Kisan Andolan: सुप्रीम कोर्ट ने आंदोलनकारी किसानों से बात करने के लिए बनाई कमेटी

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मुंबई. सुप्रीम कोर्ट द्वारा किसानों से बातचीत के लिए बनाई गई कमिटी के सदस्य और किसान नेता अनिल घनवट (Farmer Leader Anil Ghanwat) ने बताया कि बीच का रास्ता निकालने का प्रयास किया जाएगा। ताकि आंदोलन करने वाले किसान और बिल के समर्थन वाले किसान नाराज ना हो और ऐसा रास्ता निकले जो सभी को मान्य हो।

उन्होंने कहा कि हम आंदोलनकारी किसानों से यह अपील करते हैं कि वे सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की गई कमिटी के सामने आकर अपनी बातों को रखें। हमारा प्रयास होगा कि आंदोलनकारी किसानों की जो मांगे हैं वह भी पूरी हो जाएं और जो किसान इस बिल का समर्थन करते हैं उन्हें भी उनका हक मिले। बिना बातचीत के कोई हल निकलना मुश्किल है।

राजू शेट्टी का आरोप

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा किसानों के आंदोलन को देखते हुए कृषि कानून (Agriculture Bill) के अमल पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस सिलसिले में एक चार सदस्यीय कमिटी का गठन भी किया है। अदालत ने केंद्र सरकार (Central Government) से इस मामले में हलफनामा दायर करने के लिए कहा है।

हालांकि इस आदेश को लेकर किसान संगठनों में अलग-अलग मत हैं। महाराष्ट्र में स्वाभिमानी शेतकरी पक्ष के नेता और पूर्व सांसद राजू शेट्टी (Former MP Raju Shetti) ने कहा है कि मुझे पहले से ही अंदेशा था कि सुप्रीम कोर्ट इस कानून पर कुछ दिनों के लिए स्टे जरूर देगा। सुप्रीम कोर्ट ने जो कमिटी बनाई है उसमें उन लोगों को सदस्य बनाया गया है। जो शुरू से ही इस कृषि कानून का समर्थन कर रहे थे एक भी विरोध करने वाले व्यक्ति को इस कमिटी में जगह नहीं मिली है। मेरी नजर में यह सब एक साजिश है ताकि दिल्ली में आंदोलन को रोका जा सके।

26 जनवरी के आंदोलन को रोकने की साजिश

राजू शेट्टी ने कहा कि 26 जनवरी को दिल्ली में होने वाले किसानों के महा आंदोलन को रोकने के लिए सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने यह साजिश रची है। कुछ दिनों के लिए इस आंदोलन को रोकने का प्लान है यह। जो मोहलत सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दी है उसमें सरकार फिर से अडानी और अंबानी को फायदा पहुंचाने के लिए दूसरे संशोधन कर फिर से अदालत में हाजिर होगी।

जीत की तरफ पहला कदम

महाराष्ट्र किसान सभा के नेता डॉ अजीत नवले ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है। किसानों का जीत की तरफ पहला कदम है। लेकिन जब तक यह तीनों कृषि कानून पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाते हैं तब तक किसानों की यह लड़ाई किसी भी कीमत पर रुकने वाली नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने जिस कमिटी का गठन किया है उसके सामने संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य और प्रतिनिधि जाएंगे या नहीं। इस पर आज फैसला लिया जाएगा।

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