधन हो गया। वे 85 साल के थे। वे शुरूआत से ही दूरदर्शन से जुड़े रहे। लाइट एंड साउंड प्रोग्राम का उन्हें जनक माना जाता है। वे कहानीकार, नाट्य लेखक, निर्देशक और दूरदर्शन के पूर्व निदेशक भी रहे। कुछ समय पहले उन्हें कोरोना से संक्रमित होने के कारण मुंबई के हीरा नंदानी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। वे कोरोना को मात देकर घर भी लौट आए थे, पर उनका स्वास्थ्य दिनोंदिन गिरता गया। उनके निधन की खबर से लखनऊ में रहने वाले उनके कद्रदानों में शोक छा गया है। दैनिक भास्कर ने लखनऊ के साहित्यकार और रंग मंच को देखने-सुनने वालों से उनके किस्से को लेकर बातचीत की।

मुहब्बत की असल परिभाषा जाननी हो तो लखनऊ को समझिए

इतिहासकार रवि भट्ट बताते हैं कि विलायत जाफरी का लखनऊ से खासा जुड़ाव था। जाफरी साहब के घर से लेकर बाहर तक गंगा जमुनी तहजीब बयां होती थी। एक बार जाफरी साहब ने एक मंच पर कहा था कि मुहब्बत तो सबने कभी न कभी, किसी न किसी से की होगी, लेकिन मुहब्बत की असल परिभाषा जाननी हो तो थोड़ा लखनऊ को समझ लीजिए। जैसे मुहब्बत में अपनी पहचान बरकरार रखते हुए प्रेमी एक-दूसरे में समा जाते हैं, जैसे गंगा और जमुना अलग दिखते हुए भी संगम में एक हो जाती हैं, वैसे ही लखनऊ भी है।

मृदुला भारद्वाज।

रंगमंच के कलाकारों को करते थे प्रोत्साहित

रंगमंच से जुड़ी और इतिहासकार मृदुला भारद्वाज बताती हैं कि 1991 की बात है, जब हम “निपा रंग मंडली के जरिए ‘भगवत अजुकीयम’ नाटक करने के लिए नार्वे देश जा रही थी। तब पहली बार जाफरी साहब से हम मिले थे। उन्होंने पूछा नाटक क्या है? तब हमने बताया इस पर उन्होंने कहा यह तो बहुत अच्छा है। आप सभी नार्वे देश से वापस लौटिए, हम आपका नाटक (रंगमंच) दूरदर्शन पर करवाएंगे। क्योंकि यह नाटक सब तक पहुंचाना चाहिए, इसके बाद हम सभी आए तब जाफ़री साहब ने नाटक करवाया। जिसके बाद भगवत अजुकीयम नाटक 21 देशों में अब तक कर चुकी हूं। मृदुला भारद्वाज बताती हैं कि जाफरी साहब की आदत थी वह नए रंगमंच कलाकारों को प्रोत्साहित करते थे और वह सबका परिचय बढ़-चढ़कर करवाया करते थे। उन्होंने हमारे कई रंग मंच के कार्यक्रम को दूरदर्शन पर जगह दी, जिसके बाद कई देश-विदेश तक पहुंचा।

कुछ दिन पहले हुआ था कोरोना, 
मृदुला बताती हैं कि इस बार कोरोना की वजह से हम विलायत जाफरी साहब के घर सिवइयां खाने नहीं जा पाए। उनसे फोन पर वार्ता भी हुई थी। वह भी कह रहे थे हम भी आप सभी को याद कर रहे हैं। उनका जाना रंगमंच की शख्सियत में बहुत बड़ा नुकसान है। जो शायद ही कभी पूर्ति हो पाए।

मशहूर लाइट एंड साउंड प्रोग्राम, ये रहे चर्चित कार्यक्रम
विलायत जाफरी आकाशवाणी के डायरेक्टर और दूरदर्शन में डायरेक्टर उसके बाद डिप्टी डायरेक्टर जनरल की जिम्मेदारी संभाली। 1969 में विलायत जाफरी ने हजारों देखने वालों के सामने हिंदुस्तान का पहला लाइट एंड साउंड प्रोग्राम जलियांवाला बाग के हादसे पर विजन 1919 के नाम से पेश किया। लखनऊ में बेलीगारद में जो प्रोग्राम बढ़ते कदम के नाम से उन्होंने प्रस्तुत किया, इसकी कामयाबी का अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है कि वह लगातार पांच महीनों से ज्यादा पेश किया जाता रहा है। लुत्फ यह कि हर रात दो शो होते थे। उन्होंने पुराना किला दिल्ली-1971, बढ़ते कदम लखनऊ एवं भरत के दूसरे भागों में 1974, बहादुरशाह जफर, हुमायूं मकबरा दिल्ली-1976, गालिब जहाज महल, महरौली दिल्ली-1978, अनारकली चंडीगढ़-1980 और इस तरह के 22 कार्यक्रम पूरे भारत भर में चर्चा में रहे।

रायबरेली में हुआ था जाफरी का जन्म

विलायत जाफरी का जन्म उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में दो अक्टूबर 1935 को हुआ था। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से शिक्षा ली थी। वे 1986 में पहली बार लखनऊ आकाशवाणी केंद्र के निदेशक बने, उसके बाद 1988 में दूरदर्शन केंद्र लखनऊ के निदेशक रहे। विलायत जाफरी का लखनऊ से खासा जुड़ाव और लगाव रहा। उन्होंने दूरदर्शन में अपने कार्यकाल के दौरान प्रायोजिक धारावाहिकों की शुरूआत की थी। नीम का पेड़ धारावाहिक उनके कार्यकाल में काफी लोकप्रिय हुआ था। बताया जा रहा है कि उनका जनाजा मुंबई से रायबरेली लाया जाएगा। रायबरेली में उनके खानदानी कब्रिस्तान में मंगलवार को उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

 

Source link

Authors

.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here