छुटनी महतो-एक ऐसा नाम जो डायन से लड़ी और अब केन्द्र सरकार उसे पद्यश्री सम्मान से करेगी सम्मानित…

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नई दिल्ली. भारत सरकार ने झारखंड की सामाजिक कार्यकर्ता छुटनी महतो को अदृश्य और सदृश्य डायन से लडने पर पद्मश्री पुरस्कार देने की घोषणा की है. सरायकेला खरसावां ज़िले की रहनेवाली छुटनी ने खुद भी कभी डायन घोषित किये जाने का दंश झेला है। उस समाज के ठेकेदारों ने उसे मानव मल पीने के लिए मजबूर किया। यहा तक कि उसे गांव और घर से भी निकाल दिया। ये वह समय था जब उनके पति और परिवार ने भी उनका साथ नही दिया।लेकिन इस घटना ने छुटनी को इतना ताकतवर बना दिया कि वह खुद डायन विरोधी अभियान की कार्यकर्ता बना गयी।

छुटनी कहती है कि गांव वाले उसे आज भी डायन कहते है। उसने बताया कि वह बीरबांस थाना गम्हरिया जिला सरायकेला खरसांवा झारखण्ड की रहने वाली है . गम्हरिया थाने के महतांड डीह गाँव में उसकी शादी हुई थी। लेकिन उसे वहां से निकाल दिया गया। मात्र 12 साल की उम्र में ही धनंजय महतो से छुटनी का व्याह कर दिया गया था। जल्दी शादी तो बच्चे भी जल्दी हो गये । इस समय छुटनी के तीन बच्चे है।

घटना के विषय मे छुटनी बताती है कि सितम्बर 1995 में मेंरे पडोसी की बेटी बीमार हुई तो पहली बार लोगों शक जताया कि मैंने टोना कर दिया है गांव में पंचायत हुई और मुझे डायन करार दिया गया और सजा के तौर पर मेरे साथ बलात्कार किये जाने की सजा तय हुई कुछ लोग मेरे घर में घुसकर मेरे साथ बलात्कार करने की कोशिश भी की लेकिन मैं किसी तरह से बच गयी।

अगले दिन फिर पंचायत बैठी और इस बार पंचायत ने 500 रूपये का जुर्माना लगा। जुर्माना अदा करने के बाद भी हालात जस के तस बने रहे। फिर लोगों ने ओझा बुलाया और मेरे उपर से डायन उतारने के लिए ओझा ने मैला पिलाने का सुझाव दिया। जबरन मैला पिलाने के बाद मुझे घर में नही घुसने दिया गया और बच्चों के साथ मैंने रात पेड़ के नीचे गुजारी। इस वक्त पति भी मेरी मदद करने की स्थिति में नही थे।

नहीं मिली मदद

स्थानीय विधायक से मदद की गुहार लगाई थाने गयी लेकिन कोई मदद नही मिली। बड़ी मुश्किल से थाने में एफ आई आर दर्ज कराई लोग गिरफ्तार तो हुए लेकिन जमानत पर छूट गये। लेकिन इसी के बाद मेंरी किस्मत बदल गयी। और मैं ससुराल छोड़ मायके आ गयी।

मैं मेरे भाई और पति ने पैसे और जमीन से मेरी मदद की। छुटनी बताती है कि पांच सालों समय लग गया मुझे सामान्य होने में, लेकिन अब मेंरा मकसद है सिर्फ डायन घोषित की गयी महिलाओं के लिए काम करनां और यही कर भी रही हूं।

इसके लिए राज्य सरकार पहले ही छुटनी को सम्मानित कर चुकी है। और अब केन्द्र सरकार ने छुटनी की हिम्मत को सलाम करते हुए पद्यश्री सम्मान से सम्मानित करने का फैसला लिया है।

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