Chhath Puja 2020: भाजपुरी गायिका अक्षरा सिंह ने छठ पूजा को लेकर भोजपुरी में रखी अपनी बात…

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भोजपुरी डेस्क। भोजपुरी गायिका अक्षरा सिंह ने एक निजी चैनल से बात करते हुए छठ पूजा पर अपनी बात रखी है।

कइसे पॉवरफुल ह?

एकरा जवाब में अक्षरा सिंह बतावत हई- “अम्मा के मार से बुझाइल.” उ याद करेली – “शायद पांच-छह साल के उमिर रहे. वो घरी शारदा सिंहा के एगो गीत छठ पर बहुत चलल रहे. ओकरा बोल में बिल्ली म्यायूं के जिक्र रहे. गीत सुनला पर इस शब्द बाल बुद्धि के बहुत अच्छा लागे. छठ के मौका पर इहे गीत सुन के खूब हंसत रहनी. खिलखिलात रहनी. एही बीच अम्मा आ गइली आ उनका हांथ में बेलना रहे वही से हमरा पैर में उ खूब मरली. एतना मरिली कि गोड़ सूज गइल.”अक्षरा सिंह कहेली कि दरअसल बाति से इ ना बुझाइत कि का गलती रहलि हा. अम्मा के पिटाई से हमेशा खातिर समझि में आ गइल कि छठ बहुत पॉवरफुल त्योहार हा. एगरा में कवनो हंसी मजाक ना हो सकेला. इ पवित्रता के पर्व हा आ कवनो गलती के फल तुरंते मिल जाला. अक्षरा बतावेली कि तब से इ बात के गांठ बंधा गइल कि छठ के पूरा श्रद्धा से मनवावे के बा.

त अब कहां मनावेली छठ?

मौका मिलते पटना में. अक्षरा याद करेली-“दू साल पहिले बहुत सारा कलाकार लोगने के संगे पटना में छठ प्रोग्राम में शामिल भइल रहनी.” परिवार के छठ यादि करत अक्षरा कहेली कि परिवार के संग सबसे अच्छा छठ होत रहलि हा. परिवार आ मोहल्ला सब मिलिके एक संगे छठ करत रहल हा. खूब मजा होत रहलि हा.

सब मिलिके छठ मनावत रहल हा.”

अक्षरा सिंह के मुंबई के छठ भी खूब याद आवेला. उ याद करेली जूहू के छठ के उत्साह देखत बनेला. कई बार उहां प्रोग्राम भी कइ चुकल बाड़ी. कहेली कि पहले खाली बिहार के लोगन के उत्साह रहत रहत रहल हा अब यूपी के लोग भी एकरा मे उत्साह के संगे शामिल होता. छठ के गीत

छठ के भोजपुरी गीत

छठ के गीत के बारे में चर्चा कइला पर अक्षरा कहेली – “भोजपुरी के छठ के गीत जब बाजेला त रोआं रोआं सिहर उठेला. असल में भोजपुरी के ट्यून बाजते एगो उत्साह आ उमंग मन में भर जाला. लोगन के बहुत प्रेम मिलेला. भोजपुरी में पहला हाली 100 मिलियन से ज्यादा लोग हमरा गीत के पसंद कइले बा, इहो लोगन के प्रेम के नमूना बा.”

संदेश

छठ खातिर लोगन के संदेश देत अक्षरा कहेली – “ युवा पीढ़ी के लोगन के चाहिं कि उ पुरान पीढ़ी से ये परंपरा के ठीक से सीखे अउरी एकरा के आगे बढ़ावे.” नयी पीढ़ी के धड़कन बन चुकल अक्षरा सिंह के राय बा कि अगर समाज अपना परंपरा से ना जुड़ल रही त समाज के सही राहि ना मिली. इहे पर्व त्योहार ह जवन सबका के जोड़ के रखला.”
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