कंगना रनोट की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा, एक्ट्रेस ने बीएमसी से 2 करोड़ रुपए का हर्जाना मांगा है

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मनोरंजन डेस्क। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा कंगना रनोट के ऑफिस में हुई तोड़फोड़ के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट में बहस पूरी हो गई है। जस्टिस एस जे कथावाला और जस्टिस आर आई चागला की पीठ कंगना ने सोमवार को दोनों पक्षों के लिखित सबमिशन एक्सेप्ट किए। दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।

क्या है कंगना रनोट की दलील?

कंगना रनोट के वकील वीरेंद्र सराफ ने याचिका में आरोप लगाया था कि बीएमसी ने उनके बंगले पर तोड़फोड़ की कार्रवाई दुर्भावनावश की है। उनका कहना था कि कंगना ने मुंबई पुलिस के खिलाफ कमेंट किया था, जिसके बाद महाराष्ट्र की शिवसेना सरकार ने उनके खिलाफ यह कार्रवाई की।

एक्ट्रेस ने अदालत से आग्रह किया है कि उनकी बिल्डिंग के एक हिस्से को गिराए जाने की कार्रवाई को अवैध करार देते हुए बीएमसी को उन्हें हर्जाने के रूप में 2 करोड़ रुपए देने के निर्देश दिए जाएं।

बीएमसी ने बचाव में क्या कहा?

बीएमसी ने लिखित हलफनामे में दुर्भावना एवं निजी बदले की भावना से कार्रवाई की बात से इनकार किया। बीएमसी ने यह भी कहा कि बंगले को आंशिक रूप से ढहाए जाने को लेकर कंगना का बीएमसी से दो करोड़ रुपए के मुआवजे का दावा विचार योग्य नहीं है।

बंगले को 40 फीसदी ध्वस्त किया गया था

8 सितंबर को बीएमसी ने कंगना के ऑफिस पर नोटिस चिपकाया था और अवैध निर्माण को लेकर 24 घंटे में जवाब मांगा था। लेकिन अगले दिन कंगना के मुंबई पहुंचने से पहले ही उनके ऑफिस में तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू कर दी गई।

कार्रवाई रुकवाने के लिए एक्ट्रेस के वकील ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन जब तक कोर्ट का आदेश आया, तब तक बंगले को 40 फीसदी ध्वस्त किया जा चुका था। इसमें झूमर, सोफा और दुर्लभ कलाकृतियों समेत कई कीमती संपत्ति भी शामिल है।

 

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