Corona: जिस दवा को सबसे कारगर बताया जा रहा था WHO ने उसी पर लगा दी रोक, बताई ये चौंकाने वाली वजह

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डेस्क। कोरोना वायरस (Coronavirus) के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा रेमडेसिवीर (Remdesivir) को शुरूआत में काफी कारगर माना जा रहा था. हालांकि धीरे-धीरे ये बात भी सामने आई कि ये दवा कोरोना के गंभीर मरीजों पर प्रभावी नहीं है. अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी Gilead Sciences की इस दवा पर आपत्ति जताई है और इसे इस्तेमाल ना करने की सलाह दी है.

WHO के एक्सपर्ट पैनल ने बताया, ‘फिलहाल इस बात का कोई सबूत नहीं है कि रेमडेसिवीर दवा मरीजों में किसी तरह का सुधार करती है.’ एक्सपर्ट पैनल ने WHO के ग्लोबल ट्रायल के नतीजे सामने आने के बाद ये सिफारिशें की हैं. WHO के इस ग्लोबल ट्रायल को सॉलिडैरिटी ट्रायल(Solidarity Trial) भी कहा जाता है.

सॉलिडैरिटी ट्रायल के नतीजों में पाया गया कि रेमडेसिवीर दवा मौत के आंकड़ों को कम करने में असफल रही है. एक्सपर्ट पैनल ने तीन अन्य ट्रायल के आंकड़ों की भी समीक्षा की. पैनल ने कहा कि इस दवा का मरीजों पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ रहा है. सॉलिडैरिटी ट्रायल के नतीजे अक्टूबर के महीने में प्रकाशित हुए थे.

वहीं अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ द्वारा किए ट्रायल में इस दवा को कारगर बताया गया था. इंस्टीट्यूट का कहना था कि रेमडेसिवीर दवा अस्पताल में भर्ती मरीजों के रिकवरी समय को 5 दिनों तक कम कर देती है. इंस्टीट्यूट के इस दावे के बाद अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने इस दवा को मंजूरी दे दी थी.

अक्टूबर में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को भी कोरोना के इलाज में रेमडेसिवीर दवा दी गई थी. हालांकि WHO के एक्सपर्ट पैनल का कहना है कि उनके निष्कर्षों का यह अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए कि रेमेडिसविर दवा निष्प्रभावी है, लेकिन वर्तमान में उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर इस बात का कोई सबूत नहीं है कि कोरोना के मरीज में किसी तरह का सुधार करती है.

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