हाईकोर्ट का सख्त आदेश- यूपी में माफियाओं की अवैध संपत्ति पर बुलडोजर चलाने से पहले करना होगा कानून का पालन

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प्रयागराज. गाजीपुर (Ghazipur) के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) के बेटे अब्बास अंसारी और एक अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने अपराध से अर्जित यूपी में माफियाओं की अवैध संपत्तियों के खिलाफ बुलडोजर चलाने की कार्रवाई पर रोक लगा दी है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले में राज्य सरकार (State government) को अवैध भवन ध्वस्तीकरण को लेकर सामान्य समादेश जारी किया है.‌‌‌‌‌ कोर्ट ने आदेश का पालन करने के लिए मुख्य सचिव सहित प्राधिकरण उपाध्यक्षों व सभी जिलाधिकारियों को निर्देश भी दिया है.

कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव, सभी विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्षों, सभी जिलाधिकारियों को आदेश की प्रति भेजने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ 30 दिन में अपील दाखिल करने की अवधि तक कार्रवाई न की जाए. अपील पर अंतरिम अर्जी दो हफ्ते में तय की जाए. अर्जी तय न होने तक ध्वस्तीकरण पर रोक रहे. ध्वस्तीकरण आदेश मकान मालिक को दिया जाए. उसकी आपत्ति सुनकर फैसला किया जाए. यह आदेश जस्टिस शशिकांत गुप्ता और जस्टिस पंकज भाटिया के खंडपीठ ने अब्बास अंसारी व जमशेद रजा की याचिका पर दिया है.

याची का कहना है कि उसने 29 सितंबर 2000 को जमीन का बैनामा कराया. 5 दिसंबर को व्यावसायिक निर्माण का नक्शा पास कराने का आवेदन दिया. 31 दिसंबर 2002 को कंपाउन्डिंग का अनुमोदन कर दिया गया. किंतु बिना सुनवाई 15 सितंबर 20 को अनुमोदन निरस्त कर दिया गया है और 16 सितंबर 20 को ध्वस्तीकरण का कारण बताओ नोटिस दिया गया. 8 अक्टूबर को एक हफ्ते में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का आदेश जारी किया गया है, जिसे चुनौती दी गई थी. याची का कहना है कि उसे अपील दाखिल करने का समय दिया दिया जाना चाहिए. तब तक कार्रवाई रोकी जाए. कोर्ट ने याची को ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ 10 दिन में अपील करने और उसपर दाखिल अंतरिम अर्जी दो हफ्ते में निर्णित करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने पूरे प्रदेश में ध्वस्तीकरण के खिलाफ कार्रवाई पर सामान्य समादेश जारी कर अमल करने का निर्देश दिया है.
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