मलयालम फिल्म ‘Jallikattu’ करेगी 93वें एकेडमी अवॉर्ड्स में भारत का प्रतिनिधित्व, इन फिल्मों को मिली तरजीह

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मनोरंजन डेस्क। 25 अप्रैल 2021 को लॉस एंजेलिस में होने वाली 93वें एकेडमी अवॉर्ड्स के लिए भारत की ओर से मलयालम फिल्म जल्लीकट्‌टू को आधिकारिक एंट्री घोषित किया गया है। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया की 14 सदस्यों की एक कमेटी ने डायरेक्टर लिजो जोस पेलीसरी की इस फिल्म को चुना है। जल्लीकट्‌टू बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म फॉरेन लैंग्वेज कैटेगरी में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी।

जल्लीकट्‌टू पर देश को गर्व होना चाहिए-राहुल

फेडरेशन के जूरी बोर्ड चेयरमैन राहुल रवैल ने घोषणा करते हुए कहा- यह एक ऐसी फिल्म है जो वास्तव में उन समस्याओं को सामने लाती है जो इंसानों में हैं, यानी हम जानवरों से भी बदतर हैं। राहुल कहते हैं- पेलीसरी बहुत काबिल डायरेक्टर हैं। जिन्हें अंगमाली डायरीज, इआ, मा याऊ के लिए जाना जाता है। उनकी जल्लीकट्‌टू ऐसी फिल्म है जिस पर देश को गर्व होना चाहिए।

27 फिल्मों में से चुनी गई जल्लीकट्‌टू

93वें एकेडमी अवॉर्ड्स में भेजने के लिए हिंदी, उड़िया, मराठी और अन्य भाषाओं की कुल 27 फिल्मों के बीच मुकाबला था। जिनमें मेेघना गुलजार की छपाक, शूजित सरकार की गुलाबो सिताबो, सफदर रहना की चिप्पा, हंसल मेहता की छलांग, चैतन्य ताम्हणे की द डिसाइपल, विधु विनोद चोपड़ा की शिकारा, अनंत महादेवन की बिटरस्वीट, रोहेना गगेरा की इज लव इनफ सर, गीतू मोहनदास की मूथॉन, नीला माधब पांडा की कलिरा अतिता, अनविता दत्त की बुलबुल, हार्दिक मेहता की कामयाब और सत्यांशु-देवांशु की चिंटू का बर्थडे भी शामिल थी।

केरल के खेल पर आधारित है फिल्म

ऑस्कर के लिए भेजी गई जल्लीकट्टू केरल के इडुक्की जिले के विवादित खेल जल्लीकट्‌टू पर आधारित है। जिसमें एक बैल को मारने से पहले भीड़ के बीच छोड़ दिया जाता है। जल्लीकट्‌टू फिल्म का प्रीमियर सितंबर 2019 में टोरंटो फिल्म फेस्टिवल के दौरान हुआ था। फिल्म की कहानी माओवादी हरीश की लघुकथा पर आधारित है। जिसमें एंटोनी वर्गीश, चेम्बन विनोद जोस, साबुमन अब्दसमद और सैंथी बालाचंद्रन ने काम किया है।

फॉरेन लैंग्वेज कैटेगरी में अब तक नहीं मिला ऑस्कर

2019 में जोया अख्तर की गली बॉय को 2020 के लिए हुए 92वें एकेडमी अवॉर्ड्स के लिए आधिकारिक तौर पर चुना गया था। इसके पहले रीमा दास की विलेज रॉकस्टार्स, अमित मसुरकर की न्यूटन, वेट्री मारन की विसारानई और चैतन्य ताम्हणे की कोर्ट भी फॉरेन लैंग्वेज कैटेगरी में भेजी जा चुकी है। हालांकि अभी तक इस कैटेगरी में किसी भी इंडियन फिल्म ने ऑस्कर नहीं जीता है।

 

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